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Mandi News: नाचन और सराज को बस अड्डे का इंतजार
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गोहर, चैलचौक और जंजैहली में जमीन की अड़चन से अटकी योजना
कहीं भूमि अनुपयुक्त तो कहीं एफसीए की मंजूरी का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। आजादी के सात दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी नाचन और सराज क्षेत्रों में बस अड्डे का सपना साकार नहीं हो पाया है। गोहर, चैलचौक और जंजैहली में बस अड्डों के निर्माण की योजनाएं जमीन की कमी और वन विभाग की मंजूरी के फेर में उलझी हुई हैं।
वर्षों से उठ रही मांग और घोषणाओं के बावजूद न तो बस अड्डों का निर्माण हो पाया और न ही हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) का डिपो स्थापित हो सका। सराज के प्रमुख पर्यटन स्थल जंजैहली में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। आसपास की पंचायतों के लोगों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद यहां बसों के व्यवस्थित ठहराव और यात्रियों की सुविधा के लिए बस अड्डा तक उपलब्ध नहीं है। निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि का चयन और वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) की मंजूरी योजना के आगे बढ़ने में बड़ी बाधा बनी हुई है। नाचन विधानसभा क्षेत्र के उपमंडल मुख्यालय गोहर और चैलचौक में भी बस अड्डे की मांग वर्षों से अधर में लटकी है। गोहर में निगम की सर्वे टीम चयनित भूमि को निर्माण के लिए अनुपयुक्त करार दे चुकी है। अब दूसरी जगह भूमि की तलाश की जा रही है। वहीं, चैलचौक में चयनित भूमि वन विभाग की औपचारिकताओं में उलझी हुई है। पूर्व की जयराम सरकार ने इन क्षेत्रों में बस अड्डों के निर्माण के लिए 20-20 लाख रुपये देने की घोषणाएं की थीं, लेकिन धरातल पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।
एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक पीयूष शर्मा ने बताया कि गोहर में चयनित भूमि को सर्वे टीम ने निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया है। अब दूसरी जगह भूमि देखी जा रही है। जंजैहली में अभी साइट का चयन किया जाना है, जबकि चैलचौक में चयनित भूमि वन विभाग की औपचारिकताओं के कारण अटकी हुई है। वहीं, वन मंडलाधिकारी मनीष रांगड़ा ने बताया कि निगम की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और संबंधित दस्तावेज मंजूरी के लिए आला अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं।
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कहीं भूमि अनुपयुक्त तो कहीं एफसीए की मंजूरी का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। आजादी के सात दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी नाचन और सराज क्षेत्रों में बस अड्डे का सपना साकार नहीं हो पाया है। गोहर, चैलचौक और जंजैहली में बस अड्डों के निर्माण की योजनाएं जमीन की कमी और वन विभाग की मंजूरी के फेर में उलझी हुई हैं।
वर्षों से उठ रही मांग और घोषणाओं के बावजूद न तो बस अड्डों का निर्माण हो पाया और न ही हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) का डिपो स्थापित हो सका। सराज के प्रमुख पर्यटन स्थल जंजैहली में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। आसपास की पंचायतों के लोगों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद यहां बसों के व्यवस्थित ठहराव और यात्रियों की सुविधा के लिए बस अड्डा तक उपलब्ध नहीं है। निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि का चयन और वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) की मंजूरी योजना के आगे बढ़ने में बड़ी बाधा बनी हुई है। नाचन विधानसभा क्षेत्र के उपमंडल मुख्यालय गोहर और चैलचौक में भी बस अड्डे की मांग वर्षों से अधर में लटकी है। गोहर में निगम की सर्वे टीम चयनित भूमि को निर्माण के लिए अनुपयुक्त करार दे चुकी है। अब दूसरी जगह भूमि की तलाश की जा रही है। वहीं, चैलचौक में चयनित भूमि वन विभाग की औपचारिकताओं में उलझी हुई है। पूर्व की जयराम सरकार ने इन क्षेत्रों में बस अड्डों के निर्माण के लिए 20-20 लाख रुपये देने की घोषणाएं की थीं, लेकिन धरातल पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।
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एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक पीयूष शर्मा ने बताया कि गोहर में चयनित भूमि को सर्वे टीम ने निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया है। अब दूसरी जगह भूमि देखी जा रही है। जंजैहली में अभी साइट का चयन किया जाना है, जबकि चैलचौक में चयनित भूमि वन विभाग की औपचारिकताओं के कारण अटकी हुई है। वहीं, वन मंडलाधिकारी मनीष रांगड़ा ने बताया कि निगम की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और संबंधित दस्तावेज मंजूरी के लिए आला अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं।
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