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हरियाणा में घोटाला: कागजों में निजी बनाकर बेची 1856 कनाल शामलात जमीन, 7 राजस्व अधिकारियों समेत 112 चार्जशीट

Fri, 04 Sep 2026 11:41 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 04 Sep 2026 11:41 AM IST
सार

जमीन की कथित खरीद-फरोख्त दो चरणों में हुई। पहले चरण में 10 जुलाई 2006 से 29 सितंबर 2006 के बीच 81 दिनों में छह रजिस्ट्रियां कराई गईं। इसके बाद दूसरे चरण में 8 जून 2007 से 27 जुलाई 2007 के बीच 49 दिनों में पांच रजिस्ट्रियां हुईं।

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Haryana 1856 kanals of Shamlat land sold 112 individuals including 7 revenue officials charge-sheeted
land scam - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज 1,856 कनाल 13 मरला शामलात जमीन को कागजों में निजी बनाकर बेचने का बड़ा खेल सामने आया है। होडल तहसील के फास्टकूनगर गांव में 11 वसिकाओं (रजिस्ट्री) के जरिये शामलात जमीन निजी विक्रेताओं से खरीदारों के नाम चढ़ा दी गई। 

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जांच में इस खेल में तहसीलदार से लेकर रजिस्ट्री क्लर्क, पटवारी और गिरदावर तक राजस्व विभाग के सात तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत सामने आई है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अब इन सात अधिकारियों समेत 112 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की है। इनमें 105 ग्रामीण, जमीन के विक्रेता और खरीदार शामिल हैं।
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एसीबी की जांच के अनुसार, जमीन की कथित खरीद-फरोख्त दो चरणों में हुई। पहले चरण में 10 जुलाई 2006 से 29 सितंबर 2006 के बीच 81 दिनों में छह रजिस्ट्रियां कराई गईं। इसके बाद दूसरे चरण में 8 जून 2007 से 27 जुलाई 2007 के बीच 49 दिनों में पांच रजिस्ट्रियां हुईं।
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इस तरह 11 रजिस्ट्रियों के जरिये शामलात जमीन के लेन-देन को अंजाम दिया गया। जांच के मुताबिक, ग्रामीणों को जमीन के विक्रेता और अन्य लोगों को खरीदार दिखाया गया। इन वसिकाओं के पंजीकरण के बाद राजस्व रिकॉर्ड में इंतकाल दर्ज किए गए। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिये शामलात जमीन का स्वामित्व निजी पक्षों के नाम पहुंचा दिया गया। जांच में इससे सरकार को राजस्व नुकसान होने की बात भी सामने आई है।

तहसीलदार से पटवारी तक सात अधिकारी आरोपी
चार्जशीट में तत्कालीन तहसीलदार होडल नरेश जोवल, मनबीर सिंह और ओम प्रकाश गोदारा, तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क भगवान सिंह और भूप सिंह, तत्कालीन पटवारी ताराचंद और तत्कालीन गिरदावर वीरेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों और पद का दुरुपयोग करने का आरोप है।

तहसीलदार स्तर पर पंजीकरण प्रक्रिया की निगरानी, रजिस्ट्री क्लर्क स्तर पर सेल डीड के पंजीकरण तथा पटवारी और गिरदावर स्तर पर राजस्व रिकॉर्ड में इंतकाल दर्ज करने की प्रक्रिया में इनकी भूमिका बताई गई है।

हाईकोर्ट के आदेश से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत पलवल जिले में शामलात जमीन की कथित अनियमित बिक्री से जुड़े वर्ष 2010 और 2011 के मामलों से हुई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं में पलवल के अतवा गांव की शामलात जमीन की क्रिस्टल बायोटेक कंपनी द्वारा कथित खरीद का मामला सामने आया था। इसकी जांच के आधार पर 14 मई 2012 को गुरुग्राम में एसीबी थाने में केस दर्ज किया गया था।

बाद में हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि क्रिस्टल बायोटेक के अलावा अन्य लोगों से जुड़ी शामलात जमीन की वसिकाओं में गड़बड़ी मिले तो उनकी भी जांच की जाए। इसी आदेश के तहत 8 जून 2012 को पलवल में जांच शुरू हुई। जांच के दौरान फास्टकूनगर गांव की शामलात जमीन से जुड़े 11 लेन-देन सामने आए। आगे की जांच में अधिकारियों की कथित मिलीभगत और पद के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद 10 नवंबर 2022 को फरीदाबाद के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो थाने में मामला दर्ज किया गया।


इन धाराओं में पेश किया चालान
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी, 409, 467, 468 और 471, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) तथा पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1961 की धारा 13-ए के तहत चालान पेश किया गया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, सरकारी कर्मचारी द्वारा पद का दुरुपयोग, दस्तावेज की जालसाजी और जाली दस्तावेज के इस्तेमाल जैसे आरोप शामिल हैं। चार्जशीट पलवल की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रतीक जैन की अदालत में पेश की गई है।

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