फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   tata-trusts-question-mehli-mistry-locus-standi-noel-tata-trustee-dispute

टाटा ट्रस्ट विवाद: क्या मेहली मिस्त्री को आपत्ति का अधिकार नहीं, किसने कहा- 2025 में ही खत्म हो चुका कार्यकाल?

Thu, 15 Oct 2026 10:40 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 15 Oct 2026 10:40 PM IST
सार

टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े दो धर्मार्थ संस्थानों ने मेहली मिस्त्री की आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनका ट्रस्टी कार्यकाल अक्तूबर 2025 में समाप्त हो गया था। दोनों ट्रस्टों ने चैरिटी कमिश्नर से पहले यह तय करने का आग्रह किया है कि उनकी शिकायतें सुनवाई योग्य हैं या नहीं।

विज्ञापन
tata-trusts-question-mehli-mistry-locus-standi-noel-tata-trustee-dispute
टाटा ट्रस्ट विवाद में नया मोड़ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े दो धर्मार्थ ट्रस्टों ने गुरुवार को मेहली मिस्त्री के उस अधिकार पर सवाल उठाया, जिसके आधार पर वह उनके कामकाज को लेकर आपत्तियां उठा रहे हैं। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन ने चैरिटी कमिश्नर कार्यालय में दाखिल हलफनामों में कहा कि मिस्त्री का ट्रस्टी के रूप में कार्यकाल 28 अक्तूबर 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसे में इसके बाद ट्रस्टों के कामकाज पर सवाल उठाने का उनके पास अधिकार नहीं है।
विज्ञापन


मेहली मिस्त्री दिवंगत रतन टाटा के करीबी माने जाते थे। उन्होंने कथित तौर पर चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत की थी कि दोनों ट्रस्टों में प्रशासनिक खामियां और हितों के टकराव की स्थिति है। उन्होंने ट्रस्टों के फैसले लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।
विज्ञापन


ट्रस्टों ने कार्यकाल का दिया हवाला
दोनों ट्रस्टों ने अलग-अलग हलफनामे दाखिल कर कहा कि मिस्त्री को तीन साल के लिए ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। उनके मुताबिक, पूर्व ट्रस्टी होने के आधार पर मिस्त्री को अब ट्रस्टों के प्रशासन और कामकाज को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। ट्रस्टों ने चैरिटी कमिश्नर कार्यालय से आग्रह किया कि मिस्त्री की आपत्तियों के गुण-दोष पर विचार करने या किसी जांच का आदेश देने से पहले यह तय किया जाए कि उनकी याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और संबंधित कार्यालय को इस पर सुनवाई का अधिकार क्षेत्र प्राप्त है या नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन




एसडीटीटी ने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) और बाई हीराबाई अलग-अलग सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट हैं। इनके संचालन के दस्तावेज, बोर्ड, संपत्तियां और खाते अलग हैं। इसलिए मिस्त्री की ओर से सभी मामलों की एक ही कार्यवाही में सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

ट्रस्ट डीड की शर्तों पर भी विवाद
बाई हीराबाई ट्रस्ट ने अपने हलफनामे में ट्रस्ट डीड की धाराओं 6 और 18 की मिस्त्री की व्याख्या पर आपत्ति जताई। ये धाराएं ट्रस्टी बनने के लिए धर्म और निवास से जुड़ी पात्रता शर्तों से संबंधित हैं। ट्रस्ट ने तर्क दिया कि ये प्रतिबंध मूल वसीयत और उससे जुड़े कोडिसिल के प्रावधानों से टकराते हैं, इसलिए इन्हें प्रभावी नहीं माना जाना चाहिए। मिस्त्री को इन हलफनामों पर जवाब दाखिल करने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया गया है।

नोएल टाटा को रिपोर्टिंग ट्रस्टी बनाने का प्रस्ताव
इस बीच, बाई हीराबाई ट्रस्ट ने मामले में विजय सिंह के इस साल की शुरुआत में ट्रस्टी पद से हटने के बाद उनकी जगह नोएल टाटा को रिपोर्टिंग ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए आवेदन दिया है। यह मामला ट्रस्ट के कामकाज को लेकर मिस्त्री की शिकायतों से संबंधित है। मिस्त्री ने गुरुवार को एक आवेदन दाखिल कर बाई हीराबाई ट्रस्ट से हलफनामा देने को कहा कि नोएल टाटा ट्रस्टी बनने के लिए निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करते हैं।


मिस्त्री ने अपने आवेदन में कहा कि उप चैरिटी कमिश्नर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रस्तावित रिपोर्टिंग ट्रस्टी नोएल टाटा, 7 दिसंबर 1923 की ट्रस्ट डीड की धाराओं 6 और 18 के तहत योग्य हों। उनके मुताबिक, ट्रस्ट डीड में ट्रस्टी के पारसी समुदाय से होने और जोरास्ट्रियन धर्म का पालन करने की शर्त का जिक्र है।

मिस्त्री ने यह भी दावा किया कि बाई हीराबाई के बोर्ड में कुछ ऐसे ट्रस्टी हैं, जो नियुक्ति के लिए निर्धारित शर्तें पूरी नहीं करते। उनके अनुसार, ट्रस्ट डीड में ट्रस्टी के मुंबई या नवसारी का स्थायी निवासी होने और पारसी जोरास्ट्रियन धर्म से संबंधित होने की शर्त रखी गई है। इस बीच, एक अलग सुनवाई में सर रतन टाटा ट्रस्ट ने चैरिटी कमिश्नर को बताया कि 15 मई के आदेश के कारण उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस आदेश के तहत ट्रस्ट को कोई बैठक करने से रोक दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed