भरत मिलाप: 84 कदम दूर जमीन पर लेटे भरत-शत्रुध्न की ओर दौड़े राम और लक्ष्मण, तीन लाख से ज्यादा लोग पहुंचे
वाराणसी के नाटी इमली में चारों भाइयों का महामिलन देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। काशी की यह ऐतिहासिक लीला 483 वर्ष पुरानी है। इसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं।
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भरत मिलाप में पहुंचे 3 लाख भक्तों के बीच यदुवंशियों में पुष्पक विमान खींचने की होड़ लगी रही। विमान देख जय श्री राम के जयघोष होने लगे। यदुवंशियों ने हाथ लगाकर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता जानकी चित्रकूट मैदान (धूपचंडी) से शाम 4:10 बजे अयोध्या रूपी नाटी इमली भरत मिलाप मैदान पर पहुंचाया। तीन हाथियों पर सवार होकर काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह 4:25 बजे अपने दोनों बेटों के साथ मैदान में पहुंचे।
अयोध्या (बड़ागणेश) से भरत और शत्रुघ्न अयोध्यावासियों के साथ 4:35 बजे मैदान पर आ गए और भरत मिलाप की लीला 4:40 बजे शुरू हो गई। पांच मिनट तक पुष्पवर्षा के साथ जय श्री राम के जयकारे लगे। इसी के साथ रघुनंदन के वंदन को नभलोक से सूर्यदेव और धरालोक से अनंत आस्था बरसी। नाटी इमली मैदान में भरत मिलाप की लीला जीवंत हो उठी। डमरुओं की निनाद बिना रुके चलती रही।
श्री चित्रकूट रामलीला समिति की 484वीं भरत मिलाप लीला समिति के सह व्यवस्थापक पं. अभिनव उपाध्याय को सोने की गिन्नी दी गई और तुलसीदल का प्रसाद लिया। व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि रामभक्त मेघा भगत को प्रभु के दर्शन सपने में हुए थे। इसके बाद ही रामलीला और भरत मिलाप की लीला होने लगी। ऐसी मान्यता है कि आज भी भरत मिलाप के दौरान कुछ पल के लिए प्रभु श्रीराम के दर्शन होते हैं।
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