टिप्पणी: हामिद अंसारी के बयान पर वीएचपी का पलटवार, विनोद बंसल बोले- नेहरूवादी और कट्टर सोच से बाहर आएं
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर जवाहरलाल नेहरू के पुराने बयान का हवाला दिया। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने अंसारी पर तीखा पलटवार किया और उनके बयान को लेकर कई आरोप लगाए। बंसल ने अंसारी को नेहरूवादी और हिंदू विरोधी सोच से बाहर आने की सलाह दी। आखिर अंसारी ने क्या कहा और वीएचपी ने क्यों जताई आपत्ति? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं..
विस्तार
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पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। अंसारी ने एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पुराने बयान का हवाला दिया था। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद ने उन पर तीखा हमला बोला। वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने अंसारी की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘नेहरूवादी, जिन्नावादी और हिंदू विरोधी सोच’ से बाहर आने की सलाह दी।
अंसारी ने क्या कहा था और वीएचपी ने क्या जवाब दिया?
अंसारी ने शनिवार को इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में नेहरू के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के लिए असली खतरा साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। अंसारी ने इस संदर्भ में एजी नूरानी की 2019 में प्रकाशित किताब ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का भी उल्लेख किया। इसके जवाब में बंसल ने कहा कि बहुसंख्यक हिंदू समाज को भारत के लिए खतरा बताने से पहले अंसारी को अपने सार्वजनिक जीवन पर भी नजर डालनी चाहिए।
हामिद अंसारी ने नेहरू के किस बयान का जिक्र किया?
हामिद अंसारी ने एजी नूरानी को याद करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में भारत में नागरिक राष्ट्रवाद के सामने उभरती चुनौतियों का जिक्र किया। इसी दौरान उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन को सामने रखा। अंसारी के मुताबिक नेहरू ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में कहा था कि भारत के लिए असली खतरा साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। यह टिप्पणी पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया के रिकॉर्ड और एजी नूरानी की किताब के संदर्भ में सामने रखी गई।
वीएचपी ने अंसारी पर क्या आरोप लगाए?
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने अंसारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अंसारी को हिंदुओं को सांप्रदायिकता पर उपदेश देने से पहले अपने सार्वजनिक जीवन को देखना चाहिए। बंसल ने अंसारी के उपराष्ट्रपति रहने के दौरान पीएफआई से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी और राजदूत के तौर पर उनके कार्यकाल को लेकर भी आरोप लगाए। ये बंसल द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। उन्होंने अंसारी के रुख को ‘हिंदू विरोधी’ और ‘भारत विरोधी’ मानसिकता से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की।
अयोध्या फैसले को लेकर वीएचपी ने क्या कहा?
बंसल ने अंसारी की अयोध्या में राम जन्मभूमि से जुड़े फैसले पर पहले की गई आलोचना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया की सबसे ज्यादा मस्जिदें हैं और इसके बावजूद अंसारी ने पहले राम जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक फैसले की आलोचना की थी। बंसल ने आरोप लगाया कि अब हिंदू समाज पर टिप्पणी करके अंसारी फिर से अपनी कथित कट्टर सोच को सामने ला रहे हैं। उन्होंने अंसारी से कहा कि देश ने उन्हें पद, सम्मान, धन और प्रतिष्ठा दी है, इसलिए उन्हें देश के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए।
वीएचपी ने अंसारी को क्या सलाह दी?
विनोद बंसल ने कहा कि अंसारी को ‘नेहरूवादी, जिन्नावादी और हिंदू विरोधी सोच’ से बाहर आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों को उपदेश देने से पहले अंसारी को अपने ‘आईने’ में देखना चाहिए। इस पूरे विवाद की शुरुआत अंसारी द्वारा नेहरू के पुराने बयान का हवाला देने से हुई और इसके बाद वीएचपी ने उनके बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मामले में दोनों पक्षों की टिप्पणियां अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक नजरिए को सामने रखती हैं।