आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: विकीर्ण और रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता- दुःख की अँधियरिया रात

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विकीर्ण, जिसका अर्थ है- चारों ओर बिखरा हुआ, प्रसिद्ध। प्रस्तुत है रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता- दुःख की अँधियरिया रात
                                                                 
                            

दुःख की अँधियरिया रात
आई है बार-बार
मेरे इस द्वार पर,
एक मात्र देखा था अस्त्र उसका
कष्ट का विकृत भान, त्रास की विकट भंगिमा
छलना भूमिका अन्धकार में।

भय का नकली चेहरा देख विश्वास किया जितनी बार
उतनी ही बार हुआ पराजय व्यर्थ का।
यह हार जीत का खेल, जीवन की झूठी माया यह
शिशु काल से विजड़ित है पद-पद में विभीषिका,
दुःखमय परिहास पूर्ण।
भय का विचित्र है चलचित्र-
मृत्यु का निपुण शिल्प है विकीर्ण अन्धकार में।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o  


3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर