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धर्म और राष्ट्रवाद का मेल: यूक्रेन से जारी जंग के बीच मैदान में मध्यकालीन संतों के अवशेष भेज रहा रूस

Sun, 27 Sep 2026 06:57 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 27 Sep 2026 06:57 AM IST
सार

रूस ने यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर सैनिकों का मनोबल बढ़ाने और युद्ध को धार्मिक मान्यता देने के उद्देश्य से मध्यकालीन रूसी योद्धा-संतों के पवित्र अवशेष भेजे हैं। इनमें 14वीं सदी के राजकुमार और संत दमित्री दोनस्कोय के दाहिने हाथ की हड्डी का हिस्सा तथा राजकुमार अलेक्जेंडर नेवस्की के अवशेष शामिल हैं।

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Intersection of Religion and Nationalism Ongoing War in Ukraine Russia Sends Relics Medieval Saints Frontlines
युद्धभूमि में पहुंचा योद्धा संत का ‘पवित्र अवशेष’ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यूक्रेन के अग्रिम मोर्चों पर भीषण युद्ध और कड़ाके की ठंड के बीच एक असामान्य कदम उठाते हुए रूस अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए आध्यात्मिक सहायता भेज रहा है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने हाल में युद्ध को धार्मिक मान्यता देने के लिए 14 वीं सदी के योद्धा राजकुमार और संत दमित्री दोनस्कोय के पवित्र अवशेष युद्ध क्षेत्र में भेजा है। 

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यह सोची-समझी रणनीति का हिस्सा
राजकुमार दोनस्कोय को रूस में एक महान योद्धा और संत का दर्जा हासिल है। हाल में क्रेमलिन स्थित आर्कजेल कैथेड्रल में मरम्मत कार्य के दौरान उनके अवशेष मिले थे। विशेषज्ञों का मानना है कि पवित्र अवशेषों को युद्ध के मैदान में भेजना केवल धार्मिक आस्था का मामला नहीं है, बल्कि पुतिन सरकार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राष्ट्रपति पुतिन और चर्च प्रमुख पैट्रियार्क किरिल इस खोज को ईश्वर का संकेत बता रहे।
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योद्धा संत करेंगे देश की रक्षा
अब तक दो मध्यकालीन अवशेष मोर्चे पर भेजे जा चुके हैं। इससे क्रेमलिन यह संदेश देना चाहता है कि वे भी अपने पूर्वजों की तरह देश की रक्षा कर रहे हैं।

राजकुमार दमित्री दोनस्कोय
14वीं सदी के प्रसिद्ध योद्धा राजकुमार 1380 में कुलिकोवो युद्ध में मंगोलों के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उनके दाहिने हाथ की हड्डी का एक हिस्सा जंग के मोर्चे पर भेजा गया है।
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राजकुमार अलेक्जेंडर नेवस्की
13वीं सदी के इस रूसी शासक को 1240 के जर्मन आक्रांताओं को हराने के लिए सैन्य गौरव का प्रतीक माना जाता है। इसी साल उनके अवशेष मोर्चे पर ले जाए गए थे।

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