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ग्वादर बंदरगाह से चीन का मोहभंग: सुरक्षा और भारी खर्च ने बढ़ाईं मुश्किलें, क्या ड्रैगन समेटेगा बोरिया-बस्तर?

Sat, 26 Sep 2026 07:13 PM IST
राकेश कुमार आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 26 Sep 2026 07:13 PM IST
सार

ग्वादर बंदरगाह चीन के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना रहा है, लेकिन सुरक्षा जोखिम और भारी लागत इसकी राह में बड़ी बाधा बन रहे हैं। शिनजियांग से ग्वादर तक का कठिन और असुरक्षित रास्ता भी माल ढुलाई को चुनौती देता है। लोवी इंस्टीट्यूट ने अनुमान जताया है कि चीन अपनी मौजूदगी घटाकर बंदरगाह की भूमिका सीमित कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य में ग्वादर बड़े व्यापारिक बंदरगाह के बजाय सीमित सैन्य-नौसैनिक उपयोग वाले केंद्र में बदल सकता है।
 

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china may retreat from gwadar port due to security risks and rising costs
ग्वादर बंदरगाह को लेकर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। इसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) की भी बड़ी परियोजनाओं में गिना जाता है। लेकिन अब इसी बंदरगाह की आर्थिक और सुरक्षा स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के नीति शोध संस्थान लोवी इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्वादर बंदरगाह को चलाने में बढ़ती लागत और लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना चीन को पड़ रहा है। रिपोर्ट में आशंका जताई है कि आगे चलकर चीन इस बंदरगाह से पीछे हट सकता है।
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चीन के लिए ग्वादर तक माल पहुंचाना इतना मुश्किल क्यों?
ग्वादर तक पहुंचने वाला माल चीन के शिनजियांग से निकलकर गिलगित-बाल्टिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान से होकर गुजरता है। इन इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा, तालिबान की गतिविधियां और लंबे समय से चले आ रहे स्थानीय विद्रोह सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं। इसके अलावा माल को काराकोरम हाईवे से भी गुजरना पड़ता है, जिसकी ऊंचाई कई जगह 4,600 मीटर से ज्यादा है। इस रास्ते पर भूस्खलन, हिमस्खलन और खराब मौसम जैसी स्थितियां बड़े पैमाने पर कंटेनर यातायात को मुश्किल बनाती हैं।
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चीन के सामने चुनौती क्या?
  • शिनजियांग से ग्वादर तक माल को कई ऐसे इलाकों से गुजरना पड़ता है जहां सुरक्षा जोखिम लगातार बने हुए हैं। काराकोरम हाईवे की 4,600 मीटर से ज्यादा ऊंचाई और खराब मौसम बड़े पैमाने पर माल ढुलाई में बाधा बनते हैं।
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  • ग्वादर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में है, जहां अलगाववादी और विद्रोही गतिविधियां चीन की परियोजनाओं के लिए चुनौती हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए सीपीईसी को क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के कथित दोहन के औजार के रूप में देखती है।
  • चीनी इंजीनियरिंग टीम, काफिले और बुनियादी ढांचे को आत्मघाती हमलों और गुरिल्ला हमलों का निशाना बनाया गया है। चीन ने मलक्का जलडमरूमध्य से बचने के लिए ग्वादर को समुद्री वैकल्पिक रास्ते के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई थी।
  • इन चुनौतियों के बीच पाकिस्तान ने चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा डिविजन बनाए, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

ग्वादर में चीनी परियोजनाओं पर हो रहे हमले? 
ग्वादर में सक्रिय विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने चीनी परियोजनाओं को निशाना बनाने की अपनी रणनीति को काफी आक्रामक किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीएलए की विशेष इकाई मजीद ब्रिगेड पहले कम तीव्रता वाले गुरिल्ला हमलों तक सीमित थी, लेकिन बाद में उसने ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले आत्मघाती हमले शुरू किए। खास तौर पर चीनी नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए कई हमलों के बाद पाकिस्तान को चीनी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए अलग स्पेशल सिक्योरिटी डिविजन (एसएसडी) तैयार करने पड़े। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सुरक्षा इंतजाम भी चीनी ढांचे को पूरी तरह सुरक्षित रखने में सफल नहीं रहे हैं।


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क्या सचमुच ग्वादर से निकलने की तैयारी कर रहा चीन?
लोवी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि चीन धीरे-धीरे ग्वादर में अपनी परिचालन मौजूदगी कम कर सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि जिस ग्वादर को कभी बड़े वाणिज्यिक मेगा-पोर्ट के तौर पर विकसित करने की योजना थी, वह भविष्य में सीमित भूमिका वाला और भारी सुरक्षा वाले नौसैनिक ईंधन केंद्र जैसा बन जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन आगे चलकर ग्वादर का लीज समझौता भी पूरी तरह से नए सिरे से तय कर सकता है, ताकि अपने नुकसान को सीमित किया जा सके। हालांकि, यह रिपोर्ट का पूर्वानुमान है, चीन की ओर से बंदरगाह छोड़ने की घोषणा नहीं।
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