कोयला माफिया से सांठगांठ का आरोप: सीबीआई ने दर्ज की FIR; CISF के दो दर्जन से ज्यादा अधिकारी-जवान जांच के घेरे
सीबीआई ने सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र में लोहा चोरी और बीसीसीएल धनबाद में कोयला चोरी के मामलों की जांच तेज कर दी है। बीसीसीएल मामले में सीआईएसएफ के उप कमांडेंट ओम कुमार तनवर और इंस्पेक्टर राज लक्ष्मी वर्मा के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है।
विस्तार
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े लोहा और कोयला चोरी के मामलों में जांच तेज कर दी है। जांच के दायरे में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र में लोहा चोरी और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सहायक कंपनी बीसीसीएल धनबाद में कोयला चोरी का मामला शामिल है। बीसीसीएल में कोयला चोरी के मामले में सीआईएसएफ के उप कमांडेंट ओम कुमार तनवर और इंस्पेक्टर राज लक्ष्मी वर्मा के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जांच में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कथित तौर पर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोपों को भी देखा जा रहा है। इस मामले में सीआईएसएफ के कई वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारी भी जांच एजेंसी की निगरानी में हैं।
प्राथमिकी के बाद जांच में आई तेजी
झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और बोकारो के पूर्व पुलिस अधीक्षक चंदन झा फिलहाल भिलाई इस्पात संयंत्र में सीआईएसएफ के उप महानिरीक्षक के पद पर तैनात हैं। वहीं, बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी और बोकारो इस्पात संयंत्र इकाई के पूर्व पुलिस उपमहानिरीक्षक राजीव मिश्रा बीसीसीएल धनबाद इकाई में सीआईएसएफ के उप महानिरीक्षक हैं। इन अधिकारियों की तैनाती के बीच सीबीआई ने जांच और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। एजेंसी लोहा और कोयला चोरी के कथित अवैध कारोबार से जुड़े लोगों और संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
गोपनीय रिपोर्ट में सामने आए थे गंभीर आरोप
बीसीसीएल धनबाद में कोयला चोरी के मामले में सीबीआई के सक्रिय होने के बाद सीआईएसएफ के कई अधिकारियों और जवानों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। बताया गया है कि सीआईएसएफ के तत्कालीन अपर महानिदेशक कुंदन कृष्णन ने इस संबंध में एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर ठोस साक्ष्यों के साथ मुख्यालय को भेजी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई कथित तौर पर संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए साक्ष्य जुटा रही है। इससे पहले सीआईएसएफ मुख्यालय ने जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए कई संदिग्ध अधिकारियों और जवानों का देश की अलग-अलग इकाइयों में तबादला कर दिया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वे अपने प्रभाव या संपर्कों का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित न कर सकें।
दो दर्जन से ज्यादा अधिकारी-जवान जांच सूची में
मामले में कोयला माफिया के साथ कथित सांठगांठ और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दायरे में सीआईएसएफ के कमांडेंट, उप कमांडेंट, सहायक कमांडेंट, इंस्पेक्टर और जवानों के अलावा तत्कालीन पूर्वी खंड रांची के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक की भूमिका के आरोप भी शामिल हैं। जांच सूची में दो दर्जन से अधिक अधिकारी और जवान बताए जा रहे हैं। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान इन लोगों ने कथित तौर पर कोयला माफिया के साथ मिलकर निजी हित में काम किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
देश की अलग-अलग इकाइयों में तैनाती, फिर भी सीबीआई की नजर
जांच के दायरे में आए कई अधिकारी और जवान फिलहाल सीआईएसएफ की देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित इकाइयों में तैनात हैं। इसके बावजूद सीबीआई उनकी कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई से सीआईएसएफ के संबंधित अधिकारियों और कोयला कारोबार से जुड़े लोगों के बीच हड़कंप की स्थिति है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कोयला चोरी के कथित नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में किस स्तर तक मिलीभगत हुई।