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Hindi News ›   Automobiles News ›   Low Mileage Lawsuit: Consumer Forum Orders Rs 75000 Compensation Over Promised vs Real Mileage Gap

माइलेज के झूठे वादे पर कोर्ट का बड़ा फैसला: 18.5 का दावा लेकिन मिली 8-10 Kmph की माइलेज, कंपनी भरेगी जुर्माना

Wed, 16 Sep 2026 12:19 AM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Wed, 16 Sep 2026 12:19 AM IST
सार

2015 में खरीदी गई एक कार के मामले में केरल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ऑटोमोबाइल कंपनी को 75,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

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Low Mileage Lawsuit: Consumer Forum Orders Rs 75000 Compensation Over Promised vs Real Mileage Gap
Consumer Commission Verdict on Car Mileage - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केरला राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक कार निर्माता कंपनी को खरीदार को 75,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला 2015 में कार की बिक्री के दौरान किए गए माइलेज के वादे को पूरा न कर पाने के कारण सुनाया गया है। 
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बिक्री के समय ग्राहक को 18.5 किमी प्रति लीटर माइलेज देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन असल में कार महज 8 से 10 किमी प्रति लीटर का माइलेज ही दे रही थी। आयोग ने 11 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में माना कि बार-बार सुधार की कोशिशों के बावजूद वादे के मुताबिक माइलेज न मिलना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है।
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यह पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ था और ग्राहक की क्या शिकायत थी?

यह मामला 23 जनवरी 2015 को शुरू हुआ जब शिकायतकर्ता ने डीलर से नई कार खरीदी थी।
  • कंपनी का दावा: डीलर ने बिक्री के वक्त औसतन 18.5 किमी प्रति लीटर माइलेज देने का वादा किया था।
  • ग्राहक का अनुभव: कार डिलीवरी के कुछ समय बाद ग्राहक ने शिकायत दर्ज कराई कि कार असल में केवल 5 किमी प्रति लीटर का माइलेज दे रही है। ग्राहक ने आरोप लगाया कि गाड़ी में गंभीर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (उत्पादन खराबी) है और उसने 7.27 लाख रुपये के रिफंड या कार बदलने की मांग की।

 

डीलर और कार निर्माता कंपनी ने अदालत में क्या दलीलें दीं?

डीलर ने स्वीकार किया कि शिकायत के बाद की गई टेस्टिंग में कार का माइलेज 8 से 10 किमी प्रति लीटर पाया गया था। हालांकि, डीलर और कंपनी दोनों ने किसी भी तरह के मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से इनकार किया।
कंपनी और डीलर की मुख्य दलीलें:
  • विभिन्न कारकों पर निर्भरता: माइलेज काफी हद तक सड़क की स्थिति, पेट्रोल की गुणवत्ता, ड्राइविंग की आदतों, टायर प्रेशर, मौसम, गाड़ी के वजन और मेंटेनेंस पर निर्भर करता है।
  • हाईवे माइलेज का दावा: डीलर ने कहा कि इस मॉडल की समान गाड़ियां हाईवे पर 15 से 18 किमी प्रति लीटर तक का माइलेज दे सकती हैं।
  • संतुष्टि पत्र: कंपनी ने 'ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (ARAI) की टेस्टिंग और 19 अगस्त 2016 के रिपेयर ऑर्डर पर ग्राहक द्वारा हस्ताक्षरित संतोष पत्र का हवाला देकर दावा किया कि समस्या सुलझा दी गई थी। 
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विशेषज्ञ रिपोर्ट और कंज्यूमर कमीशन की जांच में क्या निकलकर आया?

  • आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी सुधींद्र कुमार, न्यायिक सदस्य अजीत कुमार डी और सदस्य के आर राधाकृष्णन की पीठ ने मामले की समीक्षा की। एक एक्सपर्ट रिपोर्ट में पाया गया कि गाड़ी का वास्तविक माइलेज 13.2 किमी प्रति लीटर था।
  • अदालत ने माना कि हालांकि एक्सपर्ट रिपोर्ट में किसी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन डीलर का खुद यह स्वीकार करना कि कार केवल 8 से 10 किमी का माइलेज दे रही थी। यह साबित करता है कि कंपनी अपने वादे पर खरी नहीं उतरी। ग्राहक को इस वजह से आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ा।

राज्य उपभोक्ता आयोग का अंतिम फैसला क्या रहा?

इससे पहले मल्लपुरम जिला उपभोक्ता फोरम ने कंपनी और डीलर को पूरी कार बदलने या 7.27 लाख रुपये रिफंड करने का आदेश दिया था। हालांकि, राज्य आयोग ने इस फैसले में संशोधन किया:
  1. चूंकि वाहन लगातार ग्राहक के पास ही रहा और कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित नहीं हुआ। इसलिए कार बदलना या पूरी कीमत रिफंड करना उचित नहीं होगा।
  2. सेवा में कमी के एवज में आयोग ने मुआवजे की राशि को जिला फोरम के 25,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया।

इस फैसले से आम कार खरीदारों को क्या सीख मिलती है?

  • यह फैसला गाड़ी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए एक अहम नजीर है। यदि आपको कार खरीदते समय किसी खास माइलेज का लिखित या आधिकारिक दावा किया गया है और गाड़ी लगातार उससे काफी कम माइलेज दे रही है, तो आप कानूनी मदद ले सकते हैं।
  • ऐसे मामलों में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित न होने पर भी 'सेवा में कमी' के आधार पर हर्जाना मिल सकता है। उपभोक्ता अपनी शिकायतों के लिए अपने राज्य की हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं।
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