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Banda News: डेंगू की दस्तक, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त का टोटा
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फोटो-13-जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक। अमर उजाला
फोटो-13-जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक। अमर उजाला
= महज 13 यूनिट रक्त शेष, इनमें छह यूनिट की जांच बाकी
= एबी निगेटिव समेत चार ब्लड ग्रुप खत्म, प्लेटलेट्स की जरूरत बढ़ने पर बढ़ सकती है मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। अब तक दो मरीज सामने आ चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में डेंगू के मरीज बढ़ने की आशंका के बीच जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कमी चिंता बढ़ा रही है। रक्तकोष में इस समय महज 13 यूनिट रक्त उपलब्ध है। इनमें दो यूनिट 100-100 मिलीलीटर की हैं, जबकि छह यूनिट रक्त की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
डेंगू में कई मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से कम होते हैं। ऐसे में समय पर रक्त संबंधी जरूरत पूरी करना चुनौती बन सकता है। जिला अस्पताल के रक्तकोष में एबी निगेटिव, एबी पॉजिटिव, बी निगेटिव और ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप की एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं है। अन्य ब्लड ग्रुपों का स्टॉक भी कम है। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन करीब 20 यूनिट रक्त की मांग रहती है। रक्त देने के बदले रक्तदाता से रक्त लिया जाता है, लेकिन रक्तदान के बाद उसे सीधे मरीज को नहीं दिया जा सकता। रक्त की जांच और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही उसका इस्तेमाल किया जाता है।
रक्तकोष की एक और बड़ी समस्या यह है कि बदले में मिलने वाले रक्त में अधिकांश बी पॉजिटिव और ओ पॉजिटिव ग्रुप का होता है। इससे इन दोनों ग्रुपों का स्टॉक तो कुछ हद तक बना रहता है, लेकिन दूसरे ब्लड ग्रुपों की कमी दूर नहीं हो पाती।
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जरूरत पड़ने पर बिना रक्तदाता भी मिलता है रक्त
रक्तकोष से सामान्य तौर पर रक्त तभी दिया जाता है, जब मरीज की ओर से रक्तदाता उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, मरीज के साथ कोई रक्तदाता न होने या परिजन के रक्तदान करने में सक्षम न होने की स्थिति में भी जरूरत के अनुसार रक्त उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की स्वीकृति ली जाती है।
वर्जन
सीएमएस, जिला अस्पताल ने बताया कि रक्तकोष में उपलब्ध रक्त का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जा रहा है। रक्तदाताओं से रक्तदान के लिए अपील की जाती है। अलग-अलग ब्लड ग्रुप की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।ब्लड बैंक में उपलब्ध स्टॉक
ब्लड ग्रुप
जांचा हुआ स्टॉक
स्थिति
ए पॉजिटिव
1 यूनिट
उपलब्ध
बी पॉजिटिव
1 यूनिट
उपलब्ध
ओ पॉजिटिव
1 यूनिट
उपलब्ध
ए पॉजिटिव
3 यूनिट उपलब्ध
एबी पॉजिटिव
0
नहीं है
एबी निगेटिव
0
नहीं है
बी निगेटिव
0
नहीं है
ओ निगेटिव
0
नहीं है
अन्य/जांच लंबित
6 यूनिट
जांच के बाद उपयोग योग्य
-- -- -- -- -- -- -- -
वर्जन
रक्तदाताओं को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है। स्वेच्छा से रक्तदान करने वाली संख्या कम है, इसके कारण रक्तकोष में कमी है। प्रयास है कि रक्तदान शिविरों का आयोजन कर इसे बढ़ाया जाए। -डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
-डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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= महज 13 यूनिट रक्त शेष, इनमें छह यूनिट की जांच बाकी
= एबी निगेटिव समेत चार ब्लड ग्रुप खत्म, प्लेटलेट्स की जरूरत बढ़ने पर बढ़ सकती है मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। अब तक दो मरीज सामने आ चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में डेंगू के मरीज बढ़ने की आशंका के बीच जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कमी चिंता बढ़ा रही है। रक्तकोष में इस समय महज 13 यूनिट रक्त उपलब्ध है। इनमें दो यूनिट 100-100 मिलीलीटर की हैं, जबकि छह यूनिट रक्त की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
डेंगू में कई मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से कम होते हैं। ऐसे में समय पर रक्त संबंधी जरूरत पूरी करना चुनौती बन सकता है। जिला अस्पताल के रक्तकोष में एबी निगेटिव, एबी पॉजिटिव, बी निगेटिव और ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप की एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं है। अन्य ब्लड ग्रुपों का स्टॉक भी कम है। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन करीब 20 यूनिट रक्त की मांग रहती है। रक्त देने के बदले रक्तदाता से रक्त लिया जाता है, लेकिन रक्तदान के बाद उसे सीधे मरीज को नहीं दिया जा सकता। रक्त की जांच और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही उसका इस्तेमाल किया जाता है।
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रक्तकोष की एक और बड़ी समस्या यह है कि बदले में मिलने वाले रक्त में अधिकांश बी पॉजिटिव और ओ पॉजिटिव ग्रुप का होता है। इससे इन दोनों ग्रुपों का स्टॉक तो कुछ हद तक बना रहता है, लेकिन दूसरे ब्लड ग्रुपों की कमी दूर नहीं हो पाती।
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जरूरत पड़ने पर बिना रक्तदाता भी मिलता है रक्त
रक्तकोष से सामान्य तौर पर रक्त तभी दिया जाता है, जब मरीज की ओर से रक्तदाता उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, मरीज के साथ कोई रक्तदाता न होने या परिजन के रक्तदान करने में सक्षम न होने की स्थिति में भी जरूरत के अनुसार रक्त उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की स्वीकृति ली जाती है।
वर्जन
सीएमएस, जिला अस्पताल ने बताया कि रक्तकोष में उपलब्ध रक्त का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जा रहा है। रक्तदाताओं से रक्तदान के लिए अपील की जाती है। अलग-अलग ब्लड ग्रुप की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।ब्लड बैंक में उपलब्ध स्टॉक
ब्लड ग्रुप
जांचा हुआ स्टॉक
स्थिति
ए पॉजिटिव
1 यूनिट
उपलब्ध
बी पॉजिटिव
1 यूनिट
उपलब्ध
ओ पॉजिटिव
1 यूनिट
उपलब्ध
ए पॉजिटिव
3 यूनिट उपलब्ध
एबी पॉजिटिव
0
नहीं है
एबी निगेटिव
0
नहीं है
बी निगेटिव
0
नहीं है
ओ निगेटिव
0
नहीं है
अन्य/जांच लंबित
6 यूनिट
जांच के बाद उपयोग योग्य
वर्जन
रक्तदाताओं को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है। स्वेच्छा से रक्तदान करने वाली संख्या कम है, इसके कारण रक्तकोष में कमी है। प्रयास है कि रक्तदान शिविरों का आयोजन कर इसे बढ़ाया जाए। -डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
-डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल