बरेली बवाल का एक साल: किसी की नजरों को मिला सुकून, कोई देख रहा अपनों की राह
बरेली में आज से ठीक एक साल पहले 26 सितंबर 2025 को बवाल हुआ था। मौलाना तौकीर रजा के आह्वान पर हजारों लोगों की भीड़ सड़कों पर उतर आई थी। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई थी। इस मामले में मौलाना तौकीर रजा समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
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पिछले साल कानपुर से शुरू हुए आई लव मोहम्मद विवाद ने 26 सितंबर 2025 को बरेली में बवाल करा दिया था। इसका आरोप इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) के सदर मौलाना तौकीर रजा खां पर लगा और वह तब से आज तक फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद है। बवाल के एक साल बाद भी पुलिस की कार्रवाई जारी है। शहर के ज्यादातर लोग इस मुद्दे पर बात ही नहीं करना चाहते।
जो बोलते हैं, उनमें बड़ा वर्ग कहता है कि पुलिस-प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के कारण वर्षों बाद शहर शांति की राह पर है। वहीं, आरोपियों के परिजन इसे क्रूरतम कार्रवाई करार देते हैं। लोग खुलकर कैमरे के सामने भले ही कुछ न बोलें, लेकिन उनकी खामोशी ही कई बार उनका दर्द बयां कर देती है। उनकी सूनीं आंखें आज भी अपनों के जेल से लौटने का इंतजार कर रही हैं।
एक साल बाद मुख्त्यार गिरफ्तार
बवाल के दौरान फरीदापुर निवासी रफीक बेग समेत नौ लोगों को आरोपी के तौर पर चिह्नित किया गया था, लेकिन इनमें मुख्त्यार का नाम नहीं था। करीब एक साल बाद मुख्त्यार को चिह्नित कर गिरफ्तार किया और जेल भेजा गया। बताया जा रहा है कि मुख्त्यार ही वह शख्स है, जिसने पूर्व पार्षद वाजिद बेग से चाबी लेकर बरातघर में मौलाना तौकीर की सभा कराई थी। इस बरातघर को बीडीए ने अवैध बताकर गिरा दिया था। वाजिद बेग को भी दंगे का आरोपी बनाया था। पुलिस ने मुख्त्यार को गिरफ्तार कर साफ संकेत दिया है कि बलवे में शामिल तत्वों को एक साल बाद भी चिह्नित किया जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई से शहर से सटे फरीदापुर में हलचल भी शुरू हो गई है। जिन बलवाइयों को जमानत मिल गई है, वह भी पुलिस की नई कार्रवाई के बाद भूमिगत हो गए हैं। पुलिस अफसरों का यह भी मानना है कि खुराफातियों का यही डर शहर की शांति के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। सूत्रों के मुताविक, पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। जिन आरोपियों की जमानत हो गई है, उन पर भी निगरानी रखी जा रही है।
माहौल भांपकर पुलिस ने पहले ही तैयार कर लिया था कार्रवाई का खाका
मौलाना तौकीर रजा खां ने बीते साल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 26 सितंबर को प्रदर्शन करने की बात कही थी। पुलिस-प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद भी 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद शहर के विभिन्न स्थानों पर सिर तन से जुदा के नारे लगाकर माहौल खराब किया गया। पुलिस पर हमले किए गए।
बवाल के बाद पुलिस ने कोतवाली में सात रिपोर्ट दर्ज कीं, इनमें 50 आरोपी नामजद किए गए। इन मुकदमों की विवेचना में 259 आरोपियों के नाम प्रकाश में लाए गए। प्रेमनगर में एक रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसमें 24 आरोपी नामजद कराए गए और 36 के नाम विवेचना के दौरान प्रकाश में आए। कैंट में दस आरोपियों को नामजद कराते हुए रिपोर्ट दर्ज की गई और विवेचना में 42 लोगों को चिह्नित कर आरोपी वनाया गया।
किला थाने में तीन लोगों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई, जबकि 31 को विवेचना के दौरान आरोपी बनाया गया। बारादरी में दो रिपोर्ट दर्ज की गईं, जिनमें 47 लोगों को नामजद किया गया था। इन दोनों मुकदमों की विवेचना में 111 को आरोपी बनाया गया। दो आरोपियों को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया था। इस प्रकार पुलिस ने दंगे के मुख्य आरोपियों के नाम एक से अधिक मुकदमे में खोल दिए। इससे वे पुलिस की कार्रवाई में फंसकर रह गए। इनमें कई आरोपियों के नाम दर्ज हुए सभी 12 मुकदमों में खोले गए।
इस वजह से उन्हें जमानत नसीब नहीं हो पा रही है। दर्ज हुए 12 मुकदमों में से 11 की वादी खुद पुलिस है, इसलिए भी दंगे के आरोपी बच निकलने में असफल रहे। पुलिस ने जिन लोगों को नामजद किया और जिनके नाम विवेचना के दौरान खोले, उनमें से एक भी नाम गलत नहीं पाया गया। इस प्रकार पुलिस द्वारा आरोपी बनाने की कार्रवाई सौ प्रतिशत सही रही।
तौकीर रजा खां एक साल से फतेहगढ़ जेल में बंद है। तौकीर पर कुल 22 मुकदमे दर्ज हैं। तौकीर को दंगे के दौरान एक दर्जन मुकदमों में आरोपी बनाया गया है, जबकि दस मुकदमे पहले से उसके खिलाफ विचाराधीन थे। तौकीर रजा खां ने विभिन्न मामलों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका भी दाखिल की थी, लेकिन अपराध की गंभीरता और उसके आपराधिक इतिहास के कारण वे खारिज कर दी गई।
वहीं, पुलिस ने भी सरकारी वकीलों के जरिये मौलाना के खिलाफ मजबूत साक्ष्य व गवाह अदालत में पेश किए। इसके कारण मौलाना तौकीर की रिहाई अटक गई है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में लगातार पैरवी कर रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस की पैरवी जारी रही तो आरोपियों को सजा भी हो सकती है।