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Lakhimpur Kheri News: जी-9 टिशू कल्चर पौध से केला खूब उगा, मुनाफे का सपना अटका
Mon, 14 Sep 2026 02:18 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 14 Sep 2026 02:18 AM IST
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सर्वेश कुमार साहू लोहरीपुर
धौरहरा। क्षेत्र में जी-9 टिशू कल्चर पौध से केले की खेती तेजी से बढ़ी है। गन्ने के मुकाबले बेहतर मुनाफे और नकद भुगतान की उम्मीद में किसान इसका रकबा बढ़ा रहे हैं।
धौरहरा का केला दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और नेपाल तक भेजा जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय बाजार में कम भाव मिलने से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।
प्रगतिशील किसान धर्मपाल मौर्य ने बताया कि जी-9 पौध आने के बाद क्षेत्र में केले की खेती को बढ़ावा मिला। किसानों के मुताबिक, रोज करीब 100 ट्रक केला दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की मंडियों में भेजा जा रहा है। व्यापारी इसे नेपाल भी भेज रहे हैं।
किसानों का कहना है कि बाहर की मंडियों में केला करीब 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि स्थानीय बिचौलिये 600 से 1000 रुपये में खरीद रहे हैं। फुटकर बाजार में इसका भाव करीब 60 रुपये दर्जन है। किसानों के अनुसार, इस अंतर से लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
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लौखनियां के प्रगतिशील किसान अखिलेश वर्मा ने बताया कि जी-9 प्रजाति की पौध भारत-इजरायल कृषि सहयोग का परिणाम है। टिशू कल्चर तकनीक से महाराष्ट्र के जलगांव, कर्नाटक के बेंगलुरु और गुजरात के अहमदाबाद समेत अन्य स्थानों की प्रयोगशालाओं में पौध तैयार होती है। अलग-अलग कंपनियां इसे किसानों तक पहुंचाती हैं। पौध के लिए पहले से बुकिंग करानी पड़ती है। एक पौध 16 से 20 रुपये की है। एक एकड़ में करीब 1250 पौधे लगाए जाते हैं।
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दो वर्षों से केले का अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा
किसान विजय जायसवाल, संजय वर्मा, कुंवर सेन, बृजेंद्र कुमार, राजीव, शरीफ अहमद आदि गंगा सिंह ने बताया कि दो वर्षों से केले का अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा है। किसानों ने धान-गेहूं की तरह केले का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और क्षेत्र में व्यवस्थित मंडी बनाने की मांग की है।
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केला किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा था, लेकिन बिचौलियों के कारण सही मूल्य नहीं मिल रहा। एमएसपी और मंडी मूल्य मिलने से किसानों को लाभ होगा। वर्तमान भाव में केले की खेती घाटे का सौदा है।
-इकबाल खां, प्रगतिशील किसान, धौरहरा
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किसानों का केले की खेती की ओर रुझान बढ़ा था। हरियाणा और दिल्ली की मंडियों में 2600 से 3000 रुपये क्विंटल बिकने वाला केला स्थानीय स्तर पर 600 से 1000 रुपये में मिल रहा है। ऐसे में लागत निकालना मुश्किल है।
-सर्वेश कुमार साहू, लोहरीपुर
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धौरहरा का केला दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और नेपाल तक भेजा जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय बाजार में कम भाव मिलने से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।
प्रगतिशील किसान धर्मपाल मौर्य ने बताया कि जी-9 पौध आने के बाद क्षेत्र में केले की खेती को बढ़ावा मिला। किसानों के मुताबिक, रोज करीब 100 ट्रक केला दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की मंडियों में भेजा जा रहा है। व्यापारी इसे नेपाल भी भेज रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि बाहर की मंडियों में केला करीब 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि स्थानीय बिचौलिये 600 से 1000 रुपये में खरीद रहे हैं। फुटकर बाजार में इसका भाव करीब 60 रुपये दर्जन है। किसानों के अनुसार, इस अंतर से लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
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लौखनियां के प्रगतिशील किसान अखिलेश वर्मा ने बताया कि जी-9 प्रजाति की पौध भारत-इजरायल कृषि सहयोग का परिणाम है। टिशू कल्चर तकनीक से महाराष्ट्र के जलगांव, कर्नाटक के बेंगलुरु और गुजरात के अहमदाबाद समेत अन्य स्थानों की प्रयोगशालाओं में पौध तैयार होती है। अलग-अलग कंपनियां इसे किसानों तक पहुंचाती हैं। पौध के लिए पहले से बुकिंग करानी पड़ती है। एक पौध 16 से 20 रुपये की है। एक एकड़ में करीब 1250 पौधे लगाए जाते हैं।
दो वर्षों से केले का अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा
किसान विजय जायसवाल, संजय वर्मा, कुंवर सेन, बृजेंद्र कुमार, राजीव, शरीफ अहमद आदि गंगा सिंह ने बताया कि दो वर्षों से केले का अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा है। किसानों ने धान-गेहूं की तरह केले का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और क्षेत्र में व्यवस्थित मंडी बनाने की मांग की है।
केला किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा था, लेकिन बिचौलियों के कारण सही मूल्य नहीं मिल रहा। एमएसपी और मंडी मूल्य मिलने से किसानों को लाभ होगा। वर्तमान भाव में केले की खेती घाटे का सौदा है।
-इकबाल खां, प्रगतिशील किसान, धौरहरा
किसानों का केले की खेती की ओर रुझान बढ़ा था। हरियाणा और दिल्ली की मंडियों में 2600 से 3000 रुपये क्विंटल बिकने वाला केला स्थानीय स्तर पर 600 से 1000 रुपये में मिल रहा है। ऐसे में लागत निकालना मुश्किल है।
-सर्वेश कुमार साहू, लोहरीपुर

सर्वेश कुमार साहू लोहरीपुर

सर्वेश कुमार साहू लोहरीपुर