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मोरारी बापू बोले: कैप्टन मच्छार ने दिखाई हनुमान चालीसा की महत्ता, रामचरितमानस, तुलसीदास का जिक्र कर क्या कहा?

Sun, 11 Oct 2026 05:58 AM IST
Amit Sharma Amit Sharma
Updated Sun, 11 Oct 2026 05:58 AM IST
सार

फ्लाईदुबई विमान में सवार 170 से अधिक लोगों की जान बचाने में भारत के कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका अहम रही। उनके शौर्य, साहस और पराक्रम की चौतरफा सराहना हो रही है। अध्यात्मिक जगत में भी अब इसकी चर्चा होने लगी है। गुजरात के कथावाचक मोरारी बापू के मुताबिक कैप्टन मच्छार ने हनुमान चालीसा की महत्ता दिखाई है।

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Morari Bapu Captain Machhar Hanuman Chalisa significance kanyakumari to kedarnath 9000 km swastik yatra
मोरारी बापू और कैप्टन स्मित मच्छार - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- ग्राफिक्स

विस्तार

प्रसिद्ध संत मोरारी बापू ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार ने पूरी दुनिया के सामने हनुमान चालीसा की महत्ता साबित कर दी है। यह महत्ता और उपयोगिता हनुमान अंश के जरिये उस परंपरा को आगे बढ़ाने की है जो विश्व का कल्याण करने की भावना रखती है।

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कन्याकुमारी से शुभारंभ, 23 अक्तूबर को केदारनाथ में पूर्णाहुति

शनिवार को लगभग 9,000 किलोमीटर की स्वास्तिक यात्रा शुरू करने के अवसर पर बापू ने कहा कि युवाओं को यह सीखना चाहिए कि उनकी ऊर्जा किस तरह समाज और विश्व के कल्याण के लिए काम करे। कन्याकुमारी से शुरू यह यात्रा 23 अक्तूबर को केदारनाथ में संपन्न होगी।

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क्या स्त्री विरोधी थे गोस्वामी तुलसीदास?

मोरारी बापू ने कहा कि आज देश और दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। इसमें अनेक लोग भारत से ईर्ष्या कर रहे हैं और उसकी विकास की गति को प्रभावित करना चाहते हैं, लेकिन हमें बिना विचलित हुए लगातार आगे बढ़ना है। विवेकानंद केंद्र में समुद्र तट पर हजारों भक्तों के सम्मुख  कथा वाचन करते हुए मोरारी बापू ने कहा कि तुलसीदास को स्त्री विरोधी बताने वालों को श्रीरामचरित मानस का पाठ करना चाहिए जिसमें उन्होंने शिव के पहले शक्ति और राम से पहले सीता की वंदना कर रामचरितमानस की शुरुआत की थी।

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भारत पूरी दुनिया की इर्ष्या का केंद्र क्यों?

मोरारी बापू ने कहा कि लोकभाषा में पहुंचने से ही रामचरितमानस लोकप्रिय हुई। विविधताओं में एकता के अपने सहज गुण के कारण भारत पूरी दुनिया की इर्ष्या का केंद्र बना हुआ है। यह विविधता बनाए रखनी चाहिए। कन्याकुमारी रेलवे-स्टेशन पर यात्रा के उद्घाटन समारोह में मोरारी बापू ने कहा कि 1947 में भारत आजाद हुआ और बहुत हद तक आबाद भी हो रहा है।  इस यात्रा का उद्देश्य है कि भारत आध्यात्मिक ऊर्जा द्वारा ज्यादा से ज्यादा आबाद हो। 

आध्यात्मिक जगत में तीर्थयात्रा का विशेष महत्व

भारत को आध्यात्मिक रूप से एक धागे में पिरोने की यात्रा इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद केंद्र की सचिव राधा ने कहा कि ये यात्रा सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि भारत को आध्यात्मिक रूप से एक धागे में पिरोने की यात्रा है। श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य के प्रतिनिधि के रूप में आए आचार्य आनंद ने कहा कि आध्यात्मिक जगत में तीर्थयात्रा का विशेष महत्व है, लेकिन साधु को चलता फिरता तीर्थ कह कर और अधिक महत्व दिया गया है। यात्रा के मुख्य  संयोजक मदन पालीवाल और रूपेश व्यास ने अतिथि साधु संतों का स्वागत किया। मोरारी बापू और साधु संतों ने हरी झंडी दिखाकर विशेष ट्रेन को रवाना किया।

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