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जानना जरूरी: ऑक्सीमीटर में SpO2 और PR क्या होता है? आसान भाषा में समझें दोनों का मतलब

Mon, 19 Oct 2026 06:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 19 Oct 2026 06:30 PM IST
सार

Oximeter Reading: ऑक्सीमीटर खून में ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO2 का अनुमान देता है। ज्यादातर स्वस्थ लोगों में यह 95-100% रहता है। लगातार 90 से कम की रीडिंग पर डॉक्टर से सलाह लें। शरीर में ऑक्सीजन का लेवल लगातार कम रहना सेहत के लिए खतरनाक संकेत माना जाता है।

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Pulse Oximeter Reading Normal SpO2 Level and When Should You Be Concerned
ऑक्सीमीटर की रीडिंग को समझें - फोटो : Amarujala.com/AI

शरीर को स्वस्थ रखने और सभी अंगों के ठीक तरीके से काम करते रहने के लिए खून का संचार ठीक रहना सबसे जरूरी माना जाता है। खून में मौजूद हीमोग्लोबिन प्रोटीन शरीर के सभी हिस्सों तक लगातार ऑक्सीजन पहुंचाता रहता है। कोशिकाओं के स्वस्थ रहने के लिए ऑक्सीजन बहुत जरूरी है, इसकी कमी होने से कोशिकाएं डेड होने लगती हैं।



कई ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां भी हैं जिनके कारण शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत होती है।

आमतौर पर सांस लेने में परेशानी होने को ऑक्सीजन की कमी का सबसे पहला संकेत माना जाता है। इस समस्या का पता लगाने के लिए ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल किया जाता है। इसे उंगली पर लगाकर खून में ऑक्सीजन का अनुमानित स्तर पता किया जाता है। क्या आपको ऑक्सीमीटर का सही तरीके से इस्तेमाल करना आता है?

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Pulse Oximeter Reading Normal SpO2 Level and When Should You Be Concerned
ऑक्सीजन की जांच - फोटो : Freepik.com

ऑक्सीमीटर, शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बताती है। स्वस्थ लोगों में ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO2 का स्तर 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहता है। हालांकि, कुछ बीमारियों और अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर यह कम हो सकता है। ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होने पर शरीर के जरूरी अंग प्रभावित हो सकते हैं इसलिए रीडिंग के साथ अपने लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

ऑक्सीमीटर की रीडिंग को समझिए

ऑक्सीमीटर में आमतौर पर स्क्रीन पर दो मुख्य आंकड़े दिखाई देते है। पहला SpO2 और दूसरा PR यानी पल्स रेट होता है।
 

  • SpO2 खून में ऑक्सीजन से जुड़े हीमोग्लोबिन का अनुमानित प्रतिशत बताता है। 
  • वहीं PR का मतलब पल्स रेट है। यह बताता है कि एक मिनट में दिल कितनी बार धड़क रहा है? वयस्कों में आराम की स्थिति में सामान्य पल्स रेट अक्सर 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट होता है। 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, ऑक्सीमीटर में अगर SpO2 लगातार 90 से कम या फिर पल्स रेट 60 से कम या 120 से ज्यादा आ रहा है तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। ये रीडिंग शरीर में किसी गंभीर समस्या की ओर संकेत हो सकती हैं, जिसपर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।
Pulse Oximeter Reading Normal SpO2 Level and When Should You Be Concerned
ऑक्सीजन की कमी के संकेत - फोटो : Freepik.com

 कब हो जाएं सावधान

ऑक्सीमीटर की रीडिंग यह समझने में मदद करती है कि खून में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य है या नहीं? ज्यादातर स्वस्थ लोगों में 95-100 प्रतिशत की रीडिंग सामान्य मानी जाती है। अगर रीडिंग 90  प्रतिशत से कम आ रही है, तो सही तरीके से दोबारा जांच करें। इसके बाद भी रीडिंग इसी स्तर पर बनी रहे, तो इसबारे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
 

  • ऑक्सीमीटर की रीडिंग हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होती। कई बार उपकरण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम या ज्यादा भी दिखा सकता है। इसलिए एक रीडिंग के बाद दूसरी रीडिंग भी जरूर चेक करें।
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Pulse Oximeter Reading Normal SpO2 Level and When Should You Be Concerned
ऑक्सीजन का स्तर कैसे चेक करें - फोटो : Freepik.com

ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल सही तरीके से कैसे करें?

ऑक्सीमीटर से सही रीडिंग पाने के लिए इसका इस्तेमाल सही तरीके से करना जरूरी है। 
 

  • सबसे पहले कुछ मिनट आराम से बैठें और अपने हाथों को स्थिर रखें। अगर उंगलियां ठंडी हैं, तो उन्हें सामान्य तापमान पर आने दें। 
  • इसके बाद ऑक्सीमीटर को उंगली पर लगाएं और कुछ सेकंड इंतजार करें, जब तक स्क्रीन पर आंकड़े स्थिर न हो जाएं।
  • अगर रीडिंग उम्मीद से कम-ज्यादा आती है, तो हाथ स्थिर रखकर दोबारा माप लें। लगातार कम रीडिंग आने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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