धर्मशाला: दलाई लामा की दीर्घायु के लिए मुख्य तिब्बती मंदिर में हुई विशेष प्रार्थना, पांच हजार लोग रहे माैजूद
समारोह नॉरबुलिंगका संस्थान तिब्बतन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (टीआईपीए) और नेपाल तिब्बतन ल्हामो एसोसिएशन की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। अध्यक्षता लिंग रिनपोछे ने की।
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धर्मशाला स्थित मुख्य तिब्बती मंदिर त्सुगलाखांग में बुधवार को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की दीर्घायु और बेहतर स्वास्थ्य की कामना के लिए विशेष प्रार्थना समारोह किया गया। इसमें करीब पांच हजार लोगों ने भाग लिया। इस दौरान पारंपरिक नृत्य, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दलाई लामा के लंबे जीवन और विश्व शांति की कामना की गई। समारोह नॉरबुलिंगका संस्थान तिब्बतन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (टीआईपीए) और नेपाल तिब्बतन ल्हामो एसोसिएशन की ओर से संयुक्त रूप से किया गया।
अध्यक्षता लिंग रिनपोछे ने की। इस दौरान नामग्याल मठ के मठाधीश गेशे लोबसांग सामतेन और दोर्जे लोबपोन लोबसांग धारग्ये भी मौजूद रहे। अनुष्ठान के दौरान लिंग रिनपोछे ने दलाई लामा को दीर्घायु का प्रतीक पारंपरिक बाण भेंट किया। इसके बाद मंडल, श्वेत तारा की प्रतिमा, धार्मिक ग्रंथ और स्तूप भेंट किए गए। टीआईपीए के कलाकारों ने दलाई लामा की दीर्घायु और उनके 90वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में रचित गीत प्रस्तुत किए। नेपाल तिब्बतन ल्हामो एसोसिएशन ने अपनी स्थापना की 50वीं वर्षगांठ पर विशेष गीत गाया।
तिब्बत के समर्थन में वैश्विक अभियान की मजबूती के उपायों पर मंथन
ऑस्ट्रेलिया तिब्बत काउंसिल (एटीसी) के लिटिल तिब्बत टूअर में एटीसी की कार्यकारी निदेशक डॉ. ज़ो. बेडफोर्ड के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बती संसद-निर्वासन का दौरा किया। इस अवसर पर तिब्बती संसद-निर्वासन की अध्यक्ष डोल्मा त्सेरिंग तेयखांग और उपाध्यक्ष खेनपो सोनम तेनफेल ने संसद के स्थायी समिति सभागार में प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और तिब्बत के समर्थन में वैश्विक अभियान को मजबूत करने के उपायों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक के दौरान अध्यक्ष-उपाध्यक्ष ने तिब्बत के भीतर की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डालते हुए वर्ष 2009 से अब तक आत्मदाह की 157 से अधिक घटनाओं, चीन की समकलनवादी नीतियों, तिब्बती बौद्ध धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप तथा तिब्बती बच्चों को औपनिवेशिक शैली के बोर्डिंग स्कूलों में जबरन भेजे जाने जैसे मुद्दों को उठाया।