एआई को नियंत्रित करने की मांग पर ट्रंप का पलटवार: बोले- हमारे खिलाफ साजिश हो रही, चीन पर क्या आरोप लगाया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एआई पर सरकारी निगरानी और नई सुरक्षा सीमाओं की मांग को खारिज करते हुए कहा कि एआई और डेटा सेंटरों के खिलाफ एक ‘बीमार साजिश’ चल रही है। उनका कहना है कि एआई को नियंत्रित करने के लिए मजबूत और समझदार राष्ट्रपति ही काफी है। वहीं तकनीकी कंपनियां एआई के सुरक्षित विकास के लिए सरकारी निगरानी चाहती हैं। आखिर ट्रंप इन पाबंदियों के इतने खिलाफ क्यों हैं?
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर नई सुरक्षा सीमाएं लगाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि एआई के लिए अलग से सरकारी ‘गार्डरेल’ या नियंत्रण की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका के पास ऐसा मजबूत और समझदार राष्ट्रपति है जो एआई के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने एआई और डेटा सेंटरों के खिलाफ चल रही कोशिशों को एक ‘बीमार साजिश’ बताया और कहा कि इसका फायदा केवल चीन को हो रहा है।
ट्रंप ने एआई पर सरकारी नियंत्रण को क्यों खारिज किया?
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि एआई के लिए सबसे जरूरी नियंत्रण एक मजबूत और समझदार राष्ट्रपति है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका के पास ऐसा राष्ट्रपति पर्याप्त मजबूती से मौजूद है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा और नियंत्रण की मांग तेज हो रही है। हाल के महीनों में कई हैकिंग घटनाओं ने भी यह चिंता बढ़ाई है कि एआई एजेंट इंसानों को धोखा देने जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकते हैं। ट्रंप ने इन चिंताओं के बावजूद एआई पर ज्यादा सरकारी पाबंदियों का समर्थन नहीं किया।
ट्रंप के खिलाफ कौन-से एआई विशेषज्ञ और कंपनियां ज्यादा निगरानी चाहते हैं?
एआई के क्षेत्र से जुड़े कई बड़े नाम इसके विकास पर सरकारी निगरानी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इनमें एंथ्रोपिक के डारियो अमोडेई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क शामिल हैं। इन लोगों की चिंता है कि एआई का विकास केवल तेजी से नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि एआई से जुड़े जोखिमों को कम किया जाए, कानूनी जिम्मेदारी तय हो, अर्थव्यवस्था को फायदा मिले, विज्ञान आगे बढ़े और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा भी सुरक्षित रहे। शनिवार को अमोडेई ने करीब 3,800 शब्दों का लेख लिखकर एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत बताई।
एंथ्रोपिक और ट्रंप प्रशासन के बीच विवाद क्या है?
ट्रंप ने खास तौर पर एंथ्रोपिक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन पहले ही इस एआई कंपनी को ऐसी गतिविधियां करने से रोक चुका है, जो खराब या संभावित रूप से खराब हो सकती थीं। एंथ्रोपिक और ट्रंप प्रशासन के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। पेंटागन ने कंपनी के एआई मॉडल को सुरक्षा जोखिम के तौर पर पेश करने की कोशिश की थी और उसके एक ज्यादा उन्नत मॉडल पर अस्थायी रोक भी लगाई गई थी। इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट ने सोमवार को अपनी आचार संहिता जारी की, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई पर इंसानों का नियंत्रण बना रहे।
ट्रंप ने चीन का नाम लेकर एआई पर क्या चेतावनी दी?
ट्रंप एआई पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के प्रयासों के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि ज्यादा पाबंदियां अमेरिका को एआई की दौड़ में पीछे कर सकती हैं और चीन को आगे निकलने का मौका मिल सकता है। उन्होंने एआई और डेटा सेंटरों के खिलाफ चल रही कोशिशों को ‘बीमार साजिश’ बताते हुए कहा कि इससे खुश होने वाला एकमात्र देश चीन है। ट्रंप का संदेश साफ है कि अमेरिका को एआई के विकास की रफ्तार कम करने के बजाय उसे आगे बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। दूसरी ओर, तकनीकी क्षेत्र के कुछ बड़े नाम सुरक्षा, कानूनी जिम्मेदारी और मानव नियंत्रण को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। यही अंतर अब अमेरिका की एआई नीति को लेकर बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।