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एशियन गेम्स: जापानी खाने से वजन बढ़ने का था डर तो देरी से पहुंचे अमन, एशियाड में जीता स्वर्ण
सार
हांगझोउ एशियाई खेलों में स्वर्ण से चूकने का दर्द अमन सेहरावत को लंबे समय तक कचोटता रहा। नागोया में भी पेट दर्द और बढ़े वजन की चुनौती उनके सामने थी, लेकिन देसी खाना खाकर वजन नियंत्रित किया और एक दिन पहले ही जापान पहुंचकर कांस्य पदक जीता। रूसी कोच अली शाबानोव की सलाह ने भी उनकी तैयारी में अहम भूमिका निभाई।
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अमन सहरावत
- फोटो : PTI
विस्तार
हांगझोउ एशियाई खेलों में हाथ से निकला स्वर्ण अमन सेहरावत को रह-रहकर कचोट रहा था। उन्होंने यहां कांस्य जरूर जीता था, लेकिन अंदर से खुशी नहीं थी। यही कारण था कि वह इस पदक के बाद दुनिया की नजरों से दूर लंबे समय तक एकांतवास में चले गए थे।
अमन ने इस बार ठान लिया था कि हांगझोउ की कमी नागोया में दूर करेंगे, लेकिन विश्व चैंपियनशिप के दौरान उनके पेट में उठा दर्द उनका पीछा नहीं छोड़ रहा था। इस पेट दर्द की वजह से अमन का वजन एक किलो सात सौ ग्राम अधिक निकला और वह डिसक्वालिफाई कर दिए गए थे। कुश्ती महासंघ ने उन पर प्रतिबंध भी लगाया। अमन अमर उजाला को बताते हैं कि बाहर का खाना उन्हें रास नहीं आता है। यही कारण था कि पूरी टीम 26 सितंबर को जापान पहुंच गई, लेकिन अमन यहीं रुक गए और 30 को जापान पहुंचे। उन्होंने इस दौरान देसी खाने से अपने वजन पर नियंत्रण रखा। अमन बताते हैं कि उन्हें इस बात का डर था कि जापान में खाना खाने से कहीं उनका बढ़ा वजन मुसीबत न बन जाए। इसलिए वह ऐन मौके पर कुश्ती लड़ने जापान पहुंचे।
ओलंपिक के बाद पहली बार एक दिन पहले घटा वजन
अमन ने एशियाड के लिए रूसी कोच अली शाबानोव के साथ तैयारी की थी। अमन बताते हैं कि अली का वीजा नहीं लग पाया जिस कारण वह यहां नहीं आ पाए, लेकिन वह अली से लगातार बात कर रहे थे। अली ने उन्हें एक ही सलाह दी थी कि किसी भी पहलवान का वीडियो नहीं देखना है, तुम्हें सिर्फ अपने खेल और मजबूत पक्ष पर ध्यान देना है। अमन ने यही किया जिसका उन्हें फल भी मिला।
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अमन ने इस बार ठान लिया था कि हांगझोउ की कमी नागोया में दूर करेंगे, लेकिन विश्व चैंपियनशिप के दौरान उनके पेट में उठा दर्द उनका पीछा नहीं छोड़ रहा था। इस पेट दर्द की वजह से अमन का वजन एक किलो सात सौ ग्राम अधिक निकला और वह डिसक्वालिफाई कर दिए गए थे। कुश्ती महासंघ ने उन पर प्रतिबंध भी लगाया। अमन अमर उजाला को बताते हैं कि बाहर का खाना उन्हें रास नहीं आता है। यही कारण था कि पूरी टीम 26 सितंबर को जापान पहुंच गई, लेकिन अमन यहीं रुक गए और 30 को जापान पहुंचे। उन्होंने इस दौरान देसी खाने से अपने वजन पर नियंत्रण रखा। अमन बताते हैं कि उन्हें इस बात का डर था कि जापान में खाना खाने से कहीं उनका बढ़ा वजन मुसीबत न बन जाए। इसलिए वह ऐन मौके पर कुश्ती लड़ने जापान पहुंचे।
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ओलंपिक के बाद पहली बार एक दिन पहले घटा वजन
अमन ने एशियाड के लिए रूसी कोच अली शाबानोव के साथ तैयारी की थी। अमन बताते हैं कि अली का वीजा नहीं लग पाया जिस कारण वह यहां नहीं आ पाए, लेकिन वह अली से लगातार बात कर रहे थे। अली ने उन्हें एक ही सलाह दी थी कि किसी भी पहलवान का वीडियो नहीं देखना है, तुम्हें सिर्फ अपने खेल और मजबूत पक्ष पर ध्यान देना है। अमन ने यही किया जिसका उन्हें फल भी मिला।
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