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एमपीसी: महंगाई के चलते आरबीआई ने बढ़ाई रेपो दर, चार साल बाद हुए बदलाव के पीछे क्या वजहें?

Wed, 21 Oct 2026 08:39 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 21 Oct 2026 08:39 PM IST
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Higher inflation, price pressure spillover led to RBI hiking rate: MPC
आरबीआई - फोटो : एआई ग्राफिक्स
महंगाई का दायरा बढ़ने और कई वस्तुओं की कीमतों पर दबाव तेज होने के संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का सर्वसम्मति से समर्थन किया था। बुधवार को जारी बैठक के ब्योरे से यह जानकारी सामने आई है।
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तीन दिन तक चली बैठक में समिति ने करीब चार साल बाद पहली बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो में इजाफा करने का निर्णय लिया था। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में कहा कि मौद्रिक नीति के रुख को बदलते हुए धीरे-धीरे सख्ती की दिशा में आगे बढ़ना मौजूदा परिस्थितियों में उचित है।
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मल्होत्रा के मुताबिक, इस फैसले का स्पष्ट संकेत है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। आने वाले समय में आर्थिक परिस्थितियों और परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है या उन्हें मौजूदा स्तर पर बनाए रखा जा सकता है।
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आरबीआई ने सात अक्टूबर को संपन्न हुई तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के बाद रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया था। गवर्नर समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने इस वृद्धि के पक्ष में मतदान किया था।

अगस्त में 37 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर चार फीसदी से अधिक
बैठक के विवरण के अनुसार, गवर्नर मल्होत्रा ने महंगाई के बढ़ते दायरे पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में शामिल 37 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर अगस्त में चार प्रतिशत से ऊपर थी। इसके मुकाबले मार्च में ऐसी वस्तुओं का अनुपात महज 20 प्रतिशत था।

उन्होंने कहा कि आगे ब्याज दरों में कितनी वृद्धि होगी और सख्त मौद्रिक नीति कितने समय तक जारी रहेगी, इसका फैसला महंगाई और आर्थिक वृद्धि की वास्तविक स्थिति के साथ-साथ उनके भविष्य के अनुमान के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया में अंतर्निहित महंगाई, कीमतों के दबाव का विभिन्न वस्तुओं तक फैलना, आपूर्ति संबंधी झटकों के दूसरे दौर के प्रभाव और मांग में होने वाले बदलाव अहम भूमिका निभाएंगे।
 
बाहरी आपूर्ति झटकों से बढ़ रही महंगाई: पूनम गुप्ता
एमपीसी की सदस्य और आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि मौजूदा महंगाई के पीछे मुख्य रूप से बाहरी आपूर्ति संबंधी झटके हैं। उन्होंने कहा कि अभी ऐसे बहुत कम संकेत हैं, जिनसे यह लगे कि महंगाई लंबे समय तक बनी रहेगी या इससे महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदों पर असर पड़ेगा।

गुप्ता ने कहा कि महामारी के बाद महंगाई को निर्धारित दायरे में रखने वाली व्यवस्था के तहत जब भी महंगाई दर संतोषजनक सीमा के निचले या ऊपरी स्तर पर पहुंची अथवा उससे आगे निकली, आरबीआई  ने उसके अनुरूप नीतिगत कदम उठाए। मौद्रिक नीति की जिम्मेदारी संभालने वाली गुप्ता के अनुसार, इन कदमों से नीतिगत ढांचे की विश्वसनीयता कायम रही और महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदें निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बनी रहीं।


उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और आर्थिक वृद्धि की मजबूती को देखते हुए रेपो दर में बढ़ोतरी के लिए और इंतजार करना उचित नहीं था। इसी आधार पर उन्होंने बैठक में रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाने का समर्थन किया।
 
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