लखीमपुर खीरी: शारदा की कटान से उजड़े आशियाने, ग्रामीण खुद तोड़ रहे अपने मकान, वीरबाबा स्थान पर भी संकट
लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी ने तबाही मचा रखी है। नदी की कटान से गांव रुरा सुल्तानपुर में दहशत है, जहां घर और वर्षों पुराना वीरबाबा देवस्थान भी संकट में हैं। ग्रामीण अपने घर तोड़कर सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। कई मकान नदी में समा चुके हैं।
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लखीमपुर खीरी में शारदा नदी की कटान से रुरा सुल्तानपुर में दहशत है। नदी की धारा में घर और पेड़ बहने के बाद अब वर्षों पुराना वीरबाबा देवस्थान भी संकट में है। कटान से बचाने के लिए ग्रामीण अपने घर तोड़कर ईंट, दरवाजे और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने लगे हैं। तेज कटान से ग्रामीण लालता का मिट्टी का पूरा घर नदी में समा गया। हरिहर सिंह का पक्का मकान भी करीब 50 प्रतिशत नदी में बह गया। वर्षों पुराना प्रसिद्ध वीरबाबा देवस्थान भी करीब 50 फीसदी कटान की चपेट में आ चुका है।
कटान की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देवस्थान के पास खड़ा वर्षों पुराना विशाल पीपल का पेड़ शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे देखते ही देखते शारदा की धारा में समा गया। इसके पास लगा विशाल गूलर का पेड़ भी रात करीब ढाई बजे कटान में बह गया।
लगातार बढ़ते कटान ने ग्रामीणों को अपने ही हाथों से मकान तोड़ने पर मजबूर कर दिया है। लोग मकान तोड़कर ईंटें निकाल रहे हैं, ताकि निर्माण सामग्री और गृहस्थी को नदी में समाने से बचाया जा सके। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ईंट, दरवाजे और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। कई परिवार सड़क किनारे या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने के लिए मजबूर हैं।
आस्था का केंद्र भी कटान की जद में
जिस वीरबाबा देवस्थान पर दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं, वह भी शारदा की धारा में समाने के कगार पर है। शुक्रवार को अमावस्या होने के कारण श्रद्धालु यहां पूजा-पाठ कर शारदा मैया से कटान रोकने की प्रार्थना करते नजर आए। प्रसाद और मिठाई की दुकानें भी लगी रहीं। एक ओर श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर रहे थे, तो दूसरी ओर नदी लगातार कटान कर रही थी। लेखपाल राजीव वर्मा ने बताया कि करीब 50 से 60 एकड़ कृषि भूमि का कटान हो चुका है। लालता का घर कट गया है और हरिहर सिंह का आधा मकान कट चुका है। अभी कटान जारी है।
पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराएंगे
एसडीएम गोला युगांतर त्रिपाठी ने बताया कि मैं और तहसीलदार एक सप्ताह से लगातार मौके का निरीक्षण कर रहे हैं। बाढ़ चौकी पूजागांव आषाढ़ी में सख्त आदेश जारी किया गया है। किसी भी समय कितने भी परिवार पहुंचें, उनके भोजन और ठहरने की व्यवस्था 24 घंटे जारी रहेगी। कटान और बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएंगे।
बंशीनगर में रपटा पुल अभी ठीक नहीं, फिलहाल आवागमन पर रोक जारी
पलियाकलां क्षेत्र में बंशीनगर स्थित रपटा पुल अभी आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं है। क्षतिग्रस्त पुल पर प्रशासन ने फिलहाल रोक जारी रखी है। इससे नेपाल से आने व जाने वाले यात्रियों और अन्य लोगों को परेशानी हो रही है। पानी घटने के बाद पुल की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
शुक्रवार को एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह और एसडीएम पुष्पक तोमर ने अधिकारियों की टीम के साथ पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पुल पूरी तरह ठीक होने के बाद ही आवागमन शुरू कराया जाएगा। रपटा पुल पर दो स्थानों पर क्षति हुई है। पानी कम होने के बाद पुल की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया जाएगा।
शुक्रवार को सुबह से शाम तक पुल से बड़े वाहनों और पैदल आवाजाही पर रोक रही। दुधवा रोड पर दोनों ओर ईंधन से भरे वाहन खड़े रहे। पलिया से नेपाल जाने वाले गैस कैप्सूल वाहनों को सिगहिया के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया है। बड़े वाहनों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
कैलाली डीएम हीरालाल रेगमी के अनुसार, भारतीय प्रशासन की आवाजाही पर पिछले तीन दिनों से जारी पाबंदी के चलते भारत जाने वाले नेपाली कामगार धनगढ़ी में भटकने या घर लौटने के लिए मजबूर हैं। पेट्रोलियम, गैस और अन्य मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक से नेपाल में दैनिक और आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत की आशंका बढ़ गई है।
शारदा और सुहेली नदियों के उफान से निघासन क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। शारदा का बढ़ता जलस्तर दर्जनों गांवों तक पहुंच गया है। खेत-खलिहान जलमग्न होने से सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित हुई है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी भरने से आवागमन बाधित है।
निघासन-झंडी मार्ग पर करीब 500 मीटर तक सड़क पर लगभग एक फुट पानी बह रहा है। निघासन-पलिया और निघासन-रकेहटी मार्ग के आसपास खेत-खलिहान और कई घर बाढ़ की चपेट में हैं। लालपुर स्थित डॉ. भीमराव तराई किसान महाविद्यालय समेत कई विद्यालयों तक पहुंचने वाले रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं।
उफान से कुर्मिनपुरवा, देवीदीनपुरवा, बस्तीपुरवा, छीटन पुरवा, बिहारी पुरवा, करमूपुरवा, बरोठा, लांघनिया पुरवा, त्रिकौलियाबिनौरा, मोहबतियाबेहड़, मिर्जागंज, महुआ, सुक्खन पुरवा, धर्मपुरवा, मदनापुर, लालबोझी, रानीगंज, ठाकुरपुरवा, बैलहाडीह, मटहिया, मिठुई, झंडी, टॉपर पुरवा, लोनियनपुरवा, नया पुरैना, पुराना पुरैना, सेमरा पुरवा, दौलतापुर, बोटनपुरवा, सुरजीपुरवा, नौगवां, हुलासीपुरवा, यादवपुरवा, बिचपरी, छेदुई पतिया और बल्लीपुर कई गांव प्रभावित हैं।
इधर, रकेहटी कस्बे के दिग्विजय गुप्ता, देवेंद्र पांडे और निघासन के अंशुल दीक्षित समेत अन्य समाजसेवी ट्रैक्टर-ट्रॉली और नावों से बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को लंच पैकेट दिए।