मेरठ नीला ड्रम केस: मुस्कान-साहिल की अपील सुनवाई के लिए स्वीकार, हाईकोर्ट ने 30 नवंबर की तारीख तय की
मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
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सौरभ राजपूत हत्याकांड में सजा के खिलाफ मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा कि सजायाफ्ता मुलजिमों पर लंबे समय तक सजा की तलवार नहीं लटकनी चाहिए।
अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए 30 नवंबर की तारीख नियत की है। अब अगली सुनवाई में मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।
बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रखीं दलीलें
अभियुक्त साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार शुक्ला और रवितेंद्र प्रताप सिंह चन्देल ने अदालत में दलीलें पेश कीं। दोनों की अपील फांसी की सजा के खिलाफ है।
हाईकोर्ट में अपील स्वीकार किए जाने का अर्थ है कि मामले पर आगे सुनवाई होगी। इससे निचली अदालत की सजा अपने आप समाप्त नहीं होती। मामले में आगे का फैसला अदालत में होने वाली सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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सौरभ राजपूत हत्याकांड में सुनाई गई थी फांसी की सजा
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड को नीला ड्रम केस के नाम से भी जाना जाता है। इस मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को निचली अदालत ने दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। दोनों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी। हाईकोर्ट में आगे की कार्यवाही के दौरान अपील में उठाए गए कानूनी सवालों पर विचार किया जाएगा।
बचाव पक्ष ने विवेचना और फोरेंसिक साक्ष्यों पर उठाए सवाल
मेरठ की अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की विवेचना से लेकर गवाहों के बयानों तक पर सवाल उठाए थे। बचाव पक्ष ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट नहीं लिए जाने, डीएनए जांच नहीं कराए जाने और मोबाइल फोन से पर्याप्त साक्ष्य एकत्र नहीं किए जाने जैसी कथित कमियां गिनाई थीं।
बचाव पक्ष ने चाकू, उस्तरा, नीला ड्रम, सीमेंट और दवाएं बेचने वाले दुकानदारों की गवाही को भी चुनौती दी थी। उनका कहना था कि इन वस्तुओं की खरीद से संबंधित बिल और रसीदें पेश नहीं की गईं। साथ ही, दुकानों की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने और स्वतंत्र गवाहों से खरीद की पुष्टि नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे।
आठ मार्च 2025 को हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, आठ मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने की थी। आरोप है कि हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में रखकर उसमें सीमेंट डाल दिया गया था। इसके बाद दोनों हिमाचल प्रदेश के कसोल घूमने चले गए थे।
मामले की जांच और सुनवाई के बाद मेरठ की अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अब दोनों ने इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। मंगलवार की सुनवाई में आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कांग्रेस नेत्री पूनम पंडित सौरभ राजपूत के परिवार से मिलीं
कांग्रेस नेत्री पूनम पंडित सौरभ के परिवार से मिलने पहुंचीं। उन्होंने परिवार से बातचीत की और भरोसा दिलाया कि वह सौरभ के परिवार को न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई में साथ देंगी। उन्होंने कवयित्री अनामिका जैन अंबर के मुस्कान से जेल में मुलाकात करने को लेकर भी सवाल उठाए।
पूनम ने कवियित्री की ओर से मुस्कान की बेटियों के पालन-पोषण और पढ़ाई का जिम्मा उठाने की बात पर सवाल किया कि मुस्कान के प्रति ही इतनी संवेदना क्यों हैं, जेल में अन्य कैदी महिलाएं और बच्चे हैं। फिर तो उनका भी जिम्मा उठाना चाहिए। कांग्रेस नेत्री ने आरोप लगाया कि सहानुभूति लेने की मंशा से ही कवयित्री अपराधी से मिलने पहुंच गई जबकि पीड़ित परिवार से मिलने नहीं आईं।