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Kushinagar News: घर लाया गया राजमिस्त्री का शव, परिवार में मची चीख-पुकार
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तुर्कपट्टी। पडरौना क्षेत्र के पकड़ी बुजुर्ग मोड़ पर मंगलवार देर शाम सड़क हादसे में राजमिस्त्री चंदेश्वर चौहान की मौत हो गई थी। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद उनका शव घर लाया गया तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। पत्नी और बच्चे रोते-रोते अचेत हो जा रहे थे। घर के बाहर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। तीनों बच्चे बार-बार पिता को उठाने की कोशिश करते रहे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
महुअवां बुजुर्ग निवासी 34 वर्षीय चंदेश्वर चौहान मेडिकल कॉलेज के पास राजमिस्त्री का काम करते थे। मंगलवार को काम खत्म करने के बाद वह स्कूटी से गांव लौट रहे थे। उनके साथ गांव के ही दीपक पटेल भी सवार थे। रात करीब आठ बजे पकड़ी बुजुर्ग मोड़ के पास किसी वाहन ने उनकी स्कूटी में टक्कर मार दी। चंदेश्वर की घटना स्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
सूचना पर आई पुलिस चंदेश्वर के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है। चंदेश्वर अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। वह रोज मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी पत्नी राधिका चौहान (28) के अलावा बेटी अमृता (12), बेटे अंकुश (10) और पंकज (7) हैं। चार बहनों में तीन की शादी हो चुकी है, जबकि सबसे छोटी बहन सलोनी अविवाहित है।
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बुधवार को उनका शव घर पहुंचा तो पत्नी राधिका पति के शव से लिपटकर बिलख पड़ीं। तीनों बच्चों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बेटी अमृता और दोनों बेटे पिता को उठाने का प्रयास करते रहे। बच्चों की सिसकियां और महिलाओं के विलाप से पूरा माहौल गमगीन हो गया। चंदेश्वर की मौत से परिवार के सामने अब रोजी-रोटी के साथ बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता है। परिवार की आय का एकमात्र सहारा रहे चंदेश्वर के चले जाने से पत्नी राधिका के कंधों पर तीनों बच्चों की जिम्मेदारी आ गई है।
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महुअवां बुजुर्ग निवासी 34 वर्षीय चंदेश्वर चौहान मेडिकल कॉलेज के पास राजमिस्त्री का काम करते थे। मंगलवार को काम खत्म करने के बाद वह स्कूटी से गांव लौट रहे थे। उनके साथ गांव के ही दीपक पटेल भी सवार थे। रात करीब आठ बजे पकड़ी बुजुर्ग मोड़ के पास किसी वाहन ने उनकी स्कूटी में टक्कर मार दी। चंदेश्वर की घटना स्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
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सूचना पर आई पुलिस चंदेश्वर के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है। चंदेश्वर अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। वह रोज मेहनत कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी पत्नी राधिका चौहान (28) के अलावा बेटी अमृता (12), बेटे अंकुश (10) और पंकज (7) हैं। चार बहनों में तीन की शादी हो चुकी है, जबकि सबसे छोटी बहन सलोनी अविवाहित है।
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बुधवार को उनका शव घर पहुंचा तो पत्नी राधिका पति के शव से लिपटकर बिलख पड़ीं। तीनों बच्चों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बेटी अमृता और दोनों बेटे पिता को उठाने का प्रयास करते रहे। बच्चों की सिसकियां और महिलाओं के विलाप से पूरा माहौल गमगीन हो गया। चंदेश्वर की मौत से परिवार के सामने अब रोजी-रोटी के साथ बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता है। परिवार की आय का एकमात्र सहारा रहे चंदेश्वर के चले जाने से पत्नी राधिका के कंधों पर तीनों बच्चों की जिम्मेदारी आ गई है।