ऑक्सफोर्ड में सराहा गया उत्तराखंड का आनंदम मॉडल: बीपी मैंदोली ने बताई खासियत, संस्कृत मंत्रों से हुई शुरुआत
आनंदम पाठ्यचर्या का उद्देश्य विद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित करना है जहां बच्चे सहानुभूति विकसित करें, अपनी भावनाओं को पहचानना सीखें। इस मॉडल की ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में खूब तारीफ हुई।
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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित सामाजिक परिणाम सम्मेलन में उत्तराखंड की आनंदम पाठ्यचर्या की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची। शिक्षा विभाग समग्र शिक्षा के स्टाफ ऑफिसर भगवती प्रसाद मैंदोली ने राज्य के शिक्षा परिवर्तन मॉडल को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया। सत्र की शुरुआत संस्कृत मंगलाचरण और ध्यान अभ्यास से हुई।
मैंदोली ने कहा, ऑक्सफोर्ड के अंतरराष्ट्रीय मंच पर संस्कृत मंत्र और ध्यान ने शिक्षा में मानसिक शांति और बच्चों के समग्र विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन केवल नीतियां बनाने या योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू करने तक सीमित नहीं है। वास्तविक परिवर्तन तब होता है, जब नीतियां विद्यालयों और कक्षाओं तक पहुंचती हैं और शिक्षक उन्हें बच्चों के जीवन में सार्थक बदलाव में परिवर्तित करते हैं।
शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक प्रदर्शन बेहतर करना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान के साथ आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और कल्याण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सामाजिक और भावनात्मक अधिगम को बच्चों के समग्र विकास का अहम हिस्सा बताया। मैंदोली ने आनंदम की सफलता का श्रेय राज्य सरकार के सहयोग और समर्पित शिक्षकों को दिया।
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आनंदम पाठ्यचर्या का स्वरूप
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2019 में आनंदम पाठ्यचर्या शुरू की थी। इसका उद्देश्य विद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित करना है, जहां बच्चे स्वयं को और दूसरों को समझें। वे सहानुभूति विकसित करें, अपनी भावनाओं को पहचानना सीखें। इसके तहत विद्यालयों में प्रतिदिन 30-35 मिनट सामाजिक-भावनात्मक विकास के लिए निर्धारित किए जाते हैं। इसमें सचेतनता, कहानी, संवादात्मक गतिविधि और अभिव्यक्ति शामिल हैं।
व्यापक पहुंच और सकारात्मक प्रभाव
वर्तमान में आनंदम पाठ्यचर्या लगभग 16,000 विद्यालयों तक पहुंच चुकी है। इससे 30,000 शिक्षक और करीब दो लाख विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। शोध अध्ययनों से बच्चों की एकाग्रता, सहानुभूति और संबंध निर्माण में सकारात्मक बदलाव दिखे हैं। शिक्षकों के कक्षा प्रबंधन में भी सुधार आया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड की इस पहल में विशेष रुचि दिखाई और इसकी सराहना की।