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जीएसटी परिषद: क्या व्यापारियों व एमएसएमई की समस्याओं को समझकर किए गए सुधार? जानिए इंडस्ट्री की क्या है राय

Sat, 10 Oct 2026 04:19 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Sat, 10 Oct 2026 04:19 PM IST
सार

जीएसटी परिषद ने व्यापारियों और एमएसएमई के लिए बड़े सुधारों को मंजूरी दी है, जिनमें अभियोजन की सीमा बढ़ाना, सामान्य जुर्माने की राशि कम करना और गिरफ्तारी शक्तियों पर अंकुश लगाना शामिल है। ये बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे, जिससे कारोबार में सुगमता आएगी और कर अनुपालन का माहौल अधिक विश्वासपूर्ण बनेगा।

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The GST Council has made reforms after understanding the practical problems of traders and MSMEs: Industry
निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com

विस्तार

जीएसटी परिषद ने गुरुवार (8 अक्तूबर) को जीएसटी में कई बड़े बदलावों को मंजूरी दी, जिनमें अभियोजन की सीमा बढ़ाना, सामान्य जुर्माने की राशि कम करना और कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्तियों पर अंकुश लगाना शामिल है। इस फैसले से सबसे बड़ी राहत छोटे व्यापारियों को मिलेगी, उनका कहना है, इससे कारोबार करने में आसानी होगी निर्णय छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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जीएसटी परिषद ने जीएसटी में कई बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। इनमें अभियोजन की सीमा बढ़ाना, सामान्य जुर्माने की राशि कम करना और कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्तियों पर अंकुश लगाना शामिल है। ये सभी सुधार, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले हैं, व्यवसायों पर अनुपालन के बोझ को कम करने के उद्देश्य से लाए गए हैं। ये सुधार पिछले वर्ष पेश किए गए व्यापक जीएसटी सुधारों के बाद आए हैं, जिनमें दरों में काफी कटौती की गई थी और कर श्रेणियों को युक्तिसंगत बनाया गया था। इस फैसले से सबसे बड़ी राहत छोटे व्यापारियों को मिलेगी, उनका कहना है, इससे कारोबार करने में आसानी होगी  निर्णय छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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जीएसटी परिषद् की बैठक से बाजार के माहौल पर क्या असर?

भारत मर्चेंट चैंबर के अध्यक्ष मनोज जालान कहते हैं, देश के लाखों छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के “ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस” और “व्यापार में सुगमता” के विजन को इन निर्णयों से नई गति मिलेगी। उनका कहना है, जीएसटी गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाना, अभियोजन की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करना तथा सामान्य दंड को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करना छोटे व्यापारियों में लंबे समय से चली आ रही आशंकाओं को दूर करेगा। इससे कर अनुपालन का माहौल अधिक विश्वासपूर्ण बनेगा और ईमानदार व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी दबाव से राहत मिलेगी।

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क्या ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के मिलेगा बढ़ावा?

फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र (एफएएम) के अध्यक्ष जितेंद्र शाह ने कहा, जीएसटी परिषद ने व्यापारियों एवं एमएसएमई की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए जो सुधार किए हैं, उसके लिए पूरा व्यापार जगत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी निर्णयों का हार्दिक स्वागत करता है। इसके तहत जो खरीदार इनवाइस रखता है, माल प्राप्त करता है, बैंकिंग चैनल से भुगतान करता है और अपने स्तर पर सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करता है, उसे सप्लायर की गलती के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए, यह व्यापार जगत की एक अंत्यन महत्वपूर्ण मांग रही है। हमें खुशी है कि जीएसटी परिषद ने इस विषय को गंभीरता से लिया है।  उन्होंने कहा, इन निर्णयों से स्पष्ट है कि सरकार अब जीएसटी व्यवस्था को केवल राजस्व संग्रह का माध्यम न मानकर ईज ऑफ डूईंग बिजनेस तकनीक, पारदर्शिता और करदाताओं के साथ विश्वास पर आधारित व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

क्या छोटे व्यापारियों की बाजार में पहुंच बढ़ेगी?

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री और अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर कहते हैं, छोटे विक्रेताओं को विभिन्न राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापार करने की सुविधा मिलना लाखों छोटे दुकानदारों, घरेलू उद्योगों, कारीगरों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण उद्यमों के लिए नए अवसर खोलेगा। अब छोटे व्यापारी बिना अतिरिक्त जटिलताओं के देशभर के ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना सकेंगे, जिससे उनकी आय और बाजार दोनों का विस्तार होगा।  उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत पात्र रिफंड दावों का मात्र तीन कार्य दिवसों में स्वतः निपटान तथा रिफंड आवेदन की स्वीकृति अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन करना छोटे और मध्यम व्यापारियों की कार्यशील पूंजी की समस्या को काफी हद तक कम करेगा। लंबे समय तक धन फंसे रहने की समस्या घटने से व्यापारियों की नकदी स्थिति मजबूत होगी।

जीएसटी विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ सीए मनीष गाडिया ने बताया कि जीएसटी परिषद द्वारा लिया गया फैसला उद्योग और कारोबारियों को काफी फायदा होगा। गैर-अनुपालन के लिए गिरफ्तारी के अधिकार समाप्त कर दिए जाएंगे और सत्यापन का तरीका विवेकाधीन अधिकारी-नेतृत्व वाली जांच से हटकर प्रणाली-संचालित जोखिम नियमों पर आधारित होगा। साथ ही अब न्यूनतम सजा का प्रावधान हटा दिया गया है, अदालतों के पास जुर्माना, कारावास या दोनों लगाने का निर्णय लेने का विवेकाधिकार होगा। इसके अतिरिक्त सामान्य दंड में कमी की गई है,  जहां कोई विशिष्ट दंड निर्धारित नहीं है, वहां लागू होने वाला अधिकतम सामान्य दंड  25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया जाएगा। 



अभियोग की सीमा बढ़ाई गई है, आपराधिक अभियोग के लिए न्यूनतम राशि पांच गुना बढ़कर 1 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये हो जाएगी। लंबित मुकदमों में भी राहत दी जाएगी, जिसमें धारा 73, 74 और 74ए के तहत कारण बताओ नोटिसों पर 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा लागू होगी, जिसमें लंबित मामले भी शामिल हैं। वास्तविक खरीदारों के लिए आईटीसी संरक्षण, पात्र खरीदारों को केवल इसलिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) खोने से बचाया जाएगा सकेगा। मनीष कहते हैं, इन फैसलों को लागू करने में अभी समय लगेगा।

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