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Budaun News: रामगंगा ने बढ़ाई चिंता, बिहारीपुर गांव में पहुंचा पानी
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बिहारीपुर गांव की ओर बढ़ रहा पानी। संवाद
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दातागंज। रामगंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हालात गंभीर हो रहे हैं। बिहारीपुर गांव में पानी पहुंच गया है। विभाग की ओर से कराए गए सुरक्षात्मक कार्य को भी रामगंगा का पानी पार कर चुका है। इसके बाद ग्रामीण खुद पानी के बहाव को रोकने की कोशिश में जुट गए हैं। ग्रामीण नदी किनारे पेड़ रेत के कट्टे लगाकर पानी के तेज बहाव को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
दातागंज क्षेत्र से होकर निकल रही रामगंगा का जलस्तर रविवार को 168.890 सेमी दर्ज किया गया था। क्षेत्र के गांव आनंदापुर को जाने वाली पुलिया पर करीब तीन फुट तक पानी भर गया है। वहीं, रामगंगा का पानी अब चापरकौरा गांव से महज 10 मीटर की दूरी पर रह गया है। पानी लगातार गांवों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। प्रभावित क्षेत्रों में लोग जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
उधर, बाढ़ खंड विभाग की ओर से रामगंगा के किनारे कटान और बाढ़ से बचाव के लिए करीब चार करोड़ पांच लाख 30 हजार रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य कराया गया था। बावजूद इसके पानी इस सुरक्षा कार्य को पार कर बिहारीपुर गांव में बढ़ रहा है। ग्रामीण नरवीर कश्यप, सोनू का कहना है कि विभाग की ओर से नौ ठोकरें बनाई गई थीं। इनमें पांच ठोकरें शनिवार तक बह गई थीं। वहीं, आज पानी उस सुरक्षात्मक कार्य से ऊपर निकल कर गांव की ओर से बढ़ गया है।
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शेरपुर में संपर्क मार्ग कटा, चार गांव पानी से घिरे
दातागंज। शेरपुर गांव के मुख्य मार्ग पर करीब दो साल पहले बनी पुलिया का संपर्क मार्ग और सड़क का कुछ हिस्सा पानी के तेज बहाव में कट गया है। पानी का प्रवाह तेज होने के कारण नाव का रास्ता भी करीब 50 मीटर हटकर हो गया है। इससे ग्रामीणों का आवागमन और मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही सकतपुर, कटकौरा के अलावा सैदपुर अकट, देवरनिया गांव भी चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ के दृष्टिकोण से नगरिया खनू, हजरतपुर और पिपला बाढ़ चौकियों के क्षेत्र को अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में जरतौली, सिमरिया, सकतपुर, मौसमपुर, हररामपुर, नवादा बदन, कुंद्रा मजरा, पट्टी विजा, लालपुर खादर, कटकौरा समेत 24 से अधिक गांव प्रभावित चल रहे हैं। वहीं बाढ़ चौकी बेलाडाड़ी क्षेत्र के देवरनिया और सैदपुर अकट गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। संवाद
40 दिन से गंगा के कटान की मार झेल रहा गांव कदमनगला तबाह
- स्कूल से लेकर 20 कच्चे-पक्के मकान और 600 बीघा जमीन नदी में समाई
- राहत शिविर गांव से पांच किमी दूर होने से नहीं पहुंच पा रहे ग्रामीण, मजबूरी में रह रहे सड़क किनारे
संवाद न्यूज एजेंसी
उसहैत। गंगा इन दिनों खतरे के निशान से कई दिनों से ऊपर बह रही है। रोजाना नदी का जलस्तर बढ़ने से गांवों में खतरा बढ़ता जा रहा है। हालात यह है कि पिछले 40 दिन में कदमनगला गांव का सरकारी स्कूल, झोंपड़ियां और करीब 20 कच्चे-पक्के मकान एक-एक कर गंगा में समा चुके हैं। करीब 600 बीघा खेती की जमीन भी नदी की धारा में चली गई।
क्षेत्र के कदमनगला गांव के लोग 40 दिन से गंगा के कटान की मार झेल रहे हैं। अब यह गांव पूरी तरह तबाह हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव को बचाने के लिए उन्होंने कई बार प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारियों से गुहार लगाई। हालांकि गांव को कटने से नहीं बचाया जा सका।
वहीं, प्रशासन की ओर से पहले राहत शिविर गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर दल नगला में बनाया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, गांव से इतनी दूरी और खराब संपर्क मार्ग के कारण कोई भी वहां रहने नहीं गया। इसके बाद ग्रामीणों ने गांव के बाहर पक्की सड़क के किनारे अस्थायी ठिकाने बना लिए। लोग सड़क किनारे ही रह रहे हैं। घर का बचा हुआ सामान भी सड़क किनारे रखा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है सबसे ज्यादा संकट पशुओं के चारे को लेकर है। बाढ़ की वजह से भूसा और हरा चारा मिलना मुश्किल हो रहा है। कदमनगला, रैपुरा और भुनडी में कटान जारी है। डीएम अवनीश राय के दौरे के बाद रैपुरा में बाढ़ खंड की टीम मौके पर डटी हुई है। टीम की ओर से कटान की रफ्तार कम करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि रैपुरा के मकानों को गंगा की धारा में जाने से बचाया जा सके।
जटा गांव को जाने वाली पुलिया पर कुछ पानी बह रहा है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रफतपुर गांव में भी आबादी में पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन करीब 500 बीघा खेत एक महीने से पानी में डूबे हुए हैं। इससे फसलों को नुकसान हो रहा है। अहमदनगर बछौरा में कटान जारी है, हालांकि गांव पूरी तरह खाली हो चुका है।
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प्रशासन हर तरह के खतरे से निपटने के लिए तैयार है। प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। ग्रामीणों को प्रशासन के बनाए राहत शिविर में जाकर रहना चाहिए। - विनोद कुमार सिंह, एसडीएम, दातागंज
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दातागंज क्षेत्र से होकर निकल रही रामगंगा का जलस्तर रविवार को 168.890 सेमी दर्ज किया गया था। क्षेत्र के गांव आनंदापुर को जाने वाली पुलिया पर करीब तीन फुट तक पानी भर गया है। वहीं, रामगंगा का पानी अब चापरकौरा गांव से महज 10 मीटर की दूरी पर रह गया है। पानी लगातार गांवों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। प्रभावित क्षेत्रों में लोग जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
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उधर, बाढ़ खंड विभाग की ओर से रामगंगा के किनारे कटान और बाढ़ से बचाव के लिए करीब चार करोड़ पांच लाख 30 हजार रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य कराया गया था। बावजूद इसके पानी इस सुरक्षा कार्य को पार कर बिहारीपुर गांव में बढ़ रहा है। ग्रामीण नरवीर कश्यप, सोनू का कहना है कि विभाग की ओर से नौ ठोकरें बनाई गई थीं। इनमें पांच ठोकरें शनिवार तक बह गई थीं। वहीं, आज पानी उस सुरक्षात्मक कार्य से ऊपर निकल कर गांव की ओर से बढ़ गया है।
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शेरपुर में संपर्क मार्ग कटा, चार गांव पानी से घिरे
दातागंज। शेरपुर गांव के मुख्य मार्ग पर करीब दो साल पहले बनी पुलिया का संपर्क मार्ग और सड़क का कुछ हिस्सा पानी के तेज बहाव में कट गया है। पानी का प्रवाह तेज होने के कारण नाव का रास्ता भी करीब 50 मीटर हटकर हो गया है। इससे ग्रामीणों का आवागमन और मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही सकतपुर, कटकौरा के अलावा सैदपुर अकट, देवरनिया गांव भी चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ के दृष्टिकोण से नगरिया खनू, हजरतपुर और पिपला बाढ़ चौकियों के क्षेत्र को अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में जरतौली, सिमरिया, सकतपुर, मौसमपुर, हररामपुर, नवादा बदन, कुंद्रा मजरा, पट्टी विजा, लालपुर खादर, कटकौरा समेत 24 से अधिक गांव प्रभावित चल रहे हैं। वहीं बाढ़ चौकी बेलाडाड़ी क्षेत्र के देवरनिया और सैदपुर अकट गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। संवाद
40 दिन से गंगा के कटान की मार झेल रहा गांव कदमनगला तबाह
- स्कूल से लेकर 20 कच्चे-पक्के मकान और 600 बीघा जमीन नदी में समाई
- राहत शिविर गांव से पांच किमी दूर होने से नहीं पहुंच पा रहे ग्रामीण, मजबूरी में रह रहे सड़क किनारे
संवाद न्यूज एजेंसी
उसहैत। गंगा इन दिनों खतरे के निशान से कई दिनों से ऊपर बह रही है। रोजाना नदी का जलस्तर बढ़ने से गांवों में खतरा बढ़ता जा रहा है। हालात यह है कि पिछले 40 दिन में कदमनगला गांव का सरकारी स्कूल, झोंपड़ियां और करीब 20 कच्चे-पक्के मकान एक-एक कर गंगा में समा चुके हैं। करीब 600 बीघा खेती की जमीन भी नदी की धारा में चली गई।
क्षेत्र के कदमनगला गांव के लोग 40 दिन से गंगा के कटान की मार झेल रहे हैं। अब यह गांव पूरी तरह तबाह हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव को बचाने के लिए उन्होंने कई बार प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारियों से गुहार लगाई। हालांकि गांव को कटने से नहीं बचाया जा सका।
वहीं, प्रशासन की ओर से पहले राहत शिविर गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर दल नगला में बनाया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, गांव से इतनी दूरी और खराब संपर्क मार्ग के कारण कोई भी वहां रहने नहीं गया। इसके बाद ग्रामीणों ने गांव के बाहर पक्की सड़क के किनारे अस्थायी ठिकाने बना लिए। लोग सड़क किनारे ही रह रहे हैं। घर का बचा हुआ सामान भी सड़क किनारे रखा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है सबसे ज्यादा संकट पशुओं के चारे को लेकर है। बाढ़ की वजह से भूसा और हरा चारा मिलना मुश्किल हो रहा है। कदमनगला, रैपुरा और भुनडी में कटान जारी है। डीएम अवनीश राय के दौरे के बाद रैपुरा में बाढ़ खंड की टीम मौके पर डटी हुई है। टीम की ओर से कटान की रफ्तार कम करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि रैपुरा के मकानों को गंगा की धारा में जाने से बचाया जा सके।
जटा गांव को जाने वाली पुलिया पर कुछ पानी बह रहा है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रफतपुर गांव में भी आबादी में पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन करीब 500 बीघा खेत एक महीने से पानी में डूबे हुए हैं। इससे फसलों को नुकसान हो रहा है। अहमदनगर बछौरा में कटान जारी है, हालांकि गांव पूरी तरह खाली हो चुका है।
प्रशासन हर तरह के खतरे से निपटने के लिए तैयार है। प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। ग्रामीणों को प्रशासन के बनाए राहत शिविर में जाकर रहना चाहिए। - विनोद कुमार सिंह, एसडीएम, दातागंज

बिहारीपुर गांव की ओर बढ़ रहा पानी। संवाद

बिहारीपुर गांव की ओर बढ़ रहा पानी। संवाद

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