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Shahjahanpur News: गर्रा और खन्नौत नदियां उफनाईं, बस्तियों में पहुंचने लगा पानी
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रविवार को मोहल्ला सुभाषनगर की गली में बाढ़ का पानी। संवाद
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शाहजहांपुर। गर्रा और खन्नौत नदियों के उफान ने तेजी पकड़ ली है। जलस्तर लगातार बढ़ने से बस्तियों में पानी पहुंचने लगा है। जिसके चलते लोगों ने शरणालयों की ओर रुख किया है। तटीवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने लगे हैं। आसपास की कॉलोनियों के लोगों ने सामान समेटना शुरू कर दिया है। रविवार सुबह गर्रा नदी में 12988 क्यूसेक पानी दियूनी बैराज से और छोड़ा गया है। इससे गर्रा का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है।
गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से सुभाषनगर कॉलोनी की गलियां जलमग्न हैं। लोग घरेलू सामान दूसरी मंजिल पर पहुंचाने लगे हैं। गर्रा नदी के विकराल रूप लेने से नए नगर निगम कार्यालय की चहारदीवार से पानी टकराने लगा है। इससे दीवार ढहने का खतरा बढ़ गया है। दीवार को नुकसान पहुंचता है तो नगर निगम कार्यालय परिसर तक पानी पहुंच जाएगा।
दूसरी ओर मोहल्ला अब्दुल्लागंज में भी निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष बाढ़ की वजह से दुश्वारियां सहन करना पड़ती हैं। अब तक प्रशासन ने मोहल्ले के लोगों की सुध नहीं ली है।
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लोधीपुर में बस्ती में पानी घुसा
लोधीपुर में खन्नौत नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों में बने मकान बाढ़ से घिर गए हैं। इसके चलते लोग नया ठिकाना तलाश कर रहे हैं। नदी से कुछ दूरी पर एनटीआई स्कूल में शरणालय बनाया जा रहा है। पक्का पुल स्थित छोटी बिसरात के पास नदी किनारे घरों में भी पानी घुस गया है। यहां से पांच परिवार विस्थापित होकर पास में बने शरणालय में पहुंच गए हैं। प्रशासन की ओर से यहां पर खाने-पीने की व्यवस्था नहीं की गई है। क्षेत्र के ही कुछ लोग मदद कर रहे हैं।
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वर्तमान में नदियों का जलस्तर (मीटरगेज में)
नदी खतरे का निशान वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान से नीचे
गर्रा 148.800 147.75 0.95
खन्नौत 145.705 144.65 1.00
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पांच-पांच सेमी घटा पानी
सिंचाई विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, गर्रा और खन्नौत नदी का जलस्तर रविवार की सुबह के अपेक्षा शाम को पांच-पांच सेमी कम हो गया। गर्रा नदी में दियूनी बैराज से रविवार सुबह 12988 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि शाम को 11256 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी लगभग तीन दिन में जनपद में प्रवेश कर जाएगा। इससे गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।
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गर्रा नदी का जलस्तर कम हुआ है, खन्नौत नदी का जलस्तर मामूली रूप से बढ़ा है। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए शरणालय तैयार किए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर अस्थायी शरणालय बना दिए गए हैं।
- अरविंद कुमार, एडीएम एफआर, नोडल अधिकारी बाढ़
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खिरिया-गौहनिया संपर्क मार्ग कटा, तटीय गांवों के पास भरा पानी
तिलहर/खुदागंज। गर्रा (देवहा) नदी में रविवार को पानी कुछ कम होने के बावजूद तहसील के करीब एक दर्जन से ज्यादा गांवों में बाढ़ की स्थिति जस की तस बनी रही। गांवों से पानी निकलने लगा है, लेकिन उनके आसपास के इलाकों और फसलों समेत सैकड़ों बीघा खेत डूबे हुए हैं। खुदागंज क्षेत्र में खिरिया-गौहनिया संपर्क मार्ग बाढ़ से कट जाने से अब पैदल चलने लायक भी नहीं रह गया है। कई अन्य गांवों के संपर्क मार्ग भी अभी डूबे होने से वहां के लोगों को दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
गर्रा में उफान बढ़ने से शनिवार को चिती बोझी, घनश्यामपुर, जिकड़ीपुर, बरहा मोहब्बतपुर, आजमाबाद आदि कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया और लोगों ने संभावित नुकसान की आशंका में सुरक्षित ठिकाने तलाश करने शुरू कर दिए थे। रविवार सुबह से पानी घटने के साथ गांवों तक पहुंची बाढ़ धीरे-धीरे सिमटने लगी, लेकिन अब ग्रामीणों को फिर से भूमि कटान होने की चिंता सताने लगी है। खिरिया-गौहनिया संपर्क मार्ग से पानी उतर गया है, लेकिन रास्ते के 50 मीटर दायरे में आधा से ज्यादा मार्ग बाढ़ से कट गया है और बाकी हिस्से में कीचड़ से दलदल हो गया है।
खास यह है कि पहले इसी रास्ते से होकर मझिला, गौहनिया, खिरिया, दतुनिया, रहीमपुर, नवादा तालुका हरदेनी, गौरी खेड़ा आदि गांवों के लोग आवाजाही करते थे। जब से खिरिया गांव के पास पुल निर्मित हुआ, तब से इन गांवों के लोग खुदागंज से रामेश्वर गंज गौंटिया होते हुए निकलते हैं। मार्ग खराब हो जाने से तमाम लोग कहीं आने-जाने के लिए तरस रहे हैं।
होशीपुर, कुआं डांडा, खंजन, उत्तमपुर, रामपुर जयचंद आदि गांवों के रास्तों पर भी पानी कम हुआ, लेकिन फसलों समेत सैकड़ों बीघा जमीन अभी डूबी है और लगातार बारिश से फसलें खराब होने की आशंका बढ़ गई है। राजस्व कर्मी कटान रोकने के लिए मिट्टी से भरे बोरे लगाने में जुटे हैं।
तिलहर के एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि गर्रा नदी में पानी कुछ कम होने से बाढ़ प्रभावित गांवों में स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि कटान रोकने के लिए जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। संवाद
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चौहनापुर उपकेंद्र से जुड़े 72 गांवों पर बिजली का संकट
कुर्रियाकलां। गर्रा नदी की बाढ़ से चौहनापुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 72 गांवों में बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा है। उपकेंद्र की 33 केवीए मुख्य इनकमिंग लाइन हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के आगमपुर स्थित 132 केवीए उपकेंद्र से आती है। पिपरिया पुल के पास यह लाइन गर्रा नदी से होकर गुजरती है। वर्तमान में गर्रा का पानी एचटी लाइन के खंभों के नजदीक बढ़ रहा है। गत वर्ष वहां खंभों के आसपास पानी भरने पर आगमपुर उपकेंद्र से यह लाइन बंद कर दी गई थी और अब फिर से वही हालात बन रहे हैं। संवाद
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जलालाबाद से अल्हागंज तक रामगंगा में उफान से तमाम गांवों पर मंडराया खतरा
जलालाबाद। रामगंगा और बहगुल नदियों में शनिवार से लगातार उफान बढ़ने से भूमि कटान की रफ्तार कुछ कम हुई है, लेकिन नदियों के फैलाव लेने से कई तटीय गांवों के खेतों में पानी भरने लगा है। भूमि कटान से परेशान किसानों को एक बार फिर फसलों के बर्बाद होने की आशंका सताने लगी है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि रविवार को सुबह अल्हागंज क्षेत्र के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर 15 सेमी बढ़कर 137.24 मीटरगेज हो गया। वहां रामगंगा खतरे के निशान से सिर्फ छह सेमी नीचे रह गई है। नदियों में उफान बढ़ने से बाढ़ के अब कसारी, रामपुर, तिकोला आदि गांवों की आबादी की ओर तेजी से बढ़ते देख वहां के लोगों को जान-माल की चिंता सताने लगी है। कसारी गांव के राधे, पातीराम, सरनाम और रामपुर गांव के नरसिंह, संतोष आदि ने बताया कि बीते दस दिन में कटान से काफी जमीन नदी में चली गई। पानी बढ़ने की रफ्तार इसी तरह से जारी रही तो बाकी बचे खेत भी फसल समेत बह जाएंगे।
अल्हांगज के भरतौली गांव में कटान में कमी आई है, लेकिन नदी गांव के मुहाने पर आ चुकी है। वहां के घरों का बाढ़ से फासला घटकर सिर्फ पांच फुट रह गया है। रामगंगा के किनारे बसे मिर्जापुर क्षेत्र के गांव कीलापुर निवासी रामवीर, अमर सिंह, प्रतिपाल आदि ने बताया कि खेतों में तुलसा, बाजरा, ज्वार, तिल आदि फसलें जलमग्न हो गई हैं।
इस बीच, रविवार को दोपहर विधायक हरिप्रकाश वर्मा ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ कसारी, रामपुर और तिकोला जाकर हालात का जायजा लिया और इन गांवों में कटान को रोकने के उपाय जल्द करने के लिए कहा। विधायक ने बताया कि शासन के निर्देश पर भरतौली और मिर्जापुर क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में कटान कर रही नदी की धारा मोड़ने के लिए सिंचाई विभाग की कानपुर से विशेष टीम जल्द ही यहां पहुंचेगी।
हालांकि, यह काम नदी का जलस्तर स्थिर होने पर ही शुरू हो सकेगा। इस दौरान सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर के अलावा क्षेत्रीय अवर अभियंता मौजूद रहे। संवाद
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गंगा में उफान बढ़ने से शमसाबाद हाईवे पर थम गया यातायात
कलान/मिर्जापुर। गंगा में उफान बढ़ने के साथ तहसील क्षेत्र में बाढ़ फिर से विकराल रूप लेने लगी है। जलालाबाद-शमसाबाद हाईवे पर चौरा गांव के पास करीब 100 मीटर के दायरे में दो फुट तक पानी आ जाने से यातायात थम गया है। गंगा के किनारे बसे कई गांवों के संपर्क मार्ग डूब जाने से वहां के लोग बेहद परेशान हैं। बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को रविवार सुबह प्राप्त सूचना के अनुसार, कलान के भैंसार बांंध पर गंगा का जलस्तर बीते 24 घंटे में 55 सेमी बढ़कर 143.30 मीटरगेज हो गया और वह खतरे के निशान से सिर्फ 30 सेमी नीचे रह गई है। जलस्तर बढ़ने का सीधा असर बाढ़ के रूप में दिखने लगा है।
शमसाबाद हाईवे पर पानी का बहाव तेज हो जाने से दोपहिया और चार पहिया वाहनों की आवाजाही रुक गई है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर टैक्टर ट्राॅलियों से आवाजाही कर रहे हैं। हाईवे पर यातायात बंद हो जाने से कई गांवों का तहसील और ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क कट गया है। पानी अब निचले इलाकों के खेतों से होकर तटीय गांवों की आबादी की ओर बढ़ रही है।
मानसून सीजन में तीसरी बार बाढ़ से वह खेत फिर से डूब गए, जिनमें भरा पानी निकल चुका था। फसलें डूब जाने से किसान बेहद परेशान हैं और पशुओं के लिए चारा का संकट गहराने लगा है।
शमसाबाद हाईवे से दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले नगला बसोला व पैलानी उत्तरी संपर्क मार्ग पर पानी भर जाने से ग्रामीण घरों में कैद होकर रह गए हैं। गंगा के तटवर्ती इस्लामनगर, आजादनगर, मस्जिदनगला आदि गांवों के चारों ओर पानी पहुंच चुका है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने की दशा में यह सभी गांव टापू बन जाएंगे। हालांकि, प्रशासन बाढ़ की स्थिति को गंभीर नहीं मान रहा है। तहसीलदार अजहर अंसारी के अनुसार गंगा का जलस्तर बढ़ा है, अभी तटीय गांवों के आबादी वाले क्षेत्र बाढ़ से सुरक्षित हैं। संवाद
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प्रशासन सतर्क.... जारी की एडवाइजरी
शाहजहांपुर। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने रामगंगा नदी के खतरे के निशान पर पहुंचने पर अलर्ट जारी किया है। उन्होंने तटीय, निचले और संभावित दूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों से ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार शाम चार बजे डबरी घाट पर रामगंगा नदी का जलस्तर 137.30 मीटरगेज दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान पर पहुंच गया है। इससे तहसील परशुरामपुरी और कलान के क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को 24 घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने राहत शिविरों को तत्काल सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (कंट्रोल रूम) 24 घंटे संचालित किया जा रहा है। इसके दूरभाष नंबर 05842-351037, 05842-351038, 05842-462754 पर आपातकालीन स्थिति में संपर्क कर सकते हैं।
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प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी
- तटीय इलाकों को छोड़कर लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें।
- नदी किनारे नहीं जाएं, मछली पकड़ने या सेल्फी आदि लेने से बचें
- पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं
- पीने का साफ पानी, टॉर्च, आवश्यक दवाएं, सूखे राशन को सुरक्षित स्थानों पर रखें
- अफवाहों से बचें, जिला प्रशासन की ओर से जारी सूचना पर विश्वास करें।
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गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से सुभाषनगर कॉलोनी की गलियां जलमग्न हैं। लोग घरेलू सामान दूसरी मंजिल पर पहुंचाने लगे हैं। गर्रा नदी के विकराल रूप लेने से नए नगर निगम कार्यालय की चहारदीवार से पानी टकराने लगा है। इससे दीवार ढहने का खतरा बढ़ गया है। दीवार को नुकसान पहुंचता है तो नगर निगम कार्यालय परिसर तक पानी पहुंच जाएगा।
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दूसरी ओर मोहल्ला अब्दुल्लागंज में भी निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष बाढ़ की वजह से दुश्वारियां सहन करना पड़ती हैं। अब तक प्रशासन ने मोहल्ले के लोगों की सुध नहीं ली है।
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लोधीपुर में बस्ती में पानी घुसा
लोधीपुर में खन्नौत नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों में बने मकान बाढ़ से घिर गए हैं। इसके चलते लोग नया ठिकाना तलाश कर रहे हैं। नदी से कुछ दूरी पर एनटीआई स्कूल में शरणालय बनाया जा रहा है। पक्का पुल स्थित छोटी बिसरात के पास नदी किनारे घरों में भी पानी घुस गया है। यहां से पांच परिवार विस्थापित होकर पास में बने शरणालय में पहुंच गए हैं। प्रशासन की ओर से यहां पर खाने-पीने की व्यवस्था नहीं की गई है। क्षेत्र के ही कुछ लोग मदद कर रहे हैं।
वर्तमान में नदियों का जलस्तर (मीटरगेज में)
नदी खतरे का निशान वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान से नीचे
गर्रा 148.800 147.75 0.95
खन्नौत 145.705 144.65 1.00
पांच-पांच सेमी घटा पानी
सिंचाई विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, गर्रा और खन्नौत नदी का जलस्तर रविवार की सुबह के अपेक्षा शाम को पांच-पांच सेमी कम हो गया। गर्रा नदी में दियूनी बैराज से रविवार सुबह 12988 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि शाम को 11256 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी लगभग तीन दिन में जनपद में प्रवेश कर जाएगा। इससे गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।
गर्रा नदी का जलस्तर कम हुआ है, खन्नौत नदी का जलस्तर मामूली रूप से बढ़ा है। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए शरणालय तैयार किए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर अस्थायी शरणालय बना दिए गए हैं।
- अरविंद कुमार, एडीएम एफआर, नोडल अधिकारी बाढ़
खिरिया-गौहनिया संपर्क मार्ग कटा, तटीय गांवों के पास भरा पानी
तिलहर/खुदागंज। गर्रा (देवहा) नदी में रविवार को पानी कुछ कम होने के बावजूद तहसील के करीब एक दर्जन से ज्यादा गांवों में बाढ़ की स्थिति जस की तस बनी रही। गांवों से पानी निकलने लगा है, लेकिन उनके आसपास के इलाकों और फसलों समेत सैकड़ों बीघा खेत डूबे हुए हैं। खुदागंज क्षेत्र में खिरिया-गौहनिया संपर्क मार्ग बाढ़ से कट जाने से अब पैदल चलने लायक भी नहीं रह गया है। कई अन्य गांवों के संपर्क मार्ग भी अभी डूबे होने से वहां के लोगों को दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
गर्रा में उफान बढ़ने से शनिवार को चिती बोझी, घनश्यामपुर, जिकड़ीपुर, बरहा मोहब्बतपुर, आजमाबाद आदि कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया और लोगों ने संभावित नुकसान की आशंका में सुरक्षित ठिकाने तलाश करने शुरू कर दिए थे। रविवार सुबह से पानी घटने के साथ गांवों तक पहुंची बाढ़ धीरे-धीरे सिमटने लगी, लेकिन अब ग्रामीणों को फिर से भूमि कटान होने की चिंता सताने लगी है। खिरिया-गौहनिया संपर्क मार्ग से पानी उतर गया है, लेकिन रास्ते के 50 मीटर दायरे में आधा से ज्यादा मार्ग बाढ़ से कट गया है और बाकी हिस्से में कीचड़ से दलदल हो गया है।
खास यह है कि पहले इसी रास्ते से होकर मझिला, गौहनिया, खिरिया, दतुनिया, रहीमपुर, नवादा तालुका हरदेनी, गौरी खेड़ा आदि गांवों के लोग आवाजाही करते थे। जब से खिरिया गांव के पास पुल निर्मित हुआ, तब से इन गांवों के लोग खुदागंज से रामेश्वर गंज गौंटिया होते हुए निकलते हैं। मार्ग खराब हो जाने से तमाम लोग कहीं आने-जाने के लिए तरस रहे हैं।
होशीपुर, कुआं डांडा, खंजन, उत्तमपुर, रामपुर जयचंद आदि गांवों के रास्तों पर भी पानी कम हुआ, लेकिन फसलों समेत सैकड़ों बीघा जमीन अभी डूबी है और लगातार बारिश से फसलें खराब होने की आशंका बढ़ गई है। राजस्व कर्मी कटान रोकने के लिए मिट्टी से भरे बोरे लगाने में जुटे हैं।
तिलहर के एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि गर्रा नदी में पानी कुछ कम होने से बाढ़ प्रभावित गांवों में स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि कटान रोकने के लिए जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। संवाद
चौहनापुर उपकेंद्र से जुड़े 72 गांवों पर बिजली का संकट
कुर्रियाकलां। गर्रा नदी की बाढ़ से चौहनापुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 72 गांवों में बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा है। उपकेंद्र की 33 केवीए मुख्य इनकमिंग लाइन हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के आगमपुर स्थित 132 केवीए उपकेंद्र से आती है। पिपरिया पुल के पास यह लाइन गर्रा नदी से होकर गुजरती है। वर्तमान में गर्रा का पानी एचटी लाइन के खंभों के नजदीक बढ़ रहा है। गत वर्ष वहां खंभों के आसपास पानी भरने पर आगमपुर उपकेंद्र से यह लाइन बंद कर दी गई थी और अब फिर से वही हालात बन रहे हैं। संवाद
जलालाबाद से अल्हागंज तक रामगंगा में उफान से तमाम गांवों पर मंडराया खतरा
जलालाबाद। रामगंगा और बहगुल नदियों में शनिवार से लगातार उफान बढ़ने से भूमि कटान की रफ्तार कुछ कम हुई है, लेकिन नदियों के फैलाव लेने से कई तटीय गांवों के खेतों में पानी भरने लगा है। भूमि कटान से परेशान किसानों को एक बार फिर फसलों के बर्बाद होने की आशंका सताने लगी है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि रविवार को सुबह अल्हागंज क्षेत्र के डबरी घाट पर रामगंगा का जलस्तर 15 सेमी बढ़कर 137.24 मीटरगेज हो गया। वहां रामगंगा खतरे के निशान से सिर्फ छह सेमी नीचे रह गई है। नदियों में उफान बढ़ने से बाढ़ के अब कसारी, रामपुर, तिकोला आदि गांवों की आबादी की ओर तेजी से बढ़ते देख वहां के लोगों को जान-माल की चिंता सताने लगी है। कसारी गांव के राधे, पातीराम, सरनाम और रामपुर गांव के नरसिंह, संतोष आदि ने बताया कि बीते दस दिन में कटान से काफी जमीन नदी में चली गई। पानी बढ़ने की रफ्तार इसी तरह से जारी रही तो बाकी बचे खेत भी फसल समेत बह जाएंगे।
अल्हांगज के भरतौली गांव में कटान में कमी आई है, लेकिन नदी गांव के मुहाने पर आ चुकी है। वहां के घरों का बाढ़ से फासला घटकर सिर्फ पांच फुट रह गया है। रामगंगा के किनारे बसे मिर्जापुर क्षेत्र के गांव कीलापुर निवासी रामवीर, अमर सिंह, प्रतिपाल आदि ने बताया कि खेतों में तुलसा, बाजरा, ज्वार, तिल आदि फसलें जलमग्न हो गई हैं।
इस बीच, रविवार को दोपहर विधायक हरिप्रकाश वर्मा ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ कसारी, रामपुर और तिकोला जाकर हालात का जायजा लिया और इन गांवों में कटान को रोकने के उपाय जल्द करने के लिए कहा। विधायक ने बताया कि शासन के निर्देश पर भरतौली और मिर्जापुर क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में कटान कर रही नदी की धारा मोड़ने के लिए सिंचाई विभाग की कानपुर से विशेष टीम जल्द ही यहां पहुंचेगी।
हालांकि, यह काम नदी का जलस्तर स्थिर होने पर ही शुरू हो सकेगा। इस दौरान सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर के अलावा क्षेत्रीय अवर अभियंता मौजूद रहे। संवाद
गंगा में उफान बढ़ने से शमसाबाद हाईवे पर थम गया यातायात
कलान/मिर्जापुर। गंगा में उफान बढ़ने के साथ तहसील क्षेत्र में बाढ़ फिर से विकराल रूप लेने लगी है। जलालाबाद-शमसाबाद हाईवे पर चौरा गांव के पास करीब 100 मीटर के दायरे में दो फुट तक पानी आ जाने से यातायात थम गया है। गंगा के किनारे बसे कई गांवों के संपर्क मार्ग डूब जाने से वहां के लोग बेहद परेशान हैं। बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को रविवार सुबह प्राप्त सूचना के अनुसार, कलान के भैंसार बांंध पर गंगा का जलस्तर बीते 24 घंटे में 55 सेमी बढ़कर 143.30 मीटरगेज हो गया और वह खतरे के निशान से सिर्फ 30 सेमी नीचे रह गई है। जलस्तर बढ़ने का सीधा असर बाढ़ के रूप में दिखने लगा है।
शमसाबाद हाईवे पर पानी का बहाव तेज हो जाने से दोपहिया और चार पहिया वाहनों की आवाजाही रुक गई है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर टैक्टर ट्राॅलियों से आवाजाही कर रहे हैं। हाईवे पर यातायात बंद हो जाने से कई गांवों का तहसील और ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क कट गया है। पानी अब निचले इलाकों के खेतों से होकर तटीय गांवों की आबादी की ओर बढ़ रही है।
मानसून सीजन में तीसरी बार बाढ़ से वह खेत फिर से डूब गए, जिनमें भरा पानी निकल चुका था। फसलें डूब जाने से किसान बेहद परेशान हैं और पशुओं के लिए चारा का संकट गहराने लगा है।
शमसाबाद हाईवे से दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले नगला बसोला व पैलानी उत्तरी संपर्क मार्ग पर पानी भर जाने से ग्रामीण घरों में कैद होकर रह गए हैं। गंगा के तटवर्ती इस्लामनगर, आजादनगर, मस्जिदनगला आदि गांवों के चारों ओर पानी पहुंच चुका है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने की दशा में यह सभी गांव टापू बन जाएंगे। हालांकि, प्रशासन बाढ़ की स्थिति को गंभीर नहीं मान रहा है। तहसीलदार अजहर अंसारी के अनुसार गंगा का जलस्तर बढ़ा है, अभी तटीय गांवों के आबादी वाले क्षेत्र बाढ़ से सुरक्षित हैं। संवाद
प्रशासन सतर्क.... जारी की एडवाइजरी
शाहजहांपुर। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने रामगंगा नदी के खतरे के निशान पर पहुंचने पर अलर्ट जारी किया है। उन्होंने तटीय, निचले और संभावित दूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों से ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार शाम चार बजे डबरी घाट पर रामगंगा नदी का जलस्तर 137.30 मीटरगेज दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान पर पहुंच गया है। इससे तहसील परशुरामपुरी और कलान के क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को 24 घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने राहत शिविरों को तत्काल सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (कंट्रोल रूम) 24 घंटे संचालित किया जा रहा है। इसके दूरभाष नंबर 05842-351037, 05842-351038, 05842-462754 पर आपातकालीन स्थिति में संपर्क कर सकते हैं।
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प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी
- तटीय इलाकों को छोड़कर लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें।
- नदी किनारे नहीं जाएं, मछली पकड़ने या सेल्फी आदि लेने से बचें
- पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं
- पीने का साफ पानी, टॉर्च, आवश्यक दवाएं, सूखे राशन को सुरक्षित स्थानों पर रखें
- अफवाहों से बचें, जिला प्रशासन की ओर से जारी सूचना पर विश्वास करें।

रविवार को मोहल्ला सुभाषनगर की गली में बाढ़ का पानी। संवाद

रविवार को मोहल्ला सुभाषनगर की गली में बाढ़ का पानी। संवाद

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