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यूपी: अपने ही वोट बैंक को बचाने की भाजपा को लड़नी होगी जंग, अखिलेश यादव का ये नया जातीय गणित होगी बड़ी परीक्षा
Wed, 30 Sep 2026 09:35 AM IST
Sharukh Khan
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 30 Sep 2026 09:35 AM IST
सार
यूपी विधानसभा चुनाव में अपने ही वोट बैंक को बचाने के लिए भाजपा को जंग लड़नी होगी। अखिलेश यादव का नया जातीय गणित बड़ी परीक्षा होगी। सपा ब्राह्मण, गैर जाटव दलित, गैरयादव ओबीसी पर दांव लगाएगी। सपा की इस नई रणनीति से भाजपा की चिंता बढ़ी है।
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Akhilesh yadav
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
उत्तर प्रदेश में भाजपा जिस सामाजिक गठजोड़ के सहारे चुनाव दर चुनाव जीतती रही है, सपा की रणनीति अब इसी में सेंध लगाने की है। लोकसभा चुनाव में नए जातीय समीकरण को मिली सफलता के बाद सपा की रणनीति मुस्लिम यादव की पार्टी की छवि से बाहर निकल कर गैर यादव ओबीसी, गैरजाटव दलित और ब्राह्मण बिरादरी को टिकट बंटवारे में अधिक तरजीह देने की है।
लोकसभा चुनाव की तरह ही इस वर्ग ने अगर पार्टी पर जाति को तरजीह दी तो मुकाबला दिलचस्प होगा। भाजपा के सामने अपने आधार वोट बैंक को एकजुट रखने के साथ सपा के इस चक्रव्यूह को भेदने की चुनौती बड़ी हो जाएगी।
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लोकसभा चुनाव की तरह ही इस वर्ग ने अगर पार्टी पर जाति को तरजीह दी तो मुकाबला दिलचस्प होगा। भाजपा के सामने अपने आधार वोट बैंक को एकजुट रखने के साथ सपा के इस चक्रव्यूह को भेदने की चुनौती बड़ी हो जाएगी।
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सपा की इस नई रणनीति से भाजपा की चिंता बढ़ी है। राज्य के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती गैर यादव ओबीसी, गैरजाटव दलित को फिर से साधने की है जिसका बड़ा हिस्सा बीते लोकसभा चुनाव में सपा के साथ चला गया।
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लोकसभा के 2014, 2019 और बीते दो विधानसभा में भाजपा के साथ रहे इस वर्ग में बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रति पुराना समर्पण वाला भाव नहीं रहा।
चूंकि सपा का 2024 के टिकट वितरण का फार्मूला सफल रहा है, ऐसे में वह विधानसभा चुनाव में भाजपा को झटका देने के लिए न सिर्फ कुर्मी, निषाद, गुर्जर, पाल, सैनी, प्रजापति और दलितों में पासी बिरादरी को ज्यादा उपकृत करेगी, बल्कि पूर्वी यूपी, अवध में ब्राह्मणों पर भी डोरे डालेगी। ऐसे में सपा के इस दांव को कुंद करने के लिए भाजपा को अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करना होगा।
क्या है सपा की रणनीति
बीते चुनाव में सपा गठबंधन ने मुस्लिम यादवों के बीच करीब सवा सौ टिकट बांट दिए थे। इससे भाजपा को गैरयादव ओबीसी को साधने में आसानी हुई थी। इस बार सपा की योजना यादव और मुसलमानों के लिए टिकट की संख्या 80-85 सीटों तक सीमित करने की है।
बीते चुनाव में सपा गठबंधन ने मुस्लिम यादवों के बीच करीब सवा सौ टिकट बांट दिए थे। इससे भाजपा को गैरयादव ओबीसी को साधने में आसानी हुई थी। इस बार सपा की योजना यादव और मुसलमानों के लिए टिकट की संख्या 80-85 सीटों तक सीमित करने की है।
कुछ ऐसी सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार खड़ा करने की है, जहां मुस्लिम-यादव-दलित मतदाताओं को मिला कर अजेय स्थिति पैदा हो। इसके अलावा अगड़ों में ब्राह्मण बिरादरी, ओबीसी में कुर्मी, निषाद को थोक के भाव में टिकट देने और सैनी, गुर्जर, राजभर, पाल, प्रजापति को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की है। लोकसभा चुनाव में सपा ने यादव बिरादरी से महज पांच और मुस्लिम बिरादरी से महज चार उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।
बीते चुनाव का समीकरण
सपा गठबंधन ने करीब 128 यादव-मुस्लिम, इतने ही गैर यादव ओबीसी, 86 दलित व करीब 60 अगड़े उम्मीदवार उतारे थे। राजग ने गैरयादव ओबीसी को करीब 135, यादव बिरादरी के 15, अगड़ी जातियों के करीब 140, दलित बिरादरी के 85 और वैश्य बिरादरी के करीब 30 से 35 उम्मीदवार उतारे थे।
सपा गठबंधन ने करीब 128 यादव-मुस्लिम, इतने ही गैर यादव ओबीसी, 86 दलित व करीब 60 अगड़े उम्मीदवार उतारे थे। राजग ने गैरयादव ओबीसी को करीब 135, यादव बिरादरी के 15, अगड़ी जातियों के करीब 140, दलित बिरादरी के 85 और वैश्य बिरादरी के करीब 30 से 35 उम्मीदवार उतारे थे।
कानून व्यवस्था होगा भाजपा का अहम मुद्दा
भाजपा में एक वर्ग का मानना है कि चुनाव के नजदीक आते-आते मुकाबला योगी बनाम अखिलेश हो जाएगा। इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा। जैसे बिहार में शुरुआती परिस्थिति राजग के खिलाफ थी, मगर चुनाव के नजदीक आते आते जब मुकाबला नीतीश-बनाम तेजस्वी हुआ तो राजग को बेहतर कानून व्यवस्था के सवाल पर प्रचंड जीत मिली।
भाजपा में एक वर्ग का मानना है कि चुनाव के नजदीक आते-आते मुकाबला योगी बनाम अखिलेश हो जाएगा। इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा। जैसे बिहार में शुरुआती परिस्थिति राजग के खिलाफ थी, मगर चुनाव के नजदीक आते आते जब मुकाबला नीतीश-बनाम तेजस्वी हुआ तो राजग को बेहतर कानून व्यवस्था के सवाल पर प्रचंड जीत मिली।
उत्तर प्रदेश में भी आम जनमानस में बेहतर कानून व्यवस्था केलिए समर्थन का भाव है। ऐसे में भाजपा को कानून व्यवस्था, हिंदुत्व के साथ सपा के नए सामाजिक समीकरण की काट ढूंढनी होगी।