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रूस के चुनावी नतीजे: 75% से ज्यादा सीटों के अनुमान के साथ यूनाइटेड रशिया भारी बहुमत की ओर, पुतिन क्या बोले?

Thu, 24 Sep 2026 12:12 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 24 Sep 2026 12:12 AM IST
सार

रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी निचले सदन यानी स्टेट ड्यूमा की 450 सीटों में तीन-चौथाई से ज्यादा सीटें जीतने जा रही है। जो अब तक का उसका सबसे बड़ा आंकड़ा होगा।  यह चुनाव यूक्रेन के साथ जारी युद्ध, ड्रोन हमलों और वास्तविक विपक्ष की सीमित मौजूदगी के बीच हुआ है।

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Election results boost Putin power United Russia heads landslide victory indications securing over 75% seats
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

रूस के संसदीय चुनाव में क्रेमलिन की मुख्य पार्टी यूनाइटेड रशिया को तीन-चौथाई से ज्यादा सीटें मिलने के संकेत हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस जीत को अपनी नीतियों के लिए जनता के समर्थन के तौर पर पेश किया। उन्होंने बुधवार को कहा कि रूस में हुए संसदीय चुनाव के नतीजे उनकी नीतियों के लिए जनता के समर्थन को दिखाते हैं। रूस का यह पहला संसदीय चुनाव था, जो यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के बीच हुआ और इसके बाद क्रेमलिन का संसद पर पहले से मौजूद मजबूत नियंत्रण और बढ़ गया है। रविवार को खत्म हुए तीन दिन के मतदान के बाद 97 फीसदी से ज्यादा वोटों की गिनती पूरी हो चुकी थी। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, क्रेमलिन की मुख्य पार्टी यूनाइटेड रशिया निचले सदन यानी स्टेट ड्यूमा की 450 सीटों में तीन-चौथाई से ज्यादा सीटें जीतने जा रही है, जो अब तक का उसका सबसे बड़ा आंकड़ा होगा। चुनाव में वास्तविक विपक्ष की मौजूदगी लगभग न के बराबर रही।

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एक दशक से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा मतदान
रूस के संसदीय चुनाव में 11.1 करोड़ पात्र मतदाताओं में से 59 फीसदी से ज्यादा लोगों ने मतदान किया। यह एक दशक से ज्यादा समय में किसी संसदीय चुनाव में सबसे अधिक मतदान था। अधिकारियों ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मतदान तीन दिनों तक कराया। मतदान उन यूक्रेनी इलाकों में भी कराया गया, जिन्हें रूस ने कब्जे में लेकर बाद में अवैध रूप से अपने में मिला लिया था। कुछ क्षेत्रों में ऑनलाइन वोटिंग की सुविधा भी दी गई थी। नतीजों पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए पुतिन ने शीर्ष सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक में टेलीविजन पर कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का वोट डालने के लिए बाहर आना दिखाता है कि रूस की जनता देश को मजबूत करने की उनकी कोशिशों का समर्थन करती है।
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मतदान के बीच यूक्रेन के ड्रोन हमले भी जारी रहे
यह चुनाव ऐसे समय हुआ जब यूक्रेन की ओर से रूस में लगातार ड्रोन हमले किए जा रहे थे। रविवार को रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रातभर में 1,110 ड्रोन मार गिराए गए। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने कहा कि राजधानी की ओर बढ़ रहे 450 ड्रोन को मार गिराया गया। उन्होंने इसे मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया और आरोप लगाया कि इसका मकसद चुनाव को बाधित करना था। अधिकारियों के मुताबिक, हमले में एक तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा, जबकि पूरे मॉस्को क्षेत्र में तीन लोगों की मौत हुई और 38 लोग घायल हुए।
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'रूस को डराया नहीं जा सकता'
पुतिन ने कहा कि चुनाव को रोकने और प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश की गई। उन्होंने मॉस्को और दूसरे इलाकों में एयर डिफेंस को भेदने की लगातार कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा कि मतदान केंद्रों के बाहर लगी कतारों ने दिखा दिया कि रूस को डराया नहीं जा सकता। उन्होंने यह चुनाव ऐसे समय होने की बात भी कही जब यूक्रेन के खिलाफ पूर्ण युद्ध शुरू किए हुए 2022 से समय बीत चुका है। यह पहला संसदीय चुनाव था जिसमें यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों के निवासियों को भी शामिल किया गया, जिन्हें रूस ने 2022 में कब्जे में लेने के बाद अवैध रूप से अपने में मिला लिया था। डोनेत्स्क के रूसी कब्जे वाले इलाके में एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं ने हथियारबंद रूसी सैनिक की निगरानी में मतपेटी में वोट डाला। 2014 में रूस द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्रीमिया में भी मतदान हुआ। यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में कराए गए मतदान को अवैध बताया।

'यह वोट आपके लिए था'
पुतिन ने यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों को पता होना चाहिए कि यह वोट उनके लिए था। पुतिन ने कहा कि लोगों को सैनिकों पर भरोसा है और वे रूस की जीत, सैनिकों के साहस, वीरता और मातृभूमि के प्रति उनकी निष्ठा में विश्वास करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि यूक्रेन में चलाए जा रहे अभियान के लिए तय किए गए सभी लक्ष्य पूरे किए जाएंगे। क्रेमलिन युद्ध के लिए 'विशेष सैन्य अभियान' शब्द का इस्तेमाल करता है।

सरकारी मीडिया के बड़े अभियान से मजबूत हुई क्रेमलिन की पकड़
रूस में सरकारी मीडिया के बड़े अभियान और चुनाव पर कड़े नियंत्रण के बीच क्रेमलिन अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करने में कामयाब रहा। यह स्थिति ऐसे समय बनी जब देश आर्थिक परेशानियों और यूक्रेन की ओर से किए जा रहे लंबी दूरी के ड्रोन हमलों का भी सामना कर रहा है। शुरुआती नतीजों के मुताबिक यूनाइटेड रशिया को ड्यूमा की 450 में से 347 से 355 सीटें मिल सकती हैं। पार्टी को पार्टियों के आधार पर तय होने वाली 225 सीटों के लिए हुए मतदान में करीब 58 फीसदी वोट मिले। इसके अलावा पार्टी ने 208 एकल-सीट वाले चुनाव क्षेत्रों में भी जीत हासिल की, जिनसे सदन की बाकी आधी सीटें भरी जाती हैं।

क्रेमलिन समर्थक दलों को भी मिलेंगी ज्यादातर बाकी सीटें
ड्यूमा की बची हुई सीटों में से ज्यादातर पर उन छोटी पार्टियों के उम्मीदवार पहुंचने वाले हैं, जिन्हें रूस की 'सिस्टमिक विपक्ष' वाली पार्टियां कहा जाता है। ये दल संसद में क्रेमलिन के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम तौर पर एक ही रुख अपनाते हैं। कुछ ही सीटें ऐसे उम्मीदवारों के खाते में जाने की उम्मीद है, जिन्होंने किसी पार्टी के टिकट के बिना चुनाव लड़ा। इस तरह शुरुआती नतीजों में भी संसद में क्रेमलिन समर्थक राजनीतिक ताकतों का दबदबा बरकरार रहने के संकेत मिले।


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युद्ध की आलोचना करने वाली याब्लोको भी चुनाव से बाहर
रूस की उदारवादी याब्लोको पार्टी एकमात्र पंजीकृत राजनीतिक संगठन थी, जिसने सार्वजनिक तौर पर युद्ध की आलोचना करने की हिम्मत दिखाई थी। पिछले महीने रूस के सुप्रीम कोर्ट ने उसे चुनाव में उतरने से रोक दिया था। पार्टी ने इसके बावजूद एकल-सीट वाले चुनाव क्षेत्रों में कुछ दर्जन उम्मीदवार उतारे थे। शुरुआती नतीजों से संकेत मिला कि याब्लोको का कोई भी उम्मीदवार सीट जीतने में सफल नहीं हुआ।
  

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