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Ambedkar Nagar News: जमीन पर हक नहीं जता सके भाई, अपील खारिज
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अंबेडकरनगर। टांडा तहसील के फूलपुर घाट गांव में एक भूखंड को पुश्तैनी सहन बताकर मालिकाना हक मांगने वाले दो भाइयों को अदालत से राहत नहीं मिली। जिला जज चंद्रोदय कुमार ने मोहम्मद शमीम और मोहम्मद वसीम की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
दोनों भाइयों ने वर्ष 2006 में नन्हे और मोहम्मद शकील के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उनका दावा था कि विवादित जमीन पर नीम का पेड़ है और पूर्वजों के समय से इसका इस्तेमाल सहन के रूप में होता रहा है। आरोप था कि 10 मई 2011 को विपक्षियों ने उनकी गैरमौजूदगी में जमीन पर हैंडपंप लगाकर कब्जा कर लिया। उन्होंने हैंडपंप हटवाने और जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान अमीन की रिपोर्ट और नक्शे में वादी पक्ष के मकान व विवादित भूखंड के बीच टिनशेड, खुला सहन और नाली पाई गई। रिपोर्ट में हैंडपंप भी विवादित जमीन के बजाय वादी के सहन में दर्शाया गया था। वहीं, मोहम्मद शमीम की गवाही में जमीन की सीमाओं को लेकर विरोधाभास सामने आया।
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अदालत ने माना कि वादी पक्ष न तो धारा नौ के तहत मालिकाना हक और न ही जमीन पर अपना पूर्व कब्जा साबित कर सका। जिला जज ने 30 अप्रैल 2025 के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए अपील निरस्त कर दी।
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दोनों भाइयों ने वर्ष 2006 में नन्हे और मोहम्मद शकील के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उनका दावा था कि विवादित जमीन पर नीम का पेड़ है और पूर्वजों के समय से इसका इस्तेमाल सहन के रूप में होता रहा है। आरोप था कि 10 मई 2011 को विपक्षियों ने उनकी गैरमौजूदगी में जमीन पर हैंडपंप लगाकर कब्जा कर लिया। उन्होंने हैंडपंप हटवाने और जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की थी।
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सुनवाई के दौरान अमीन की रिपोर्ट और नक्शे में वादी पक्ष के मकान व विवादित भूखंड के बीच टिनशेड, खुला सहन और नाली पाई गई। रिपोर्ट में हैंडपंप भी विवादित जमीन के बजाय वादी के सहन में दर्शाया गया था। वहीं, मोहम्मद शमीम की गवाही में जमीन की सीमाओं को लेकर विरोधाभास सामने आया।
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अदालत ने माना कि वादी पक्ष न तो धारा नौ के तहत मालिकाना हक और न ही जमीन पर अपना पूर्व कब्जा साबित कर सका। जिला जज ने 30 अप्रैल 2025 के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए अपील निरस्त कर दी।