हाथरस: सांसद अनूप प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर से 11 लाख की ठगी, राजकमल प्रकाशन ने दर्ज कराई एफआईआर
हाथरस के सांसद अनूप प्रधान के लेटर हेड व फर्जी दस्तखत के जरिए राजकमल प्रकाशन से 11 लाख रुपये ठगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दिल्ली की प्रकाशन कंपनी के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई।
विस्तार
हाथरस सांसद अनूप प्रधान के लेटरहेड और फर्जी हस्ताक्षर के जरिये नई दिल्ली के राजकमल प्रकाशन समूह से 11 लाख रुपये की ठगी की गई। प्रकाशन समूह की ओर से सांसद के कथित निजी सहायक (पीए) विमल गौतम के खिलाफ हाथरस गेट कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
मामला सांसद निधि से पुस्तकों की खरीदारी से जुड़ा है। राजकमल प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) मुकेश कुमार ने बताया कि 4 अगस्त 2026 को वह हाथरस सांसद अनूप प्रधान के नई दिल्ली स्थित आवास (11 विंडसर प्लेस, जनपथ रोड) पर सांसद निधि से पुस्तकों के ऑर्डर के संदर्भ में मिलने गए थे। इसके अगले दिन 5 अगस्त को विमल गौतम का फोन आया। उसने खुद को सांसद का पीए बताते हुए दावा किया कि सांसद किताबों की खरीद के लिए तैयार हैं। 8 अगस्त 2026 को वह फिर सांसद के नई दिल्ली आवास पर पहुंचे। यहां विमल गौतम ने सांसद का लेटरहेड दिखाते हुए कार्य दिलाने के एवज में 11 लाख रुपये की मांग की। प्रकाशक ने सांसद के हस्ताक्षर और ई-साक्षी पोर्टल पर अनुशंसा पत्र अपलोड होने के वादे पर 11 लाख रुपये देना स्वीकार कर लिया।
दिल्ली की फर्म ने ठगी की शिकायत की है। रुपये हाथरस में लिए जाने की सूचना दी गई है, जिस आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। प्रकरण में जांच के लिए टीम गठित कर दी गई हैं।-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
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फर्म के मालिक ने मुलाकात कर घटना के बारे में बताया था। विमल गौतम समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री के यहां वह काम करता था और वहीं से मेरे संपर्क में आया था। वह काम से दिल्ली वाले आवास पर आता-जाता रहता था। वह मेरा पीए नहीं है। मौका पाकर वह कार्यालय से लेटरहेड ले गया होगा। लेटरहेड पर मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं। पुलिस जांच में स्थिति और साफ हो जाएगी।-अनूप प्रधान, सांसद
हाथरस में फर्जी लेटर और रुपयों का लेन-देन
मुकेश का आरोप है कि वह कुछ दिन बाद विमल गौतम से हाथरस में मिले। यहां सांसद से लेटरहेड पर हस्ताक्षर करवाकर देने के नाम पर उसने 11 लाख रुपये ले लिए। कहा कि सांसद की व्यस्तता के कारण जल्द ही लेटर साइन कराकर ई-साक्षी पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। 25 अगस्त 2026 को विमल गौतम ने ई-साक्षी पोर्टल पर लेटर अपलोड होने का एक स्क्रीनशॉट वॉट्सएप पर भेजा। स्क्रीनशॉट देखने के बाद मुकेश कुमार को फर्जीवाड़े का संदेह हुआ।
सांसद से मुलाकात में हुआ भंडाफोड़
7 सितंबर 2026 को राजकमल प्रकाशन के मालिक अशोक महेश्वरी और मुकेश कुमार ने सांसद अनूप प्रधान से उनके दिल्ली आवास पर व्यक्तिगत मुलाकात की। बातचीत में पता चला कि विमल गौतम उनका पीए नहीं है। सांसद ने ये भी बताया कि लेटरहेड पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके बाद मुकेश ने हाथरस के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की।