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यूपी: भाजपा में हर नेता का गुट, दांव पर इन सीटों की बाजी, पार्टी में बढ़ रही खेमेबंदी; तेजी से बदल रहे समीकरण

Mon, 05 Oct 2026 03:14 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 05 Oct 2026 03:14 PM IST
सार

यूपी के मुरादाबाद जिले में भाजपा में हर नेता का गुट अपना है। जिले में भाजपा की सियासत में तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि प्रदेश की राजनीति में एक बड़े नेता का प्रभाव कम होने से भी जिले में गुटबाजी बढ़ने लगी है। 

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BJP Faces Factionalism in Moradabad as Six Assembly Seats Hang in the Balance
भाजपा में बढ़ती जा रही गुटबाजी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यूपी विधानसभा चुनाव करीब आ गए हैं लेकिन जिले में भाजपा गुटबाजी से जूझ रही है। पार्टी के जनप्रतिनिधि से लेकर पदाधिकारी तक गुटों में बंटे हैं। जैसे-जैसे पार्टी के भीतर टिकट के दावेदार बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे गुटों की संख्या भी बढ़ रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कार्यक्रमों में एक नेता को बुलाओ तो दूसरा नाराज हो जाता है, जिससे कार्यकर्ता पशोपेश में फंस जाते हैं।

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यह हाल तब है जब विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों पर पार्टी की साख दांव पर है, क्योंकि पिछले चुनाव में भाजपा जनपद की छह में से महज शहर सीट ही जीत सकी थी। ऐसे में पार्टी के भीतर हर नेता का अपना गुट 2027 की चुनावी संरचना पर भारी पड़ सकता है। 
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2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिले की छह में से नगर क्षेत्र की इकलौती सीट मिली थी, वह भी मामूली अंतर से। इससे पूर्व 2017 के चुनाव में भाजपा ने नगर के साथ कांठ सीट पर भी जीत दर्ज की थी। पार्टी में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो गई है लेकिन जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे पार्टी के भीतर खेमे बढ़ते जा रहे हैं।

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महानगर की टीम सबसे ज्यादा गुटबाजी का शिकार है। यहां पार्टी के हर जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी की खेमेबंदी चर्चा में है। नगर विधायक रितेश गुप्ता, मेयर विनोद अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला, जिलाध्यक्ष आकाश पाल, एमएलसी सत्यपाल सैनी, गोपाल अंजान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के अलग-अलग खेमे हैं।

निर्वाचन क्षेत्र कुंदरकी होने से रामवीर सिंह को भले ही लोग महानगर टीम का हिस्सा न मानें लेकिन शहर में उनके दखल और सक्रियता के कारण उनके समर्थकों का एक अलग खेमा भी गिनाया जाता है। अलग-अलग गुटों की चर्चाओं के बीच नगर विधायक रितेश गुप्ता और मेयर विनोद अग्रवाल की आपसी सियासी खींचतान जगजाहिर हो चुकी है।

चर्चा है कि कुछ दिन पहले महानगर के मोर्चों के अध्यक्ष के लिए तीन-तीन नाम कमेटी के सामने रखे गए थे। इसे लेकर भी इन दोनों जनप्रतिनिधियों में सहमति नहीं बन पाई थी। हालांकि बाद में महानगर प्रभारी प्रमेंद्र जांगड़ा ने आपसी सहमति बनवाने में कामयाबी पा ली थी।

दूसरी ओर कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी किसी से नहीं छिपी है। दोनों गुट एक-दूसरे के खिलाफ कोई मौका नहीं छोड़ते। पार्टी के बड़े नेता गुटबाजी और सियासी खींचतान का कारण टिकट की दावेदारी को भी मान रहे हैं।

कहा जा रहा है कि नगर सीट पर दावेदारों की बढ़ती संख्या गुटबाजी को और बढ़ा रही है। इस सीट से रितेश गुप्ता के अलावा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रिया अग्रवाल को भी प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

चर्चाओं में रही डीएम-एसएसपी और विधायक की मौजूदगी में पार्षदों की बैठक
पिछले महीने (12 सितंबर) को पुलिस लाइन में हुई एक बैठक चर्चाओं में रही थी। इस बैठक में नगर विधायक रितेश गुप्ता के साथ नगर निगम के पार्षद शामिल हुए थे। यह बैठक निवर्तमान डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसएसपी सतपाल अंतिल की मौजूदगी में हुई थी।

इसमें पार्षदों ने अधिकारियों को वार्डों की समस्याओं से अवगत कराया था। बाद में विधायक ने बैठक की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। इस बैठक में मेयर विनोद अग्रवाल के न होने की खूब चर्चा रही।

भाजपा की सियासत में तेजी से बदल रहे समीकरण
जिले में भाजपा की सियासत में तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। पार्टी के भीतर चर्चा है कि प्रदेश की राजनीति में एक बड़े नेता का प्रभाव कम होने से भी जिले में गुटबाजी बढ़ने लगी है।

इस नेता के करीबियों को पहले प्रदेश और फिर क्षेत्रीय कार्यकारिणी से किनारे किया गया। किनारे हुए करीबियों को जिला प्रभारियों में भी जगह नहीं मिल सकी। इसी का नतीजा है कि अब हर नेता अपना गुट बनाने में जुट गया है।

कमेटियों के गठन से लेकर कार्यक्रमों तक में दिख चुकी खेमेबंदी
भाजपा में कमेटियों के गठन से लेकर कार्यक्रमों तक में खेमेबंदी दिख चुकी है। मुरादाबाद में सीएम के कार्यक्रम में क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर की उपेक्षा की गई।

वहीं, होर्डिंग पर प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव की तस्वीर को सफेद कागज से ढक दिया गया था। इसे पार्टी के भीतर की गुटबाजी से जोड़कर देखा गया था। इससे पहले जिले और महानगर कमेटियों के गठन में खुलकर गुटबाजी दिखी थी। 

पार्टी में गुटबाजी जैसी कोई बात नहीं है। जनप्रतिनिधि हों या पदाधिकारी, सभी के साथ समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है। हर मुद्दे पर सहमति बनाई जा रही है। आपसी संवाद की कमी को दूर किया जा रहा है। - प्रमेंद्र जांगड़ा, महानगर प्रभारी

प्रदेश कार्यालय पहुंचा महानगर अध्यक्ष के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा
भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला के खिलाफ करीब 26 बिंदुओं पर की गई शिकायतों का पुलिंदा प्रदेश कार्यालय पहुंच गया है। यह शिकायत महानगर के पूर्व मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने की थी। उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर महानगर अध्यक्ष पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी, संगठनात्मक गतिविधियों में निष्क्रियता और परिवारवाद जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

ये घटना भी बता रही है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सियासी खींचतान के बीच पिछले दिनों पूर्व मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने महानगर अध्यक्ष पर आरोपों की झड़ी लगा दी थी। उन्होंने महानगर कार्यकारिणी में परिवारवाद और पदाधिकारियों के चयन पर सवाल उठाए हैं।

उनका आरोप है कि बूथ, शक्ति केंद्र और मंडल स्तर पर बैठकों और संवाद की कमी है। वरिष्ठ व पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने प्रदेश से मिली सामग्री के वितरण में देरी, फार्म-6 और मतदाता सूची के कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया है।

उन्होंने इसकी शिकायत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी, प्रदेश महामंत्री संगठन, क्षेत्रीय प्रभारी और क्षेत्रीय अध्यक्ष से की है। हालांकि, महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला खुद से जुड़े इन आरोपों बेबुनियाद बता चुके हैं।
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