नागौर जिले में पुलिस अधीक्षक के रिक्त पद पर स्थायी रूप से आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
रोशन मीणा के तबादले के बाद से रिक्त है एसपी का पद
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि नागौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा, आईपीएस का 19 मई 2026 को तबादला होने के बाद से जिले में एसपी का पद रिक्त है। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को एसपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। याचिका में आगामी चुनावों को देखते हुए नागौर में स्थायी रूप से उपयुक्त आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गई है।
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का दिया हवाला
याचिका के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने 21 जुलाई को स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक चुनाव कराने के लिए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था। इसके बाद 21 अगस्त को महत्वपूर्ण रिक्त पदों को भरने को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन निर्देशों के बावजूद नागौर में एसपी का पद अब तक रिक्त है और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को एसपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है।
चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन को लेकर जताई आशंका
याचिका में आशंका जताई गई है कि आगामी चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और प्रभावी कानून-व्यवस्था को लेकर स्थिति प्रभावित हो सकती है। याचिकाकर्ता के अनुसार, चुनाव से पहले नागौर में पूर्णकालिक और उपयुक्त आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति आवश्यक है।
हाईकोर्ट से स्थायी नियुक्ति के निर्देश की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों को नागौर में एसपी के रिक्त पद पर स्थायी नियुक्ति के संबंध में आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। फिलहाल कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने पैरवी की।