केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को कंपनियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। यूरिया और सिंथेटिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। कोयला मंत्रालय ने मंगलवार, 8 सितंबर को बताया कि इस योजना के लिए कुल सात आवेदन प्राप्त हुए हैं।
अदाणी एंटरप्राइजेज, एनटीपीसी और तालचर फर्टिलाइजर्स जैसी प्रमुख कंपनियों ने आवेदन किए हैं। अकेले अडानी एंटरप्राइजेज ने यूरिया परियोजनाओं के लिए तीन प्रस्ताव जमा किए हैं। गैलेंट इस्पात ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) और सिनगैस बनाने के लिए आवेदन किया है।
सरकारी कंपनी एनटीपीसी ने सिंथेटिक नेचुरल गैस के लिए प्रस्ताव दिया है। श्याम सेल एंड पावर ने सिनगैस उत्पादन के लिए और तालचर फर्टिलाइजर्स ने यूरिया परियोजना के लिए आवेदन किया है। मंत्रालय अब योजना के दिशानिर्देशों और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के अनुसार इन आवेदनों की विस्तृत जांच करेगा।
क्या है कोयला गैसीकरण और इसका लक्ष्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू कोयले और लिग्नाइट को गैसीफाई करके सिनगैस तैयार करना है। सिनगैस में मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन जैसी गैसों का मिश्रण होता है। इनका उपयोग यूरिया, मेथनॉल, हाइड्रोजन और सिंथेटिक नेचुरल गैस जैसे उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। सरकार ने 2030 तक 100 दस लाख टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने का व्यापक लक्ष्य रखा है। नई योजना के तहत 75 दस लाख टन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
योजना से कितना निवेश आएगा और कब तक आवेदन कर सकते हैं?
मंत्रालय के अनुसार, इस योजना से करीब 2.5-3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई को 37,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ इस योजना को मंजूरी दी थी। कई संभावित आवेदक अभी अपनी परियोजनाओं की तैयारी कर रहे हैं। इनमें पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन और तकनीक का आकलन शामिल है। कोयला मंत्रालय ने जुलाई में आवेदन मंगाए थे। आवेदन का पहला चरण 7 सितंबर को बंद हुआ, दूसरा 8 सितंबर को शुरू हुआ। आगे हर दो महीने के अंतराल पर आवेदन के लिए नए अवसर खुलेंगे।
आयात पर निर्भरता कम करने में यह योजना कैसे सहायक होगी?
सरकार कोयला गैसीकरण को आयात पर निर्भरता घटाने का एक अहम साधन मानती है। वित्त वर्ष 2024-25 में एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात पर करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। घरेलू कोयले से इन उत्पादों के लिए कच्चा माल तैयार होगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। योजना के तहत कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा। यह प्रोत्साहन संयंत्र और मशीनरी की पात्र लागत का 20 फीसदी तक होगा। यह जनवरी 2024 में मंजूर 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना का अगला कदम है।