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उर्दू अदब

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भारतेंदु हरिश्चंद्र: उठा के नाज़ से दामन भला किधर को चले

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
उठा के नाज़ से दामन भला किधर को चले
इधर तो देखिए बहर-ए-ख़ुदा किधर को चले

मिरी निगाहों में दोनों जहाँ हुए तारीक
ये आप खोल के ज़ुल्फ़-ए-दुता किधर को चले

अभी तो आए हो जल्दी कहाँ है जाने की
उठो न...और पढ़ें
15 minutes ago

मंगल नसीम: नहीं हम में कोई अन-बन नहीं है

काव्य डेस्क

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नहीं हम में कोई अन-बन नहीं है
बस इतना है कि अब वो मन नहीं है

मैं अपने आप को सुलझा रहा हूँ
तुम्हें ले कर कोई उलझन नहीं है

मुझे तुम ग़ैर भी क्यों कह रहे हो
भला क्या ये भी अपना-पन नहीं है
...और पढ़ें
16 minutes ago
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Urdu Poetry: अब किसी तरह दिल नहीं लगता

काव्य डेस्क

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                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
42 minutes ago

अंजुम रहबर: इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए

काव्य डेस्क

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                                                    तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए
मैं ज़हर खा रही थी कि तुम याद आ गए

कल मेरी एक प्यारी सहेली किताब में
इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए

उस वक़्त रात-रानी मिरे सूने सहन में
ख़ुशबू लुटा रही थी कि तु...और पढ़ें
15 hours ago
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उर्मिलेश की ग़ज़ल: किसी से अपने दिल की बात कहना तुम न भूले से

काव्य डेस्क

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                                                    वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पास होता है
वो कोई ग़ैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है

किसी से अपने दिल की बात कहना तुम न भूले से
यहाँ ख़त भी ज़रा सी देर में अखबार होता है

हमारे सुख से दुःख उनको हमारे दुःख से...और पढ़ें
15 hours ago

मुनव्वर राना: इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए

काव्य डेस्क

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इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए

आप दरिया हैं तो फिर इस वक़्त हम ख़तरे में हैं
आप कश्ती हैं तो हम को पार होना चाहिए

ऐरे-ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों...और पढ़ें
1 day ago

Urdu Poetry: वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए

काव्य डेस्क

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                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
1 day ago

इरफ़ान जाफ़री: बहुत कठिन है बिखरने का हौसला रखना

काव्य डेस्क

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बहुत कठिन है बिखरने का हौसला रखना
सबब तुम्हीं हो मगर तुम से क्या गिला रखना

न जाने कौन से मौसम से साबिक़ा पड़ जाए
हमारे हक़ में दुआओं का सिलसिला रखना

ख़ुदा करे कि उसे अपनी बात याद रहे
गया है क...और पढ़ें
1 day ago

नासिर काज़मी: मौसम-ए-गुलज़ार-ए-हस्ती इन दिनों क्या है न पूछ

काव्य डेस्क

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मौसम-ए-गुलज़ार-ए-हस्ती इन दिनों क्या है न पूछ
तू ने जो देखा सुना क्या मैं ने देखा है न पूछ

हाथ ज़ख़्मी हैं तो पलकों से गुल-ए-मंज़र उठा
फूल तेरे हैं न मेरे बाग़ किस का है न पूछ

रात अँधेरी है तो अपने...और पढ़ें
1 day ago

Urdu Poetry: मैं ने समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले

काव्य डेस्क

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                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  ...और पढ़ें
                                                
1 day ago
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