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क्यों चांद पर परमाणु बम फोड़ना चाहता था अमेरिका और क्या था सीक्रेट प्रोजेक्ट A119?
Sun, 13 Sep 2026 05:11 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Sun, 13 Sep 2026 05:11 PM IST
सार
अमेरिका ने चांद पर परमाणु बम फोड़ने की योजना बनाई थी। अमेरिका के शोधकर्ताओं ने इस प्रोजेक्ट को A Study of Lunar Research Flights नाम दिया था, जबकि इसका सीक्रेट नाम प्रोजेक्ट A119 था।
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क्यों चांद पर परमाणु बम फोड़ना चाहता था अमेरिका और क्या था सीक्रेट प्रोजेक्ट A119?
- फोटो : AI
विस्तार
क्या आप जानते हैं कि अमेरिका कभी चांद पर परमाणु बम फोड़ना चाहता था? यह बात छह दशक पहले की है। अमेरिकी एयरफोर्स ने यह योजना तैयार की थी। वर्ष 1958 में अमेरिका एयरफोर्स के शोधकर्ताओ के एक छोटे से समूह ने एक खुफिया प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका मकसद चांद पर परमाणु बम फोड़ना था। शोधकर्ताओं ने इस प्रोजेक्ट को A Study of Lunar Research Flights नाम दिया था, तो वहीं इसका सीक्रेट नाम प्रोजेक्ट A119 था।
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स्पुतनिक लॉन्च के बाद हुई बेइज्जती से ध्यान भटकाना था मकसद
एक रिपोर्ट के मुताबिक, दरअसल, स्पुतनिक दुनिया का पहला मानव निर्मित उपग्रह था, जिसे सोवियत यूनियन ने 4 अक्टूबर 1957 को अंतरिक्ष में लॉन्च किया था। इस खुफिया प्रोजक्ट का मकसद अमेरिका की हुई बेइज्जती से ध्यान हटाना था। प्रोजेक्ट के मुखिया लियोनार्ड राइफेल ने बाद में जानकारी दी कि यूएस एयर फोर्स अमेरिका की क्षमता को दिखाना चाहती थी, जिससे तहत चांद पर धमाका करना था। इस एक विशाल चमक पैदा होती और मलबे का एक फैलते हुए बादल का निर्माण हो सकता था।
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क्या चांद पर फोड़ा गया परमाणु बम?
आर्मर रिसर्च फाउंडेशन में राइफेल ने इस काम का नेतृत्व किया, जो इस समय इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का हिस्सा है। राइफेल ने इस प्रोजेक्ट के बारे में बताया था कि यह विशेषज्ञ रिपोर्ट और व्यावहार्यता की गणना के स्तर तक तो आगे बढ़ा, लेकिन कभी ऑपरेशनल योजना के चरण तक नहीं पहुंच पाया। न ही कोई वॉरहेड लाॅन्च किया गया और न ही चंद्रमा पर कोई परमाणु उपकरण फोड़ा गया।
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चंद्रमा पर नहीं है पृथ्वी की तरह वायुमंडल
इस प्रोजेक्ट का मकसद चांद मशरूम की बादल का निर्माण करना नहीं था, क्योंकि यह वायुमंडल पर निर्भर करता है। चंद्रमा पर पृथ्वी की तरह वायुमंडल नहीं है। ऐसे में विस्फोट के बाद पर उठने वाला जाना पहचान नजारा नहीं होता। राइफेल ने साल 2000 में एक बातचीत के दौरान इस योजना के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि चांद के किनारे और रात वाले इलाके में धमाका करने की योजना थी। उन्होंने इसकी वजह पीआर और दूसरों से आगे निकलने की होड़ बताया था। उस दौरान अमेरिका अंतरिक्ष के क्षेत्र में सोवियत संघ से पीछे छूटता नजर आ रहा था।