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नेपाल में भारी बारिश का अलर्ट: फिर से बाढ़ आने की आशंका ने डराया, कई राजमार्गों पर प्रतिबंधित की गई यात्रा
Fri, 25 Sep 2026 03:02 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, काठमांडो
पीटीआई, काठमांडो
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 25 Sep 2026 03:02 PM IST
सार
नेपाल में भारी बारिश ने 26 अगस्त की भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित इलाकों में पुनर्बहाली के काम को मुश्किल बना दिया है। मौसम विभाग ने शुक्रवार से रविवार तक कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। गांडकी और लुंबिनी के कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश का अनुमान है।
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नेपाल में फिर बाढ़ की आशंका
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नेपाल में बड़े हिस्से में हो रही भारी बारिश ने 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्बहाली के प्रयासों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अधिकारियों ने भूस्खलन, बाढ़ और मलबे के बहाव का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है।
नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार से रविवार के बीच देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। गांडकी और लुंबिनी प्रांतों के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण मौसम और बाढ़ पूर्वानुमान से जुड़ी एजेंसियों के साथ मिलकर नदियों के जलस्तर और आपदा के जोखिम की निगरानी कर रहा है।
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई थी तबाही
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास से आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी का पानी नीचे के इलाकों में पहुंचा और घरों, वाहनों, सड़कों तथा पुलों को बहा ले गया। बाढ़ से जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।
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इस आपदा में 1,450 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 5,600 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा बारिश 26 अगस्त की बाढ़ की पुनरावृत्ति नहीं है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भूस्खलन, बाढ़, मलबे के बहाव और सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढांचे में आगे नुकसान का खतरा जताया है।
पहले से क्षतिग्रस्त इलाकों में ज्यादा खतरा
अगस्त की आपदा में जिन इलाकों की सड़कें, नदी किनारे और अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए थे, वहां मौजूदा बारिश के कारण जोखिम अधिक बताया जा रहा है। ताजा बारिश के कारण अगस्त की बाढ़ से प्रभावित कम से कम दो जिलों में फिर से भूस्खलन हुआ है।
धाड़िंग जिले में भूस्खलन से पृथ्वी राजमार्ग पर सात स्थान प्रभावित हुए हैं। पुलिस के अनुसार, कृष्णभीर और तिग्रांग खोला में सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है। पांच अन्य स्थानों पर यातायात को एक लेन तक सीमित कर दिया गया है। लगातार बारिश और बार-बार हो रहे भूस्खलन के कारण मलबा हटाने का काम भी प्रभावित हो रहा है।
अगस्त में 18 दिन बंद रहा था पृथ्वी राजमार्ग
पृथ्वी राजमार्ग अगस्त की बाढ़ के बाद 18 दिनों तक बंद रहने के बाद हाल ही में फिर से खोला गया था। बाढ़ में कृष्णभीर के पास राजमार्ग के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। सड़क संपर्क बहाल करने के लिए 17 सितंबर को वहां एक नया ट्रैक खोला गया था।
पड़ोसी चितवन जिले में भी पृथ्वी राजमार्ग और नारायणगढ़-मुगलिन सड़क को भूस्खलन तथा लगातार बारिश के बीच आगे घटनाएं होने के खतरे के कारण बंद कर दिया गया है। द काठमांडू पोस्ट ने यह जानकारी दी है।
बारिश के चलते यात्रा पर प्रतिबंध
मौसम की ताजा स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने कुछ प्रमुख राजमार्गों पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए हैं और अन्य एहतियाती कदम उठाए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और भारी बारिश के दौरान नदियों तथा जलधाराओं के आसपास संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है।
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नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार से रविवार के बीच देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। गांडकी और लुंबिनी प्रांतों के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण मौसम और बाढ़ पूर्वानुमान से जुड़ी एजेंसियों के साथ मिलकर नदियों के जलस्तर और आपदा के जोखिम की निगरानी कर रहा है।
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26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई थी तबाही
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास से आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी का पानी नीचे के इलाकों में पहुंचा और घरों, वाहनों, सड़कों तथा पुलों को बहा ले गया। बाढ़ से जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।
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इस आपदा में 1,450 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 5,600 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा बारिश 26 अगस्त की बाढ़ की पुनरावृत्ति नहीं है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भूस्खलन, बाढ़, मलबे के बहाव और सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढांचे में आगे नुकसान का खतरा जताया है।
पहले से क्षतिग्रस्त इलाकों में ज्यादा खतरा
अगस्त की आपदा में जिन इलाकों की सड़कें, नदी किनारे और अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए थे, वहां मौजूदा बारिश के कारण जोखिम अधिक बताया जा रहा है। ताजा बारिश के कारण अगस्त की बाढ़ से प्रभावित कम से कम दो जिलों में फिर से भूस्खलन हुआ है।
धाड़िंग जिले में भूस्खलन से पृथ्वी राजमार्ग पर सात स्थान प्रभावित हुए हैं। पुलिस के अनुसार, कृष्णभीर और तिग्रांग खोला में सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है। पांच अन्य स्थानों पर यातायात को एक लेन तक सीमित कर दिया गया है। लगातार बारिश और बार-बार हो रहे भूस्खलन के कारण मलबा हटाने का काम भी प्रभावित हो रहा है।
अगस्त में 18 दिन बंद रहा था पृथ्वी राजमार्ग
पृथ्वी राजमार्ग अगस्त की बाढ़ के बाद 18 दिनों तक बंद रहने के बाद हाल ही में फिर से खोला गया था। बाढ़ में कृष्णभीर के पास राजमार्ग के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। सड़क संपर्क बहाल करने के लिए 17 सितंबर को वहां एक नया ट्रैक खोला गया था।
पड़ोसी चितवन जिले में भी पृथ्वी राजमार्ग और नारायणगढ़-मुगलिन सड़क को भूस्खलन तथा लगातार बारिश के बीच आगे घटनाएं होने के खतरे के कारण बंद कर दिया गया है। द काठमांडू पोस्ट ने यह जानकारी दी है।
बारिश के चलते यात्रा पर प्रतिबंध
मौसम की ताजा स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने कुछ प्रमुख राजमार्गों पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए हैं और अन्य एहतियाती कदम उठाए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और भारी बारिश के दौरान नदियों तथा जलधाराओं के आसपास संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है।