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पीएम नेतन्याहू ने लगाया चुनाव में धांधली का आरोप: जांच के घेरे में अरब पार्टियां; इस्राइल में सत्ता की जंग तेज

Thu, 29 Oct 2026 02:13 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 29 Oct 2026 02:13 PM IST
सार

इस्राइल में के पीएम नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर रिश्वत और धांधली से चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया है। चुनाव में विदेशी दखल के संदेह की जांच के लिए शिन बेट को एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जबकि सरकार बनाने के लिए बहुमत का गणित अब भी उलझा हुआ है।

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PM Benjamin Netanyahu alleges election fraud Arab parties under scrutiny power struggle intensifies in Israel
पीएम नेतन्याहू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इस्राइल में चुनाव के दौरान गड़बड़ी और विदेशी दखल के आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है। केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोम सोलबर्ग ने देश की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख डेविड ज़िनी को इन आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जांच पूरी कर एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव के बाद भी किसी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है।
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विदेशी फंडिंग से चुनाव प्रभावित करने का आरोप
'टाइम्स ऑफ इस्राइल' की रिपोर्ट के मुताबिक, सोलबर्ग ने शिन बेट को लिखे पत्र में कहा कि उनके सामने चुनाव को गलत तरीके से प्रभावित करने के गंभीर आरोप आए हैं। शक जताया गया है कि इस्राइल के हितों के खिलाफ काम करने वाली विदेशी संस्थाओं ने पैसे के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की। सोलबर्ग ने साफ किया कि फिलहाल इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, विदेशी संस्थाओं का नाम सामने आने के कारण मामले की गहराई से जांच जरूरी है। उन्होंने शिन बेट से कहा कि वह अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर ऐसे सबूत जुटाए, जिनसे आरोपों की सच्चाई सामने आ सके। इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखना है।
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नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर लगाए गंभीर आरोप
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आरोप लगाया है कि अरब पार्टियों ने रिश्वत, धमकी, हिंसा और धोखाधड़ी के जरिए चुनाव को प्रभावित किया। उनका दावा है कि मतदाताओं को जुटाने के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल किया गया। नेतन्याहू के मुताबिक, उनकी लिकुड पार्टी पुलिस, शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति को कथित गड़बड़ियों से जुड़े सैकड़ों गवाहों के बयान और सबूत सौंप रही है। इनमें नकदी और राआम पार्टी की पर्चियों वाले लिफाफे, मतदान केंद्र के कर्मचारियों को धमकाने, एक से ज्यादा बार वोट डालने और दोहरी पहचान के जरिए मतदान करने जैसे आरोप शामिल हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मतदान केंद्रों पर मतदाताओं और मतपेटियों में मिले लिफाफों की संख्या में अंतर था। नेतन्याहू ने संबंधित एजेंसियों से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
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बहुमत के आंकड़े से दूर नेतन्याहू का गठबंधन
चुनाव के अनुमानित आंकड़े भी इस्राइल की राजनीति में अनिश्चितता दिखा रहे हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 26 सीटें मिलने का अनुमान है। इसके साथ यूनाइटेड तोराह जुडाइज़्म, शस और ओत्ज़मा येहुदित जैसे सहयोगी दल हैं। पूरे गठबंधन को करीब 53 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सीटें चाहिए।

विपक्ष के सामने भी सरकार बनाने की चुनौती
दूसरी ओर, गादी आइसेनकोट की यशार, नफ्ताली बेनेट की ब्याचाद, एविग्डोर लिबरमैन की यिसराएल बेतेनु और यायर गोलान की द डेमोक्रेट्स वाले विपक्षी गठबंधन को करीब 48 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, जॉइंट लिस्ट और राआम समेत अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें जाने की संभावना है।


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सरकार बनाने के लिए नए समीकरणों पर नजर
इन आंकड़ों के बीच नेतन्याहू विरोधी खेमे से अरब पार्टियों को साथ लेकर बहुमत जुटाने की अपील की जा रही है। अब देखना होगा कि विपक्ष ऐसा कोई गठबंधन बना पाता है या नहीं, जो नेतन्याहू को सत्ता से बाहर कर सके। फिलहाल, चुनावी गड़बड़ी के आरोपों की जांच और सरकार बनाने की कोशिशें इस्राइल की राजनीति के दो सबसे अहम मुद्दे बने हुए हैं।
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