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Ambedkar Nagar News: अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, सात गिरफ्तार

Mon, 06 Jul 2026 10:29 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2026 10:29 PM IST
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Interstate human trafficking gang busted, seven arrested
अकबरपुर पुलिस की गिरफ्त में मानव तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्य। स्रोत पुलिस मीडिया सेल
अंबेडकरनगर। अकबरपुर पुलिस ने सोमवार को अंतरराज्यीय मानव तस्करी के एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से आजमगढ़ की अपहृता युवती को सकुशल मुक्त कराया है। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की युवतियों को शादी का झांसा देकर राजस्थान और हरियाणा ले जाता था, जहां उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया जाता था।
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एसपी प्राची सिंह ने बताया कि अकबरपुर पुलिस, एएचटीयू, स्वाट और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई की है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने बसखारी मार्ग स्थित खिद्दिरपुर के पास टाटा मोटर्स के निकट घेराबंदी कर कार्रवाई की। पुलिस टीम ने मौके से बाबूलाल, नरेंद्र कुमार निवासी सुमेरपुर जनपद पाली (राजस्थान), मोहनलाल निवासी रामपुरा सिरोही राजस्थान, बीराराम, इसकी पत्नी चंद्रकला उर्फ पूनम निवासी कोलीबाड़ा सुमेरपुर राजस्थान, नसरूद्दीन निवासी मखनहा अतरौलिया आजमगढ़, व ऊषा निवासी भाऊकुआं जलालपुर को गिरफ्तार किया है।
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इस गिरोह की मुखिया ऊषा है और इसी के संचालन में पूरा गिरोह काम कर रहा था। आजमगढ़ के अतरौलिया से एक युवती को झांसा देकर पांच दिन पहले अपहृत किया था और राजस्थान ले जाने की तैयारी थी। युवती को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है। आरोपियों के खिलाफ पूर्व का कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया। वहीं गिरोह के अन्य सदस्यों, आर्थिक नेटवर्क और दूसरे राज्यों में सक्रिय सहयोगियों की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में सीओ सिटी नितीश कुमार तिवारी, प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह, प्रभारी सर्विलांस सेल संजय कुमार पांडेय, प्रभारी स्वाट टीम अजीत कुमार पांडेय, एएचटीयू प्रभारी जैद अहमद, शैलेंद्र चौधरी, एसआई महिला प्रियांशु भट्ट शामिल रहे।
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ऐसे चलता था खेल
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह के सदस्य पहले आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय और अनाथ परिवारों की युवतियों की पहचान करते थे। उन्हें संपन्न परिवार में शादी कराने का झांसा देकर विश्वास में लिया जाता था। इसके बाद युवतियों के नाम बदलकर फर्जी पहचान पत्र तैयार किए जाते और गिरोह के सदस्य ही दूल्हा, बराती तथा रिश्तेदार बनकर फर्जी विवाह कराते थे। विदाई के बहाने युवतियों को राजस्थान और हरियाणा ले जाया जाता था। यात्रा के दौरान गिरोह की महिला सदस्य उनके साथ रहती थी, ताकि किसी जांच के दौरान यह सामान्य विवाह यात्रा प्रतीत हो। वहां पहुंचने के बाद युवतियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध देह व्यापार में धकेल दिया जाता था और उनकी वापसी लगभग असंभव बना दी जाती थी।

दो लाख में होती थी सौदेबाजी
पूछताछ में यह भी सामने आया कि एक युवती के बदले राजस्थान के ग्राहकों से दो लाख रुपये तक वसूले जाते थे। इसमें एक लाख रुपये नकद और एक लाख रुपये बैंक खाते के माध्यम से लिए जाते थे। इस रकम में से 40 हजार रुपये नकद ऊषा के कब्जे से बरामद किए गए हैं।
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