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Bhadohi News: ब्लड बैंक में ए, एबी, ओ निगेटिव ग्रुप का खून खत्म, जरूरत पर बढ़ेगी सांसत

Tue, 03 Nov 2026 01:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Nov 2026 01:21 AM IST
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Blood bank runs out of A, AB, and O-negative blood; situation likely to become critical when the need arises
ज्ञानपुर। दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में खून की कमी हो गई है। यहां ए, एबी और ओ निगेटिव ग्रुप का खून खत्म हो चुका है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। ब्लड बैंक की क्षमता 150 यूनिट खून की है, जबकि 2 नवंबर को यहां मात्र 18 यूनिट खून शेष था। जिले में प्रतिदिन औसतन दो यूनिट खून की खपत होती है। इस लिहाज से उपलब्ध खून मात्र नौ दिन तक ही चल सकेगा।
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जिला अस्पताल परिसर में जनपद का इकलौता ब्लड बैंक है। यहां 150 यूनिट क्षमता वाले दो फ्रीजर हैं। उपलब्धता के अनुसार, ए पॉजिटिव के तीन, बी पॉजिटिव के दो, ओ पॉजिटिव के 10, एबी पॉजिटिव के दो और बी निगेटिव का एक यूनिट ब्लड है। इसके अलावा ए, एबी और ओ निगेटिव ग्रुप का एक भी यूनिट खून उपलब्ध नहीं है। यहां जरूरतमंदों को 1050 रुपये सरकारी शुल्क लेकर ब्लड दिया जाता है। निगेटिव ब्लड ग्रुप की उपलब्धता बेहद कम है। ऐसे में संकट की स्थिति में मरीजों को खून मिलना मुश्किल हो सकता है। जरूरत पड़ने पर लोगों को निजी ब्लड बैंक का रुख करना पड़ता है, जहां मनमाने ढंग से शुल्क लिया जाता है। निजी ब्लड बैंक में खून की शुद्धता को लेकर भी मरीजों के मन में सवाल उठते रहते हैं। सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा निजी अस्पतालों में ब्लड की खपत अधिक है। जिले में पॉजिटिव ग्रुप के खून की खपत अन्य ग्रुप की अपेक्षा ज्यादा है। रेडक्रांस और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं।
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सरकारी अस्पताल में दो, निजी अस्पतालों के मरीज अधिक लेते हैं ब्लड
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 800 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा 50 से 60 मरीज इमरजेंसी में आते हैं। हर महीने 60 से 70 प्रसव होते हैं। इनमें रोज दो मरीजों को ही ब्लड की जरूरत पड़ती है। सरकारी अस्पताल की अपेक्षा निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन अधिक संख्या में ब्लड लेने आते हैं। खून उपलब्ध होने पर उन्हें दिया भी जाता है।
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ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता
ब्लड ग्रुप
उपलब्ध यूनिट
ओ पॉजिटिव 10
ए पॉजिटिव 03
एबी पॉजिटिव 02
बी पॉजिटिव 02
बी निगेटिव 01
ए निगेटिव शून्य
एबी निगेटिव शून्य
ओ निगेटिव शून्य
कुल 18
इन मरीजों में होती है खून की कमी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप यादव ने बताया कि थैलेसीमिया, किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों, सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होती है। थैलेसीमिया के मरीजों में से जो बाहर ही उपचार कराते हैं, उन्हें छोड़कर दो-तीन मरीजों को हर महीने ब्लड दिया जाता है।
ब्लड की कमी दूर करने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत
बीते महीने एक परिचित को ब्लड की जरूरत थी। जिला अस्पताल आने के बाद उस ग्रुप का ब्लड नहीं मिला। यहां खून की कमी रहती है। इसे दूर करने के लिए हर किसी को आगे आने की जरूरत है। - विनय सरोज, नेवाद मोढ़
10 दिन पहले एक रिश्तेदार को ओ निगेटिव ब्लड की जरूरत थी, लेकिन ब्लड बैंक से नहीं मिला। निजी अस्पताल से खून लेना पड़ा। इसलिए हर किसी को जिला अस्पताल में रक्तदान करना चाहिए। - अनिल पांडेय, गोपीगंज

ब्लड बैंक से हर जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त मिलता है। रक्तदान करने के लिए लोग आते नहीं हैं। जबकि एक यूनिट खून से चार लोगों की जान बचाई जा सकती है। - डॉ. धीरज प्रकाश, सीएमएस प्रभारी, एमसीएच
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