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Hindi News ›   World ›   Japan protests Russia's extradition requests for ICC president Tomoko Akane, 8 other court staff

रूस ने की आईसीसी प्रमुख के प्रत्यर्पण की मांग: जापान ने किया विरोध; क्या है पूरा विवाद?

Sat, 10 Oct 2026 03:53 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 10 Oct 2026 03:53 AM IST
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Japan protests Russia's extradition requests for ICC president Tomoko Akane, 8 other court staff
Judge Tomoko Akane - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
जापान ने शुक्रवार को रूस की उस मांग का कड़ा विरोध किया, जिसमें नीदरलैंड से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की अध्यक्ष और जापानी नागरिक तोमोको अकाने समेत अदालत के आठ अन्य अधिकारियों को रूस को सौंपने के लिए कहा गया है। आईसीसी का मुख्यालय यूरोपीय देश नीदरलैंड में है।
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रूस ने इन नौ लोगों के प्रत्यर्पण की मांग की है। यह कदम आईसीसी की ओर से 2023 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के जवाब में उठाया गया। यह वारंट यूक्रेन युद्ध के मामले में जारी किया गया था। पिछले साल मॉस्को की एक अदालत ने इन नौ लोगों को उनकी गैरमौजूदगी में जेल की सजा सुनाई थी।
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जापान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि टोक्यो ने मॉस्को के साथ बातचीत के दौरान इन मांगों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। जापान के उप मुख्य कैबिनेट सचिव मसानाओ ओजाकी ने पत्रकारों से कहा, आईसीसी से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाले कदम अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। इसके बावजूद रूस ने कई देशों से प्रत्यर्पण की मांग की है। हमें इस बात का अफसोस है। 
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ओजाकी ने कहा कि जापान आगे भी उचित कदम उठाएगा। इसमें रूस के सामने और विरोध दर्ज कराना भी शामिल है।

यह बयान रूस के सरकारी वकील के कार्यालय की कार्रवाई के एक दिन बाद आया। गुरुवार को रूस ने नीदरलैंड समेत कई देशों से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की अध्यक्ष तोमोको अकाने और आठ अन्य अधिकारियों को रूस को सौंपने की मांग की थी।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, मॉस्को ने आईसीसी पर आरोप लगाया है कि उसने बिना किसी सबूत के रूसी नागरिकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए। रूस का कहना है कि ये वारंट अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन करते हैं।

जापान और रूस के बीच तनाव क्यों बढ़ा?
अगस्त में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रशांत महासागर में स्थित उन द्वीपों का दौरा किया था, जिन पर जापान अपना दावा करता है। इसके बाद जापान और रूस के संबंध और खराब हो गए।

द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी दिनों में सोवियत संघ ने ये द्वीप जापान से अपने कब्जे में ले लिए थे। इसके बाद से दोनों देशों के बीच विवाद जारी है। इसी विवाद के कारण दोनों देश औपचारिक रूप से युद्ध की स्थिति समाप्त करने वाली शांति संधि पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं।

कैसे संतुलन बना रहा जापान?
जापान के लिए आईसीसी का समर्थन करने और अमेरिका के साथ अपने संबंध बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो गया है। अमेरिका आईसीसी को कमजोर करने और उसकी गतिविधियों को रोकने के लिए अभियान चला रहा है। इसकी वजह अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ अदालत की जांच है। इनमें इस्राइल भी शामिल है।

शुक्रवार को बाद में वाशिंगटन ने आईसीसी के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की। इससे पहले भी अकाने और अदालत के करीब एक दर्जन अन्य अधिकारियों को निशाना बनाते हुए कदम उठाए गए थे।

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची को देश में आलोचना का सामना करना पड़ा है। आलोचना की एक वजह अमेरिका के साथ जापान के करीबी गठबंधन और नीदरलैंड स्थित आईसीसी को जापान के समर्थन के बीच संतुलन बनाने की उनकी कोशिश है।

अमेरिकी प्रतिबंधों पर जापान की प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान में ताकाइची ने आईसीसी और कानून के शासन के प्रति जापान का समर्थन दोहराया। उन्होंने यह बयान अमेरिका के नए प्रतिबंधों के जवाब में दिया।

ताकाइची ने कहा, ये कदम जापान के लगातार बने रहे रुख से मेल नहीं खाते। जापान इनसे बहुत चिंतित है। उन्होंने कहा कि जापान अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा। साथ ही, आईसीसी को जरूरी सहायता देता रहेगा, ताकि अदालत अपना काम कर सके और अपनी भूमिका निभा सके। ताकाइची ने कहा कि टोक्यो, अकाने, आईसीसी और संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए रखेगा।

आईसीसी पर अमेरिकी प्रतिबंधों से क्या असर पड़ेगा?
नए प्रतिबंधों के कारण आईसीसी की अमेरिका स्थित वित्तीय सेवाओं और तकनीकी कंपनियों तक पहुंच रोक दी गई है। अमेरिकी डॉलर के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। इन प्रतिबंधों के तहत आईसीसी के साथ कारोबार करने वाली अमेरिकी कंपनियों और व्यक्तियों को अपनी गतिविधियां बंद करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।


इससे पहले लगाए गए प्रतिबंधों में प्रतिबंधित लोगों की अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में मौजूद संपत्तियों को जब्त करना शामिल था। इसके अलावा, आईसीसी के अधिकारियों और उनके परिवारों के अमेरिका में प्रवेश पर भी रोक लगाई गई थी।

 
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