शरीर को स्वस्थ रखने और सभी अंगों के ठीक तरीके से काम करते रहने के लिए खून का संचार ठीक रहना सबसे जरूरी माना जाता है। खून में मौजूद हीमोग्लोबिन प्रोटीन शरीर के सभी हिस्सों तक लगातार ऑक्सीजन पहुंचाता रहता है। कोशिकाओं के स्वस्थ रहने के लिए ऑक्सीजन बहुत जरूरी है, इसकी कमी होने से कोशिकाएं डेड होने लगती हैं।
जानना जरूरी: ऑक्सीमीटर में SpO2 और PR क्या होता है? आसान भाषा में समझें दोनों का मतलब
Oximeter Reading: ऑक्सीमीटर खून में ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO2 का अनुमान देता है। ज्यादातर स्वस्थ लोगों में यह 95-100% रहता है। लगातार 90 से कम की रीडिंग पर डॉक्टर से सलाह लें। शरीर में ऑक्सीजन का लेवल लगातार कम रहना सेहत के लिए खतरनाक संकेत माना जाता है।
ऑक्सीमीटर, शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बताती है। स्वस्थ लोगों में ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO2 का स्तर 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहता है। हालांकि, कुछ बीमारियों और अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर यह कम हो सकता है। ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होने पर शरीर के जरूरी अंग प्रभावित हो सकते हैं इसलिए रीडिंग के साथ अपने लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
ऑक्सीमीटर की रीडिंग को समझिए
ऑक्सीमीटर में आमतौर पर स्क्रीन पर दो मुख्य आंकड़े दिखाई देते है। पहला SpO2 और दूसरा PR यानी पल्स रेट होता है।
- SpO2 खून में ऑक्सीजन से जुड़े हीमोग्लोबिन का अनुमानित प्रतिशत बताता है।
- वहीं PR का मतलब पल्स रेट है। यह बताता है कि एक मिनट में दिल कितनी बार धड़क रहा है? वयस्कों में आराम की स्थिति में सामान्य पल्स रेट अक्सर 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट होता है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, ऑक्सीमीटर में अगर SpO2 लगातार 90 से कम या फिर पल्स रेट 60 से कम या 120 से ज्यादा आ रहा है तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। ये रीडिंग शरीर में किसी गंभीर समस्या की ओर संकेत हो सकती हैं, जिसपर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।
कब हो जाएं सावधान
ऑक्सीमीटर की रीडिंग यह समझने में मदद करती है कि खून में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य है या नहीं? ज्यादातर स्वस्थ लोगों में 95-100 प्रतिशत की रीडिंग सामान्य मानी जाती है। अगर रीडिंग 90 प्रतिशत से कम आ रही है, तो सही तरीके से दोबारा जांच करें। इसके बाद भी रीडिंग इसी स्तर पर बनी रहे, तो इसबारे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
- ऑक्सीमीटर की रीडिंग हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होती। कई बार उपकरण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम या ज्यादा भी दिखा सकता है। इसलिए एक रीडिंग के बाद दूसरी रीडिंग भी जरूर चेक करें।
ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल सही तरीके से कैसे करें?
ऑक्सीमीटर से सही रीडिंग पाने के लिए इसका इस्तेमाल सही तरीके से करना जरूरी है।
- सबसे पहले कुछ मिनट आराम से बैठें और अपने हाथों को स्थिर रखें। अगर उंगलियां ठंडी हैं, तो उन्हें सामान्य तापमान पर आने दें।
- इसके बाद ऑक्सीमीटर को उंगली पर लगाएं और कुछ सेकंड इंतजार करें, जब तक स्क्रीन पर आंकड़े स्थिर न हो जाएं।
- अगर रीडिंग उम्मीद से कम-ज्यादा आती है, तो हाथ स्थिर रखकर दोबारा माप लें। लगातार कम रीडिंग आने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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