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नोएडा मजदूर आंदोलन: हाईकोर्ट से आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द, पुलिस ने रखे सबूत; बचाव पक्ष ने दी ये दलील

Thu, 03 Sep 2026 01:58 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 03 Sep 2026 01:58 PM IST
सार

नोएडा में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई की। जहां एनएसए के तहत आकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर दी है। 13 अप्रैल को वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर करीब 42 हजार श्रमिक सड़कों पर उतरे थे। 

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Allahabad High Court quashes Aakriti Chaudhary NSA detention and find out what  police told
आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर में अप्रैल में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत आकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर दी है।

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मई में उन पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने आकृति को मजदूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य बताते हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी में उनकी भूमिका होने का आरोप लगाया था।

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सड़क पर उतरे थे 42 हजार श्रमिक
वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर 13 अप्रैल में नोएडा में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया था। दर्शन के दौरान 300 से अधिक कंपनियों के शीशे तोड़ने और दो दर्जन से अधिक वाहनों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस के अनुसार, करीब 42 हजार मजदूर सड़कों पर उतरे थे। हिंसक घटनाओं के बाद कमिश्नरेट के अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए और मामले की जांच शुरू हुई।

11 अप्रैल का हुई थी गिरफ्तारी, लगे थे आरोप
नोएडा पुलिस ने 11 अप्रैल को आकृति को बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद मई में उन पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने आकृति को मजदूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य बताते हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी में उनकी भूमिका होने का आरोप लगाया था। पुलिस का आरोप था कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को उकसाकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया। 

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जांच के दौरान पुलिस ने उनकी गतिविधियों को भड़काऊ बताते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने भीड़ को उग्र करने और लोक व्यवस्था प्रभावित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं, आकृति के अधिवक्ता रजनीश यादव का कहना है कि एनएसए लगाने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं थे। उनका आरोप है कि सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ अतिरिक्त धाराओं का इस्तेमाल किया गया। 

नहीं मिला आदेश
गौतमबुद्धनगर के अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान है। अभी आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। आदेश मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

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