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भरत मिलाप: 84 कदम दूर जमीन पर लेटे भरत-शत्रुध्न की ओर दौड़े राम और लक्ष्मण, तीन लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

Thu, 22 Oct 2026 04:42 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 22 Oct 2026 04:42 PM IST
सार

वाराणसी के नाटी इमली में चारों भाइयों का महामिलन देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। काशी की यह ऐतिहासिक लीला 483 वर्ष पुरानी है। इसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं। 

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भरत मिलाप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भरत मिलाप में पहुंचे 3 लाख भक्तों के बीच यदुवंशियों में पुष्पक विमान खींचने की होड़ लगी रही। विमान देख जय श्री राम के जयघोष होने लगे। यदुवंशियों ने हाथ लगाकर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता जानकी चित्रकूट मैदान (धूपचंडी) से शाम 4:10 बजे अयोध्या रूपी नाटी इमली भरत मिलाप मैदान पर पहुंचाया। तीन हाथियों पर सवार होकर काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह 4:25 बजे अपने दोनों बेटों के साथ मैदान में पहुंचे।

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अयोध्या (बड़ागणेश) से भरत और शत्रुघ्न अयोध्यावासियों के साथ 4:35 बजे मैदान पर आ गए और भरत मिलाप की लीला 4:40 बजे शुरू हो गई। पांच मिनट तक पुष्पवर्षा के साथ जय श्री राम के जयकारे लगे। इसी के साथ रघुनंदन के वंदन को नभलोक से सूर्यदेव और धरालोक से अनंत आस्था बरसी। नाटी इमली मैदान में भरत मिलाप की लीला जीवंत हो उठी। डमरुओं की निनाद बिना रुके चलती रही।
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भरत मिलाप - फोटो : अमर उजाला
लीला स्थल के पश्चिम में विमान पर विराजमान प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण, पूरब में सिंहासन पर भरत और शत्रुघ्न थे। जब विमान से उतर कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण 84 कदम दूर भूमि पर लेटे भरत और शत्रुघ्न की ओर दौड़े, वहां पहुंचकर उन्हें भूमि से उठाकर गले लगाए। रामचंद्र, लक्ष्मण और मां सीता 14 वर्ष वनवास के बाद जब पुष्पक विमान से वापस अयोध्या लौटे तो भरत प्रभु को देखकर भूमि पर लेट जाते हैं और उनके आखों से सागर रूपी करुण कुंदन बहने लगता है।
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भरत मिलाप - फोटो : अमर उजाला
दी गई सोने की गिन्नी
श्री चित्रकूट रामलीला समिति की 484वीं भरत मिलाप लीला समिति के सह व्यवस्थापक पं. अभिनव उपाध्याय को सोने की गिन्नी दी गई और तुलसीदल का प्रसाद लिया। व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि रामभक्त मेघा भगत को प्रभु के दर्शन सपने में हुए थे। इसके बाद ही रामलीला और भरत मिलाप की लीला होने लगी। ऐसी मान्यता है कि आज भी भरत मिलाप के दौरान कुछ पल के लिए प्रभु श्रीराम के दर्शन होते हैं।
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