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Social Media Poetry: मैं आईना हूं तेरी यादों का

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    मैं आईना हूं तेरी यादों का 
कभी मुझको देख संवर लेना।
मेरे आंसू तुम बनो न बनो 
मेरी आंखों में तुम ठहर लेना 
मेरी फितरत है पतंगों जैसी 
तेरे आसपास ही मंडराऊंगा।

तुम चिराग बन यूं ही जलते रहना 
अपन...और पढ़ें
15 hours ago

Social Media Poetry: इस समय में बोलना कितना कठिन है

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    इस समय में बोलना कितना कठिन है 
और चुप रहना कठिन उससे अधिक !

खो  गयीं  जयकार  में  सौ  प्रार्थनाएं 
अट्टहासों  में  घुली  हर  एक सिसकी 
इन्द्रजालों  में   फँसी    है  एक पीढ़ी 
कौन पहचाने यहाँ आवाज  किसकी ...और पढ़ें
1 week ago
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Social Media Poetry: होठों पर मल्हार राग है

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    होठों  पर   मल्हार   राग   है 
साँस  साँस  में  भरी  आग है 
मन  के  भीतर  कोलाहल है 
धड़कन धड़कन दौड़ भाग है

मेरी नींद अचानक खुल जाती  है  आधी  रात  में 
तुम होते तो तुमसे कहता अपने  मन की  बात मैं
...और पढ़ें
2 weeks ago

Social Media Poetry: भले अनभिज्ञता जतला रहा हूँ

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    भले अनभिज्ञता जतला रहा हूँ 
मगर सबकुछ समझता जा रहा हूँ 
तुझे हर बात समझाना कठिन है 
मैं अपने आप को समझा रहा हूँ 

तू चेहरे से झलक उठता है पूरा 
मैं इसपे डॉक्टरेट करवा रहा हूँ 
जहाँ तू सर झुकाने जा रहा...और पढ़ें
1 month ago
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Social Media Poetry: घड़ी से लाख महँगा तो घड़ी का वक़्त होता है

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    घड़ी से लाख महँगा तो घड़ी का वक़्त होता है 
जो इसकी क़द्र करता है उसी का वक्त होता है 

उदासी लुत्फ़ लेने को चली आती है महलों से
हमारी झोपड़ी में जब ख़ुशी का वक़्त होता है 

जकड़ लेती है पैरों को हमारे गाँव क...और पढ़ें
1 month ago

Social Media Poetry: या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ !

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    पक्ष चुनने का समय है
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!

यदि तटस्थी भाव लेकर 
तुम  कहीं अटके हुये हो
तो दया के पात्र हो तुम 
तुम अभी भटके हुये हो 

नाचता सिर पर...और पढ़ें
1 month ago

Social Media Poetry: कुछ रिश्ते कभी टूटते नहीं बस मौन हो जाते हैं

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    कुछ रिश्ते कभी टूटते नहीं
बस मौन हो जाते हैं
चुप्पियां मार देती हैं उन्हें
जब हर पल किसी आवाज़ की आदत हो 
फिर अचानक उसका चुप होना चुभता है
ख़ामोशी सहन नहीं होती
दम घुटता है खामोशी से
बात करने का कोई सिरा...और पढ़ें
2 months ago

Social Media Poetry: बिना किसी अपराध श्रवण को मार  दिया सम्राट ने !

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    एक घुटी-सी चीख सुनी है 
फिर सरयू के घाट ने 
बिना किसी अपराध श्रवण को
मार  दिया सम्राट ने !

उसका था अपराध नीर का बरतन जल तक लाने का
उसका था अपराध प्यास  तक  पानी को पहुँचाने का 

वह निकला था प्य...और पढ़ें
2 months ago

अनिका चौधरी: यह ऊंट है - इतिहास में इसकी उपस्थिति अक्सर दर्ज नहीं की गई

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    
यह ऊंट है।
इतिहास में इसकी उपस्थिति
अक्सर दर्ज नहीं की गई
हालांकि कई बार
राजाओं से अधिक भरोसा
इसी पर किया गया।

सन् 1398 में
जब तैमूर दिल्ली की ओर बढ़ रहा था
तुगलक के पास हाथी थे।...और पढ़ें
2 months ago

Social Media Poetry: चंदन वन है प्यार तुम्हारा

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    महक उठे यह जीवन जिससे
तन मन जो शीतलतम कर दे
चंदन वन है प्यार तुम्हारा।

तड़पन, आँसू, आह, रुदन में
शोक, त्रास, दुख, पीर, घुटन में
मन उदास असहाय खड़ा हो
एकाकी में छुपा पड़ा हो
तब टूटे मन को समझाकर...और पढ़ें
2 months ago
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Anil Pandey

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