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रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का खतरा: जयशंकर ने रूबियो के सामने उठाई भारत की चिंता, क्या-क्या हुई बात?
Wed, 23 Sep 2026 08:15 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, न्यूयॉर्क।
पीटीआई, न्यूयॉर्क।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 23 Sep 2026 08:15 PM IST
सार
न्यूयॉर्क में एस जयशंकर और मार्को रूबियो की मुलाकात में भारत-अमेरिका संबंधों के साथ रूस और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध कानून का मुद्दा प्रमुख रहा। जयशंकर ने इस कानून को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को सामने रखा। दोनों नेताओं ने खाड़ी और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की। रूबियो ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर समन्वय जारी रखने की बात कही।
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रूबियो और एस जयशंकर की मुलाकात
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई। जयशंकर ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि उन्होंने अमेरिका के साथ रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।
भारत को नए अमेरिकी कानून से क्या चिंता?
भारत की चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर नया कानून बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। इसमें भारत और चीन जैसे देश भी शामिल हैं।
रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर क्या कहा?
मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को लेकर समन्वय कर रहे हैं। रूबियो ने यह भी कहा कि दोनों देश अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और आने वाले बहुपक्षीय प्रयासों पर मिलकर काम कर रहे हैं।
जयशंकर और रूबियो की इससे पहले कब मुलाकात हुई थी?
दोनों नेताओं की इससे पहले इसी साल जुलाई में मनीला में मुलाकात हुई थी। उस बैठक में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अमेरिकी विदेश विभाग ने उस बैठक के बाद कहा था कि दोनों नेता भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के महत्व पर सहमत हुए थे।
यह भी पढ़ें: आसिम मुनीर का नया पैंतरा: दिखावे के लिए बलूच लड़ाकों और तालिबान के खात्मे की खाई कसम, जैश-लश्कर पर सिले होंठ
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भारत को नए अमेरिकी कानून से क्या चिंता?
भारत की चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर नया कानून बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। इसमें भारत और चीन जैसे देश भी शामिल हैं।
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- 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान: नए अमेरिकी कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर राष्ट्रपति 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं।
- भारत और चीन भी दायरे में: कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों में भारत और चीन जैसे देशों को भी शामिल किया गया है।
- भारत ने आर्थिक हितों की बात कही: नई व्यवस्था पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा था कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
- ऊर्जा सुरक्षा पर भी जोर: नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट किया था कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर क्या कहा?
मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को लेकर समन्वय कर रहे हैं। रूबियो ने यह भी कहा कि दोनों देश अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और आने वाले बहुपक्षीय प्रयासों पर मिलकर काम कर रहे हैं।
जयशंकर और रूबियो की इससे पहले कब मुलाकात हुई थी?
दोनों नेताओं की इससे पहले इसी साल जुलाई में मनीला में मुलाकात हुई थी। उस बैठक में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अमेरिकी विदेश विभाग ने उस बैठक के बाद कहा था कि दोनों नेता भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के महत्व पर सहमत हुए थे।
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