फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   NPCI Clarifies: No MDR Burden on 96% of UPI Transactions for Small Merchants

यूपीआई पर एमडीआर कोई बोझ नहीं: एनपीसीआई ने कहा-96 फीसदी लेनदेन मुफ्त, जानिए फिर कौन उठाएगा भार?

Tue, 22 Sep 2026 04:12 PM IST
कुमार विवेक आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 22 Sep 2026 04:12 PM IST
सार

एनपीसीआई ने यूपीआई पर एमडीआर और जीएसटी के बोझ संबंधी दावों को खारिज किया। 96 प्रतिशत से अधिक यूपीआई लेनदेन और 1 लाख रुपये तक मासिक प्राप्तियां वाले छोटे व्यापारियों को एमडीआर से छूट मिलेगी। जानें नई एमडीआर व्यवस्था और इसके प्रभाव।

विज्ञापन
NPCI Clarifies: No MDR Burden on 96% of UPI Transactions for Small Merchants
यूपीआई - फोटो : amarujala.com

विस्तार

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने मंगलवार को मीडिया रिपोर्टों में किए गए दावों को खारिज किया। इन रिपोर्टों में कहा गया था कि यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) और जीएसटी छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालेंगे। एनपीसीआई ने स्पष्ट किया कि ये दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

विज्ञापन


संस्था ने स्पष्ट किया कि एमडीआर केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर लागू होगा। 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर पहले की तरह शून्य एमडीआर रहेगा। इस कारण इन छोटे लेनदेन पर जीएसटी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपये तक के लेनदेन यूपीआई व्यापारी लेनदेन की कुल मात्रा का 96 प्रतिशत से अधिक हैं। इसका सीधा अर्थ है कि अधिकांश यूपीआई भुगतान एमडीआर और उससे जुड़े किसी भी जीएसटी दायित्व से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। 
विज्ञापन


एनपीसीआई ने यह भी बताया कि जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां 1 लाख रुपये तक हैं, उन्हें एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा। इसलिए ऐसे छोटे व्यापारियों के लिए एमडीआर पर जीएसटी लगने का प्रश्न ही नहीं उठता। संस्था के अनुसार, छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंकाएं तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। अधिकांश लेनदेन और छोटे कारोबारी इस नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या एमडीआर और जीएसटी व्यापारियों पर बोझ डालेंगे?

एनपीसीआई ने स्पष्ट किया कि एमडीआर केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर ही लागू होगा। 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई व्यापारी लेनदेन पहले की तरह शून्य एमडीआर के साथ जारी रहेंगे। इस पर कोई जीएसटी भी नहीं लगेगा, जिससे छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2,000 रुपये तक के लेनदेन यूपीआई व्यापारी लेनदेन की कुल मात्रा का 96 प्रतिशत से अधिक हैं। इसलिए, अधिकांश यूपीआई भुगतान एमडीआर और किसी भी संबंधित जीएसटी दायित्व से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। इसके अतिरिक्त, एनपीसीआई ने यह भी बताया कि जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां 1 लाख रुपये तक हैं, उन्हें एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा। ऐसे में, इन छोटे व्यापारियों के लिए एमडीआर पर जीएसटी लगने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता, जिससे उन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

एमडीआर क्या है और इसका भुगतान कौन करता है?

वित्त मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि एमडीआर कोई कर नहीं है। यह सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क भी नहीं है। यह राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच वितरित की जाती है। इनमें बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई एप प्रदाता शामिल हैं। इस शुल्क का मुख्य उद्देश्य यूपीआई तंत्र का संचालन और विस्तार जारी रखना है। यदि किसी व्यापारी द्वारा एमडीआर पर जीएसटी का भुगतान किया जाता है, तो इसे अन्य इनपुट कर की तरह उसकी जीएसटी देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है। इसलिए जीएसटी की यह राशि अंततः व्यापारी पर अतिरिक्त लागत के रूप में नहीं पड़ती, बल्कि समायोजित हो जाती है।

नई एमडीआर व्यवस्था कैसे काम करेगी?

नई व्यवस्था के तहत, 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन तय की गई है। यह सीमा बड़े लेनदेन पर लगने वाले शुल्क को नियंत्रित करेगी। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक क्षेत्रों में विशेष प्रावधान हैं। इन कम लाभ अंतर वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर केवल 5 रुपये प्रति लेनदेन का निश्चित एमडीआर लागू होगा। इसका उद्देश्य इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए लागत को अनुमानित और सीमित रखना है। एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे लेनदेन की राशि कितनी भी हो।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed