मैं आईना हूं तेरी यादों का
कभी मुझको देख संवर लेना।
मेरे आंसू तुम बनो न बनो
मेरी आंखों में तुम ठहर लेना
मेरी फितरत है पतंगों जैसी
तेरे आसपास ही मंडराऊंगा।
तुम चिराग बन यूं ही जलते रहना
अपन...और पढ़ें
इस समय में बोलना कितना कठिन है
और चुप रहना कठिन उससे अधिक !
खो गयीं जयकार में सौ प्रार्थनाएं
अट्टहासों में घुली हर एक सिसकी
इन्द्रजालों में फँसी है एक पीढ़ी
कौन पहचाने यहाँ आवाज किसकी ...और पढ़ें
होठों पर मल्हार राग है
साँस साँस में भरी आग है
मन के भीतर कोलाहल है
धड़कन धड़कन दौड़ भाग है
मेरी नींद अचानक खुल जाती है आधी रात में
तुम होते तो तुमसे कहता अपने मन की बात मैं
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भले अनभिज्ञता जतला रहा हूँ
मगर सबकुछ समझता जा रहा हूँ
तुझे हर बात समझाना कठिन है
मैं अपने आप को समझा रहा हूँ
तू चेहरे से झलक उठता है पूरा
मैं इसपे डॉक्टरेट करवा रहा हूँ
जहाँ तू सर झुकाने जा रहा...और पढ़ें
घड़ी से लाख महँगा तो घड़ी का वक़्त होता है
जो इसकी क़द्र करता है उसी का वक्त होता है
उदासी लुत्फ़ लेने को चली आती है महलों से
हमारी झोपड़ी में जब ख़ुशी का वक़्त होता है
जकड़ लेती है पैरों को हमारे गाँव क...और पढ़ें
पक्ष चुनने का समय है
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!
यदि तटस्थी भाव लेकर
तुम कहीं अटके हुये हो
तो दया के पात्र हो तुम
तुम अभी भटके हुये हो
नाचता सिर पर...और पढ़ें
कुछ रिश्ते कभी टूटते नहीं
बस मौन हो जाते हैं
चुप्पियां मार देती हैं उन्हें
जब हर पल किसी आवाज़ की आदत हो
फिर अचानक उसका चुप होना चुभता है
ख़ामोशी सहन नहीं होती
दम घुटता है खामोशी से
बात करने का कोई सिरा...और पढ़ें
एक घुटी-सी चीख सुनी है
फिर सरयू के घाट ने
बिना किसी अपराध श्रवण को
मार दिया सम्राट ने !
उसका था अपराध नीर का बरतन जल तक लाने का
उसका था अपराध प्यास तक पानी को पहुँचाने का
वह निकला था प्य...और पढ़ें
यह ऊंट है।
इतिहास में इसकी उपस्थिति
अक्सर दर्ज नहीं की गई
हालांकि कई बार
राजाओं से अधिक भरोसा
इसी पर किया गया।
सन् 1398 में
जब तैमूर दिल्ली की ओर बढ़ रहा था
तुगलक के पास हाथी थे।...और पढ़ें
महक उठे यह जीवन जिससे
तन मन जो शीतलतम कर दे
चंदन वन है प्यार तुम्हारा।
तड़पन, आँसू, आह, रुदन में
शोक, त्रास, दुख, पीर, घुटन में
मन उदास असहाय खड़ा हो
एकाकी में छुपा पड़ा हो
तब टूटे मन को समझाकर...और पढ़ें