भदोही: चोरी-छिनैती के मोबाइल का क्लोन बनाता था, साइबर ठगों को बेचने का आरोपी अरेस्ट; हर माह करोड़ों का लेन-देन
भदोही में चोरी और छिनैती के मोबाइल फोन का क्लोन तैयार कर साइबर ठगों को बेचने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी गोपीगंज में किराये के कमरे में कबाड़ का कारोबार करता था। जांच में उसके बैंकिंग विवरण में हर महीने करोड़ों रुपये के लेन-देन का पता चला। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
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ज्ञानपुर जिले की पुलिस ने बुधवार को साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। चोरी, छिनैती और गुम हुए मोबाइल को सस्ते दामों में खरीदकर उसका क्लोन तैयार कर साइबर ठगों को बेचने के आरोपी कबाड़ व्यापारी अजीजुल को गिरफ्तार किया।
आरोपी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के कांटी थाने के सालापाड़ा का निवासी है। वह गोपीगंज के नईबस्ती में किराये पर मकान लेकर कबाड़ का व्यापार करता था। उसके पास से 889 मोबाइल और 923 सिम बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इसकी बैकिंग डिटेल खंगाली तो हर महीने करोड़ों का लेन देन सामने आया है। जिसमें यूपी व बंगाल से लेन-देन की डिटेल है।
पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने बताया कि जिले में चोरी-छिनैती समेत गुम होने वाले मोबाइल फोन को लेकर सर्विलांस टीम लगातार काम कर रही थी। सर्विलांस व गोपीगंज की टीम को सूचना मिली कि नगर कस्बे में एक व्यक्ति बड़ी मात्रा में चोरी, छिनैती व स्क्रैब वाले मोबाइल की खरीद करता है।
सूचना के बाद पहुंची टीम ने जांच-पड़ताल की तो पता चला कि अजीजुल कबाड़ की दुकान की आड़ में बड़ी मात्रा में चोरी व छिनैती के मोबाइल को साइबर ठगों को उपलब्ध कराने का काम करता है। उसने गोपीगंज में छोटी-छोटी चार दुकानें किराये पर ले रखी थीं। छानबीन में पुलिस ने उसकी दुकान से 293 स्मार्टफोन/टैबलेट और 596 कीपैड फोन विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के 923 सिम कार्ड, मदरबोर्ड, आईसी, स्क्रीन और चेसिस जैसे मोबाइल स्क्रैप पार्ट्स भी बरामद किए।
मोबाइल पार्ट्स से तैयार करता क्लोन फोन
एसपी ने बताया कि आरोपी पुराने और खराब मोबाइलों से उपयोगी पार्ट्स जैसे मदरबोर्ड, डिस्प्ले और कैमरा अलग करता था। इन पार्ट्स को असेंबल करके कस्टमाइज्ड या क्लोन फोन तैयार करता था।
बरामद सिम के रिकाॅर्ड की जांच करेगी टीम
एएसपी शुभम अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल फोन, सिम कार्ड की तकनीकी जांच की जा रही है। बताया कि उसके पास से मिले बैंक डिटेल के माध्यम से पुराने मोबाइलों से उपलब्ध डेटा और डिजिटल पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी कॉल या लिंक के जरिये साइबर अपराध किए जाने की संभावना है। पुलिस बरामद सिम कार्ड, आईएमईआई और अन्य तकनीकी साक्ष्य की जांच के लिए टीम बनाई गई है।
जिस तरह से उसकी बैकिंग डिटेल रही है। उससे एक बड़े नेटवर्क में शामिल होने की संभावना है। फिलहाल जो सिम व अन्य उपकरण है। उसकी तकनीकी जांच शुरू हो गई है। जल्द ही इस नेटवर्क को भी पकड़ा जाएगा। - अभिनव त्यागी, पुलिस अधीक्षक।