नज़र लग जाए न घर को, हज़ारों हैं बुरी नज़रें,
यही सब सोच के ही तो, नज़र माँ ने उतारी है।
दुआओं में भीगी रहती हैं, उसकी सब रातें,
कहीं तक़दीर की ठोकर से राहें न उतारी हैं।
मिरी हर जीत पर हंसकर वो रो पड़ती है क्यूँ,
म...और पढ़ें
हम दया के दीप दिल के द्वार पर धर भी न पाए
पर मनुज होने का दावा कर रहे हैं
सच बताओ जी रहे हैं या दिखावा कर रहे हैं
टाँक ली हैं पैरहन पर सूर्य की किरणें भले ही
मन मगर ऐसे उजालों से अपरिचित ही रहा है...और पढ़ें
कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में
जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में
'फ़िराक़' दौड़ गई रूह सी ज़माने में
कहाँ का दर्द भरा था मिरे फ़साने में
जुनूँ से भूल हुई दिल पे चोट खाने में
'फ़िरा...और पढ़ें
तुम भी अब शहर से डर जाते हो हद करते हो
देख कर मुझ को गुज़र जाते हो हद करते हो
नैन तो यूँही तुम्हारे हैं बला के क़ातिल
उस पे तुम रोज़ सँवर जाते हो हद करते हो
मेरी आँखों से भी आँसू नहीं गिरने पाते
मेरी...और पढ़ें
संसार को छोड़ चुका हूँ,
हवाएं मेरी साथी हैं,
किसी से उम्मीद नहीं, बस थोड़ी सी उम्मीद, इस ज़िंदगी में बाकी है।
अपना पराया त्याग कर, मैं अपने साथ चल दिया हूँ, अपनी खोज में निकला हूँ,
क्योंकि ज़िंदगी में, मैं अब भी बाकी हूँ।...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- निर्वाक, जिसका अर्थ है- मौन, चुप। प्रस्तुत है सोम ठाकुर की कविता- मंगल कलश नामंजूर
फिर कुहासे की कथा कहती रही धरती
लग रहा है - फाल्गुणों के दिन अभी है दूर
खंज...और पढ़ें
इंसान आराम चाहता है
आराम मिले तो और कमाना चाहता है
पुराने दिनों के लम्हे चाहता है
दोस्तों की यारी, करीब से जीना चाहता है
खैर चाहने से पूर्ति नहीं
इंसान बेवजह ही दुख-दर्द में जीना चाहता है, जीना चाहता है...और पढ़ें
प्रेम के साथ वही मत करो जो एक बच्चा अपने ग़ुब्बारे के साथ करता है; जब तक वह उसके पास होता है, वह उसे नज़रअंदाज़ करता रहता है, और जब वह उसे खो देता है तो रोता है।
~ पाब्लो नेरूदा
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सुना सोभिन माय - बहिन रंजीत के राय ,
झारखंडेक भाषा - संस्कृति राखिहा जोगाय ।
पढ़- लिख के बइन जिहा कतनों महान ,
तावो ना भुलिहा गो माय माटीक मान
कभी ना करिहा माय माटीक अपमान
झारखंडेक राखिहा तोंय मान ।
सुनी लिहा...और पढ़ें
तुम्हारा रुमाल
(मेरी पोती नैयरा के नाम)
तुम्हारा रुमाल
अब भी छुपा है
मेरे तकिए के नीचे—
जैसे वक़्त की सिलवटों में
दबा कोई नर्म-सा लम्हा।
उस दिन
जब वक़्त बेरहम होकर गुज़रा,
तुम्हें...और पढ़ें
क्या आपने भगवान को देखा है
यह प्रश्न सबको चौंका देता है
कुछ हाँ कहते कुछ ना कहते
पर वास्तव में सोचने पर
मजबूर हो जाते कि भगवान है कहाँ
भगवान तो हर जगह हैं
चाहे जीव हो या निर्जीव
जड़ हो या चेतन...और पढ़ें
फूल खिल उठे हैं खिजाओं में
ताजगी इतनी है इन हवाओ में
मैं उजड़कर भी आबाद रहा
वो असर था तेरी दुआओ में
पाकर मंजिल मुझे वो भूल गया
मुंतज़िर हम थे जिसके राहों में
दस्त में रास्ते हरगिज न मिलें
पर घुटन सी भी...और पढ़ें
आसमाँ पर तुम्हारा जो अभी गरूर है
ये फकत तख्त की ताकत का सरूर है
जब चल पड़े हज़ारों कारवाँ मिलकर
बढ़ना है आगे, नही रुकना मंजूर है
गूंज रहे है फ़िज़ा मे विप्लव के गीत
देख लेना अब, कहाँ मंज़िल दूर है l...और पढ़ें
जो पढ़कर महसूस करे उससे रिश्ता खास होगा।
अगर है इश्क में शर्तिया खूबसूरत एहसास होगा।।
स्पर्श कहा जाता हर एक खूबसूरत एहसास को।
गहराई में उतरने वाले को अलग एहसास होगा।।
उम्र जाति धर्म की परिधि से परे मोहब्बत...और पढ़ें
तुम्हारे आने पर
तुम्हारे आने पर ऐसा प्रतीत होता है,
मानो सावन आ गया हो।
तुम्हारी आँखों में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है,
जैसे मैं सावन की पहली बारिश में भीग रहा हूँ।
और तुम्हारे बाल संवारने पर मुझे ऐसा प्रतीत...और पढ़ें
गमों की बारिश में भीगना चाहता हूं इतना खुशनसीब नहीं जो दर्द कह सकूं मिल कर तुमसे कुछ कहना चाहता हूं
है आंधियों का काम उड़ा कर ख्वाब सारे कहीं और पटक देना बुझा के चिराग़ दिल ए दर्द अपना कहना चाहता हूं
सच तो ये है मेरी नाकामियों ने किया ह...और पढ़ें
अहबाब कहते हैं, कुछ कर, वक़्त तंग है,
उन्हें क्या ख़बर, हम ख़ुद से जंग-ए-अज़ीम
लड़ रहे हैं।
-अर्णव...और पढ़ें
नहीं चाहिए बचपन मेरा ’ll
कुछ सोच को, कुछ सपनों को मारा है मैंने
हमें ही पता है बचपन कैसे गुजारा है मैने,
दूध का प्याला ,मीठा निवाला इस सब से अनजान था मैं
कुछ जिम्मेदारियों की मार तो कुछ अपनो से परेशान था मैं
जब दर्द...और पढ़ें
दशहरा केवल वैदेही की मुक्ति की कहानी नहीं,
दशहरा केवल दो मानवों के द्वंद्व की निशानी नहीं।
दशहरा पर्व है झूठ के प्रतिकार का,
दशहरा पर्व है सत्य की जयकार का।
दशहरा पर्व है अधर्म के विनाश का,
दशहरा पर्...और पढ़ें
नजर का क्या है?
अच्छा भी देख लेती है,
और बुरा भी देख लेती है।
कहीं अच्छा देख खुश हो जाती हैं,
और कुछ दृश्य घृणा भर देती हैं।
नजरों में चढ़े तो अपने,
नहीं चढे तो...,
पल भर में पराए कर देती हैं।
-चऔर पढ़ें