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Karnal News: बैरिकेडिंग न प्लान, फ्लाईओवर के निर्माण में जोखिम में जान
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निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे खड़े वाहन। अमर उजाला
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर में निर्माणाधीन टी-फ्लाईओवर के नीचे से गुजरना इन दिनों खतरे से खाली नहीं है। करीब 128 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 3.280 किलोमीटर लंबे इस फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। अमर उजाला की पड़ताल में पाया गया कि जहां ऊपर भारी निर्माण कार्य चल रहा है। नीचे वाहन खड़े हैं और लोग बेखौफ आवाजाही कर रहे हैं।
इतने बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आए। कई जगह बैरिकेडिंग अधूरी है या बिल्कुल नहीं की गई। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि जहां ऊपर शटरिंग और कंक्रीट का काम चल रहा है, वहीं नीचे वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यह हालात तब हैं, जब अब तक शटरिंग गिरने के चार मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें वाहनों को नुकसान भी हुआ है। फिर भी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
अधिकारियों का तर्क कि बैरिकेडिंग करने पर बाजार के दुकानदार विरोध करते हैं, जिससे काम प्रभावित होता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह तर्क सुरक्षा से समझौता करने का आधार नहीं बन सकता। भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र में अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है, लेकिन यहां हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।
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दूसरी ओर पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जहां निर्माण स्थल के नीचे वाहन खड़े होने से खतरा बना हुआ है, वहीं पुलिस मुख्य रूप से चालान काटने तक सीमित नजर आ रही है।
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करनाल। शहर में निर्माणाधीन टी-फ्लाईओवर के नीचे से गुजरना इन दिनों खतरे से खाली नहीं है। करीब 128 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 3.280 किलोमीटर लंबे इस फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। अमर उजाला की पड़ताल में पाया गया कि जहां ऊपर भारी निर्माण कार्य चल रहा है। नीचे वाहन खड़े हैं और लोग बेखौफ आवाजाही कर रहे हैं।
इतने बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आए। कई जगह बैरिकेडिंग अधूरी है या बिल्कुल नहीं की गई। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि जहां ऊपर शटरिंग और कंक्रीट का काम चल रहा है, वहीं नीचे वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यह हालात तब हैं, जब अब तक शटरिंग गिरने के चार मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें वाहनों को नुकसान भी हुआ है। फिर भी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
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अधिकारियों का तर्क कि बैरिकेडिंग करने पर बाजार के दुकानदार विरोध करते हैं, जिससे काम प्रभावित होता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह तर्क सुरक्षा से समझौता करने का आधार नहीं बन सकता। भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र में अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है, लेकिन यहां हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।
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दूसरी ओर पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जहां निर्माण स्थल के नीचे वाहन खड़े होने से खतरा बना हुआ है, वहीं पुलिस मुख्य रूप से चालान काटने तक सीमित नजर आ रही है।