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Nainital News: नैनीताल पालिका का 176 साल का ऐतिहासिक खजाना खतरे में
Tue, 13 Oct 2026 12:11 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:11 AM IST
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नैनीताल। कभी इतिहास के अहम पन्नों को सहेजने वाले दस्तावेज आज खुद अपने संरक्षण की राह देख रहे हैं। वर्ष 1850 से अब तक के महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की नगर पालिका परिषद की कोशिश दो बार निविदा प्रक्रिया के बावजूद परवान नहीं चढ़ सकी। ऐतिहासिक दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ एजेंसी नहीं मिलने से इनके नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। अब पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने शासन को पत्र भेजकर विशेषज्ञ एजेंसी उपलब्ध कराने की मांग की है।
नगर पालिका परिषद नैनीताल राज्य की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक नगर पालिकाओं में शामिल है। पालिका के पास वर्ष 1850 से लेकर वर्तमान समय तक के महत्वपूर्ण अभिलेख मौजूद हैं। इन दस्तावेजों में शहर के प्रशासनिक इतिहास और नगर पालिका की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज हैं। ऐसे में इनका महत्व केवल पालिका तक सीमित नहीं, बल्कि नैनीताल के ऐतिहासिक दस्तावेजी विरासत के लिहाज से भी अहम है। समय के साथ उचित देखरेख के अभाव में इनमें से कई अभिलेख जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। इसी खतरे को देखते हुए नगर पालिका ने अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। लेकिन दो बार निविदा प्रक्रिया अपनाने के बावजूद कोई एजेंसी सामने नहीं आई। नतीजतन, अभिलेखों के संरक्षण की योजना आगे नहीं बढ़ सकी। बताया जा रहा है कि कार्य की जटिलता और स्थानीय स्तर पर तकनीकी अनुभव की कमी के कारण इस काम के लिए उपयुक्त संस्था नहीं मिल पाई। अब पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने इस मामले में शासन से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने शासन को पत्र भेजकर विशेषज्ञ एजेंसी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण का काम आगे बढ़ सके।
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नगर पालिका परिषद नैनीताल राज्य की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक नगर पालिकाओं में शामिल है। पालिका के पास वर्ष 1850 से लेकर वर्तमान समय तक के महत्वपूर्ण अभिलेख मौजूद हैं। इन दस्तावेजों में शहर के प्रशासनिक इतिहास और नगर पालिका की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज हैं। ऐसे में इनका महत्व केवल पालिका तक सीमित नहीं, बल्कि नैनीताल के ऐतिहासिक दस्तावेजी विरासत के लिहाज से भी अहम है। समय के साथ उचित देखरेख के अभाव में इनमें से कई अभिलेख जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। इसी खतरे को देखते हुए नगर पालिका ने अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। लेकिन दो बार निविदा प्रक्रिया अपनाने के बावजूद कोई एजेंसी सामने नहीं आई। नतीजतन, अभिलेखों के संरक्षण की योजना आगे नहीं बढ़ सकी। बताया जा रहा है कि कार्य की जटिलता और स्थानीय स्तर पर तकनीकी अनुभव की कमी के कारण इस काम के लिए उपयुक्त संस्था नहीं मिल पाई। अब पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने इस मामले में शासन से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने शासन को पत्र भेजकर विशेषज्ञ एजेंसी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण का काम आगे बढ़ सके।
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