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Delhi NCR News: चेक बाउंस मामले में कारोबारी की अपील खारिज
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-5.50 लाख रुपये के दो चेक के मामले में बकाया रकम का हिसाब नहीं दे सका शिकायतकर्ता, कोर्ट ने दावे पर जताया संदेह
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में कारोबारी की अपील खारिज की है। अदालत ने आरोपी नागेश शंकर सिंह को बरी करने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। यह मामला 5.50 लाख रुपये के दो चेक से जुड़ा था। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता बकाया रकम का सही हिसाब नहीं बता सका।
दिल्ली के पुराने मुस्तफाबाद निवासी मोहम्मद कमर पैराडाइज इंटीरियर के मालिक हैं। उन्होंने दावा किया था कि नागेश शंकर सिंह ने उन्हें तीन प्रोजेक्ट दिए थे। ये प्रोजेक्ट दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में थे। काम के बदले नागेश ने 2.50 लाख और तीन लाख रुपये के दो चेक दिए। शिकायतकर्ता के अनुसार, एक चेक खाते में पर्याप्त रकम न होने से बाउंस हुआ। दूसरा चेक भुगतान रोकने के निर्देश के कारण बाउंस हो गया था। मोहम्मद कमर ने भुगतान न मिलने पर अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।
बयानों में अंतर
अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कई विसंगतियां पाईं। शिकायतकर्ता ने कुल बिल की रकम एक बार 19 लाख रुपये बताई थी। बाद में यह रकम 17.50 लाख रुपये बताई गई। इसी तरह, मिली रकम भी एक बार पांच लाख रुपये और फिर 6.50 लाख रुपये बताई गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने कहा कि बयानों में अंतर था। बकाया रकम साबित करने वाले बिल भी पेश नहीं किए गए। इससे शिकायतकर्ता के दावे पर संदेह पैदा हुआ।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में कारोबारी की अपील खारिज की है। अदालत ने आरोपी नागेश शंकर सिंह को बरी करने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। यह मामला 5.50 लाख रुपये के दो चेक से जुड़ा था। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता बकाया रकम का सही हिसाब नहीं बता सका।
दिल्ली के पुराने मुस्तफाबाद निवासी मोहम्मद कमर पैराडाइज इंटीरियर के मालिक हैं। उन्होंने दावा किया था कि नागेश शंकर सिंह ने उन्हें तीन प्रोजेक्ट दिए थे। ये प्रोजेक्ट दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में थे। काम के बदले नागेश ने 2.50 लाख और तीन लाख रुपये के दो चेक दिए। शिकायतकर्ता के अनुसार, एक चेक खाते में पर्याप्त रकम न होने से बाउंस हुआ। दूसरा चेक भुगतान रोकने के निर्देश के कारण बाउंस हो गया था। मोहम्मद कमर ने भुगतान न मिलने पर अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।
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बयानों में अंतर
अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कई विसंगतियां पाईं। शिकायतकर्ता ने कुल बिल की रकम एक बार 19 लाख रुपये बताई थी। बाद में यह रकम 17.50 लाख रुपये बताई गई। इसी तरह, मिली रकम भी एक बार पांच लाख रुपये और फिर 6.50 लाख रुपये बताई गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने कहा कि बयानों में अंतर था। बकाया रकम साबित करने वाले बिल भी पेश नहीं किए गए। इससे शिकायतकर्ता के दावे पर संदेह पैदा हुआ।
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