बरेली: पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने की सुगबुगाहट तेज, आंवला में बदल सकता है सियासी गणित
आंवला के पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी छोड़ने का एलान किया है, जिससे क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हैं। हालांकि उन्होंने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
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बरेली में आंवला के पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप के पार्टी छोड़ने के एलान के बाद क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हैं, लेकिन फिलहाल वह अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। अपनी राजनीतिक अहमियत साबित करने के लिए वे बड़े शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में हैं। यही वजह है कि वे अभी किसी दल का नाम लेने से बच रहे हैं।
सियासी जानकारों का मानना है कि धर्मेंद्र कश्यप के लिए फिलहाल सपा ही सबसे मुफीद विकल्प है, क्योंकि बसपा और कांग्रेस से उन्हें बड़ा राजनीतिक फायदा मिलता नहीं दिख रहा। सपा में उन्हें पहले भी तवज्जो मिल चुकी है और इसी दल के टिकट पर उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा था, जहां से बाद में उनकी भाजपा में एंट्री हुई थी।
लगाए जा रहे ये सियासी कयास
समर्थकों में चर्चा यह भी है कि धर्मेंद्र इस इंतजार में हैं कि भाजपा आलाकमान उन्हें मनाने की कोशिश करें। इस बहाने वे अपनी नाराजगी जाहिर करने के साथ ही अपनी बेटी और खुद का सियासी भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं, ताकि पार्टी के भीतर अपने विरोधियों पर दबाव बना सकें। हालांकि, अब तक भाजपा की ओर से किसी बड़े पदाधिकारी ने उनसे कोई संपर्क नहीं साधा है। उल्टे भाजपा का एक धड़ा उनकी विदाई से राहत महसूस कर रहा है तो दूसरी ओर सपा का एक बड़ा धड़ा भी उनके आने की आहट से सहज नहीं है।
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के नीरज मौर्य ने धर्मेंद्र कश्यप को महज 15,969 वोटों के अंतर से हराया था। आंवला के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में कश्यप समाज के करीब 80 हजार से अधिक वोटर हैं।
चुनाव हराने वाले पहली पंक्ति में, भाजपा में चापलूसों की है भरमार : धर्मेंद्र कश्यप
भाजपा छोड़ने के एलान के बाद आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने बुधवार को समर्थकों और क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों संग बैठक कर आगे की रणनीति पर मंथन किया। पूर्व सांसद ने कहा कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। समर्थकों की राय पर अगला कदम तय होगा। कश्यप ने कहा कि जिन लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हराया, आज वे पार्टी में आगे की पंक्ति में बैठे हैं, जबकि मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की पूछ नहीं हो रही। आरोप लगाया कि भाजपा में चापलूस कार्यकर्ताओं की बाढ़ है।